ज्ञानियों और 'लेकिन मोदी, लेकिन योगी' करने वालों के नाम
दस महीने से बातें चल रही हैं। इन दस महीनों में कई ‘नेता’ बने। किसी ने कॉन्ग्रेस से पैसे ले कर आंदोलन को खराब करने का प्रयास किया, कोई भाजपा के नेताओं की गोद में बैठ गया ताकि आंदोलन में टूट पड़ जाए। कोई गाँव-गाँव भटक कर ₹40-50 लाख जुटा चुका है, पर स्टेज पर गाली सुनता है, गद्दार कहलाता है।
जैसे-जैसे चुनाव समीप आता जाएगा, पार्टियों के फंड बढ़ते जाएँगे। इनमें से कई ने यह तक कहा कि फलाना आ जाएगा, हमने बताया कि जिसका भय, जो कह कर दिखा रहे हो, वही सब तुम्हारी फेवरेट पार्टी कर चुकी है। यह नैरेटिव ध्वस्त हो गया।
अब नया चल रहा है: सारी बातें सही हैं, हर नीति जिस पर GC नकारात्मक लाइन ले रहा है, सब उचित है! लेकिन मोदी जी… लेकिन योगी जी…
कैंचो! ये कौन सी लाइन है बे? जब सारी नीतियाँ, जिस पर हम बोल रहे हैं, गलत ही हैं। सब समाज को विभाजित करने वाली ही हैं, तो हम बोलेंगे किसको? विरोध किसका करें? तिलचट्टा पार्टी का?
तुमने ये जो कुत्ते की विष्ठा समाज के आँगन में फेंकी है, उसका हम करें क्या? और उल्टा हम पर ही आक्षेप कि हम मोदी विरोध में राष्ट्र विरोधी हो गए? मेरे मुँह से निकला एक वाक्य बता दो जहाँ मैंने भारत के विरोध में कुछ बोला हो पिछले दस महीनों में!
वो नहीं निकाल पाओगे। हाँ, तुम्हें यदि लगता है कि मोदी या योगी ही राष्ट्र हैं, तो मैं बता देता हूँ कि मोदी एक छपास का भूखा, निकृष्ट स्तर का जातिवादी हो चुका है। या, पहले ही था, हमें दिखा नहीं कभी।
योगी भी राष्ट्र नहीं हैं। राष्ट्र न मैं हूँ, न तुम हो, राष्ट्र हम सब हैं। नेता उतना ही अच्छा होता है जितनी उसकी गवर्नेंस। बाकी चीजें फ्लफ हैं। योगी जी के नाक के नीचे यूपी में जो भ्रष्टाचार, जातिवाद चल रहा है वह किसी को क्यों नहीं दिखता? सब भूल जाएँ क्योंकि वो भाजपा के हैं और हमारे पास कोई विकल्प नहीं! तो हम विकल्प बनाएँगे, समय लगेगा, लेकिन बनाएँगे। और कोई चारा नहीं है।
ध्यान रहे कि 2024 के बाद, हिन्दू समाज ‘बँटेंग तो कटेंगे’ पर एकजुट हो कर भाजपा को लगातार वोट दे रहा था। फिर इनके मलद्वार में UGC का कीड़ा घुसा कि राहुल गाँधी क्या ‘रोहित वेमुला एक्ट’ लाएगा, हम उस एक्ट से भी विकृत चीज ले कर आएँगे और OBC को बताएँगे कि तुम्हें भी सुरक्षा दे दी गई है। अब शत्रु केवल एक है: सवर्ण!
सरकार की अपनी रिपोर्ट में अब उच्च शिक्षा के कॉलेजों में SC/St/OBC की संख्या 62% हो चुकी है, सवर्णों (मुस्लिम आदि समेत) के बच्चे EWS समेत केवल 38% में हैं। जहाँ मुस्लिम, दलित का एनरोलमेंट 200% से अधिक बढ़ा है, अनारक्षित की संख्या, 2020-21 से 2023-24 में 37 लाख से घटी है! जी हाँ, प्रतिशत ही नहीं, संख्या भी घटी है!
हम अंधे नहीं हैं। हमें ओडीशा, मध्यप्रदेश समेत सब दिख रहा है। हमें कर्नाटक में वेमुला एक्ट पर तुम्हारी चुप्पी भी दिखी। हमें ओबीसी में मुस्लिम को घुसाना भी दिखा। हमें भर्तियों में लगातार कम होती सवर्ण सीटें भी दिख रही हैं।
हमारा माय-बाप अब हमारे घर वाले ही बचे हैं। हमने वह आउटसोर्सिंग अब बंद कर दी है। हम नहीं जानते कि यूपी चुनाव में क्या होगा, लोकसभा चुनाव कैसा बीतेगा, पर हम बिना लड़े नहीं मरेंगे। और जो हमारे साथ नहीं है, जो हमें शर्तें गिना रहा है, वह सब ही शत्रु है।
मेरे मन में ऐसे किसी भी व्यक्ति को ले कर कोई सम्मान नहीं है जो 'किंतु-परंतु' में उलझा हुआ है और किसी अस्तित्वहीन 'RW' की दुहाई दे रहा है। RW जैसी कोई भी सुसंगठित व्यवस्था ना कल थी, ना आज है।
मैंने फ़रवरी में ही यह सब सुना था कि 'अब बस कर दो भाई, कितना UGC करते रहोगे'। मैं तब भी नहीं रुका था। और जब आज भी तुम सब वही कह रहे हो कि 'ये साला पागल हो गया है, सबसे लड़ रहा है, एक ही बात हर दिन बोलता है', मैं आज भी नहीं रुकूँगा। क्योंकि फ़रवरी में न रुकने का परिणाम हमे सितंबर में दिखा, और आज ना रुकने का मार्च में दिखेगा।
मैं लाखों की भीड़ में अकेला भी एक तरफ़ रहूँ और मैं कनविंस्ड रहूँ कि मैं सही हूँ, तो मुझे भीड़ ना तो दिखाई देती है, ना उसकी ध्वनि सुनाई देती है। मैं जो कर रहा हूँ, और जो करता रहूँगा उसका एक कॉस्ट है जो मैंने इन किसी भी 'मठाधीशों' से नहीं माँगा।
आज ये ज्ञान देने लगे, तो बताया कि ये कितने बड़े दोगले हैं। आगे और भी बहुत कुछ बताऊँगा कि किसके लिए कोई विषय केवल एक विषय है, और किसके लिए फण्ड उगाही का एक मार्ग। डेढ़ हज़ार लोग को जोड़ नहीं सकते और 'चार लोग नहीं आएँगे सड़क पर' का ज्ञान देते थे ये सब। हमने कितने उतार दिए, वो सबको दिख गया।
अभी हमारी लड़ाई का पहला चरण है। और इसकी टाइमलाइन छः महीने की नहीं, छः वर्ष की है। तुम्हें हमारी भीड़ नहीं दिखेगी क्योंकि हम भीड़ जुटा ही नहीं रहे। बाक़ी, समय सबको उत्तर देता है। बड़े-बड़े सिंहासनों को इन्हीं ब्राह्मणों ने उठाया और गिराया है।
जो सत्ता अपने समाज की प्रतिभा का सम्मान नहीं करती, वह मिट्टी में मिल जाती है।
बीजेपी को अपनी कुर्सी की पड़ी है, हिंदुत्व की नहीं।
बीजेपी ने अपने फायदे के लिए उन सभी विचारधाराओं से समझौता किया है, जिन्होंने हिंदुत्व को चोट पहुँचाई है।
चाहे जातिवादी राजनीति हो, दिलीप मंडल को मीडिया प्रभारी बनाना हो, अल्पेश ठाकुर और हार्दिक पटेल को टिकट देना हो, फुले की विचारधारा को पोषित करना हो या ब्राह्मणों के खिलाफ घृणित बयानों पर मौन समर्थन देना हो, सब कुछ किया है।
यदि ऐसे ही हिन्दुत्व के लिए काम किया जाएगा,तो माफ करिए नहीं चाहिए ऐसा हिंदुत्व।🙏
कहावत है :
कानून बीमार हो सकता है, लाचार नहीं।
लेकिन SC/ST Act के दुरुपयोग ने सवाल खड़ा कर दिया है
क्या हमारा कानून अब बीमार भी है और लाचार भी?
RT if you agree
#SCSTAct#SCSTActMisuse#LegalReform
मोदी जी अपने पिता जी की FD तोड़ कर दलीत समाज को ‘इन्क्लूसिविटी रिसर्च ग्रांट’ हेतु ₹60 लाख की फंडिंग दिलवाएँगे।
मोदी जी ने कोर रिसर्च में भी जाति निकाल ली। आपको कम्पीट नहीं करना है, बस एक जाति समूह से आना है। EWS के बच्चे तरसते हैं फंडिंग के लिए और यहाँ मोदी जी बाबूजी की FD तोड़े जा रहे हैं भारत माता और हिन्दुत्व के नाम पर।
NCERT की History और Social Science books में caste discourse को लेकर गंभीर प्रश्न: क्या Ambedkar, Phule और Periyar के नाम पर बच्चों को one-sided, anti-Brahmin narratives पढ़ाए जा रहे हैं?
Ajeet Bharti questions the curriculum, its impact on young minds, and asks; BJP-RSS इस पर silent क्यों है?
हर नेता और प्रत्याशी को ऐसे ही वीडियो पर बोलने को विवश करो चाहे वह मोदी एक्ट हो, यूजीसी हो या आरक्षण। ये बोलेंगे और फँसेंगे। रिकॉर्ड करो और सोशल मीडिया पर डालो।
इन गद्दारों और ब्लैकमैलरों को खींच-खींच कर निकालना है।
Do you know that @narendramodi has already started 'Wealth Redistribution Scheme' though the bullshit of 'social justice' where our hard earned money is frivolously distributed to those who can vote for BJP?
In 2013-14 the budget for SC & ST was ₹41,561 cr and ₹24,598 cr. The great Ambedkarite Narendra Modi took it to unthinkable levels of ₹1,96,400 cr and ₹141,089 cr. In 12 years he raised it by 5 times for SCs and 6 times for STs.
In contrast the education budget in 2013-14 was ₹79,451 cr and the same for 2026-27 is ₹1,39,289.48 crore. Do you know how much it has increased in these 12 years of Modi rule? 75.3%! Yes, that's how great a priority education is for Modi.
And that's precisely why our whole education system is in shit because Modi wants all the money for rewadibazi that he has been consistently doing all these years, which went unnoticed till he screwed the GCs by UGC rules.
Yet, this (500-600% increase) was not done to uplift them, but for the chest-thumping that @BJP4India does in election rallies. This is just a data to let you know how electoral gains are prioritised over social upliftment.
Skills add value, rewadis kill it. This is the great wealth redistribution that Modi has been doing, silently. Share it and discuss it. And ask the morons who are defending BJP's shitty policies in these areas.
I will keep sharing more and more data points so that you are made aware of the theft of our hard earned money which is sacrificed at the altar of fake 'Rashtravaad' & 'Hindutva' narrative which is actually 'Ambedkarvaad' & 'casteism' repackaged to pull a curtain over our senses.
India has become first country in the world where someone abuses ur sister u can't abuse back
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If u abuse back,,u will be booked under law,,,due to your caste
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INDIAN BJP govt harrassing Citizens extremely by booking false cases without investigation
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@nshuklain इन लोगो पर कोई आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं होती ?
मोदी को वोट सिर्फ इन्ही लोगो ने दिया था क्या ?
मोदी एक्ट ने सामाजिक समरसता बिगाड दिया है !