उत्तिष्ठत मा स्वप्त अग्निमिच्छध्वम भारता:
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पूर्व लोक माध्यम प्रबंधक
गरिमामयी प्रश्न को उत्तरदायी।
संत सेवक, Stranded People Activist.
📖 संक्षिप्त शिवपुराण — बांग्ला संस्करण (कोड नं. 1937)
भगवान शिव की अलौकिक महिमा, दिव्य लीलाओं एवं शाश्वत तत्त्वज्ञान से परिपूर्ण संक्षिप्त शिवपुराण का यह बांग्ला संस्करण भक्ति, ज्ञान और मोक्ष का दिव्य प्रकाश है।
✨ संक्षिप्त एवं सरल बांग्ला भाषा में — सभी के लिए सुगम
✨ सुन्दर रंगीन चित्रों सहित शिवकथा की अपूर्व प्रस्तुति
📚 गीता प्रेस, गोरखपुर
आस्था, भक्ति और शाश्वत ज्ञान का प्रतीक।
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🙏 शिव की कृपा से हो जीवन का कल्याण!
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मुदित जी सैकड़ों वर्षों के संघर्ष, लाखों निष्ठावान व्यक्ति के जीवन समर्पण और बलिदान की लालिमा से चमकता हुआ भव्य रामलला मंदिर।
हम उनके आजीवन दास अब छोटे मोटे लोगों को उत्तर देंते हैं, तो भी अपनी गरिमा को इनकी नीचता जितना नहीं गिरा पाएंगे।
@bstvlive नाम तक नहीं सुना ऐसोंका। छोड़िए
मीडिया हिन्दू विरोध में अपनी हदें पार कर रहा है। इसमें क्या दुरुपयोग है? कार्यक्रम होगा तो खर्च नहीं होगा क्या। तुम लोगों से पूछकर होगा क्या खर्च। हिन्दू विरोध में इतना नीचा मत गिरो कि सुध बुध ही खो जाए। इतने बड़े बड़े सुंदर भव्य कार्यक्रम हुए हैं, हिन्दुओं का पैसा है मंदिर के विविध प्रकल्पों और कार्यक्रमों पर ही खर्च होगा।
@AnupamPKher ने बहुत सही बात कही
घर में चोरी हो जाए तो आप चोर को कोसते हैं घर को नहीं।
ये बात हम हिन्दुओं को समझने की है।
-सही है,,चोर कोई भी हो उसे दण्डित किया जाए और चोरी के नाम पर छिछोरी करने वालों को दुत्कारा जाए।
अजोध्या जी के #श्रीराम_मंदिर प्रकरण पर बहुत कम लिखा। या कहिए चुप ही रहा। क्योंकि #सृजन की पीड़ा क्या होती है, इस बार के अजोध्या जी प्रवास में समझा। बहुत ही ज्ञानी साधक युवा सन्त से। युवा सन्त साधक का नाम सार्वजनिक नहीं कर सकता। क्योंकि मर्यादा का उल्लंघन होगा।
चर्चा में साधक सन्त ने बताया, श्रराम मंदिर निर्माण कार्य से पहले ट्रस्ट की बैठक में एक प्रस्ताव आया, भारत और विदेश के धनाढ्य हिन्दू, मंदिर निर्माण में लगने वाले समस्त धन का वहन करना चाहते हैं, बदले में अपने कुल-परिवार की पट्टिका लगवाने की इच्छा है।
इस पर प्रधानमंत्री @narendramodi ने कहा, "..ऐसा कदापि नहीं हो सकता, श्रीराम मंदिर का संघर्ष #लोकसमाज ने किया, मंदिर का #निर्माण भी लोकसमाज ही करेगा।"
यह एक बहुत ही साहसिक कदम था। मंदिर समाज की संपति है, निर्माण और संरक्षण भी समाज का दायित्व। नहीं तो कितना आसान था, चंद धनाढ्यों से करोड़ों का सहयोग लेकर मंदिर निर्माण कर दो, फिर यही चंद धनाढ्य और इनकी संततियां अनन्तकाल तक श्रीराम मंदिर निर्माण का श्रेय लेती रहती। व्यापक समाज स्वयं को छला, ठगा और उपेक्षित महसूस करता।
यहां प्रश्न खड़ा होगा, तो फिर मंदिर का प्रबंधन #लोकसमाज को क्यों नहीं? तो मेरा विनम्र उत्तर है, धर्मयुद्ध का क्या समापन हो गया? #रामराज जी स्थापना हो चुकी है? जो अंतिम परिणाम पर पहुंच गए?
इसका दूसरा पक्ष क्या होता? हम जैसे सामान्य हिन्दू और हमारी भावी पीढ़ी यह सुनने को अभिशप्त रहती, मंदिर तो टाटा, बिरला, अंबानी या अडानी जी ने बनवाया..हिन्दू समाज तो प्राणहीन है, मुर्दा है। हिन्दू होने का मेरा गौरवबोध इस लज्जा को स्वीकार करने की अनुमति कतई नहीं देता।
आज जब मंदिर को दान या सहयोग किए गए हर वस्तु का हिसाब, प्रणाम सामने आ रहा गए, फिर भी राजनेताओं को लज्जा नहीं आ रही है। इन जैसों से सवाल तो बनता है, मंदिर निर्माण के समय आपने, आपकी पार्टी ने क्या #जनसहयोग का अभियान चलाया? आप तब चुप थे? आज मुखर हैं? क्यों?
कारण एक ही है, व्यापक हिन्दू समाज के लिए धन कोई मुद्दा ही नहीं। विपक्ष, हिन्दू विरोधी ताकतों का एकमात्र मकसद है, मंदिर के चढ़ावे के बहाने हिन्दू समाज की #रामनिष्ठ को हिला दें। बचकाना प्रयास है। यह संभव ही नहीं। क्योंकि #श्रीराम_निष्ठा के पथ पर #धन का कोई मोल ही नहीं। रामनिष्ठा को हिलाना है तो श्रीराम से बड़े आदर्श, श्रीराम से विशाल मर्यादा की बात करो।
श्रीराम मंदिर #लोकसमाज का है। और यही लोकसमाज निर्णय करेगा, क्या निर्णय ले? चंद अधीर दानदाताओं और कुछेक राजनेताओं के विरोध का छींटा जा रहा #विष को निगल कर #जीवित रहने की शक्ति हिन्दू समाज की #मूल_चेतना में है।
सीता रसोई में निःशुल्क भोजन प्रसादी मिलती है।
होटल का बिल दिखाकर अयोध्या को बदनाम करके ये पत्रकार महोदय अपनी वामपंथी कुटिल मानसिकता ही प्रकट कर रहे हैं।
जो व्यक्ति स्वयं का ध्यान रखने में असमर्थ हैं, व्हीलचेयर से चलते हों, वो किस तर्क से ट्रस्ट के अध्यक्ष बने हुए हैं? संत हैं, अच्छी बात है, पर क्या संत को यह देखते हुए कि वो इस पद पर अपनी सेवा देने योग्य नहीं हैं, हट नहीं जाना चाहिए?
नृत्य गोपाल दास रोग-व्याधि से पीड़ित हैं, आयु अत्यधिक हो चली है, फिर भी उनका अध्यक्ष पद पर बने रहना कितना उचित है? वह भी तब जब ऐसे प्रकरण हो रहे हैं जिससे हर हिन्दू ठगा अनुभव कर रहा है?
भगवान राम की सेवा, भजन, आंदोलन में भाग लेना, आपके हिस्से के पुण्य हैं, परंतु दान की चोरी के समय अध्यक्ष होना, चोरी का पता चलने के उपरांत भी अध्यक्ष बने रहना सह बताता है कि आप पद से आसक्त हैं।
ऐसा व्यक्ति संत नहीं होता। उसके लिए दूसरा शब्द है, जो मैं नहीं लिख रहा। पूरा ट्रस्ट भंग होना चाहिए। जिनके रहते यह दुष्कृत्य हुआ, उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं।
नृत्य गोपाल दास ने महीने भर बाद एक रद्दी चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्हें मोदी-योगी से आशा है। किस मोदी से? जिसने एक शब्द नहीं बोला? किस योगी से? जिसकी इंटेलिजेंस यूनिट को पता तक नहीं पड़ा?
यह तो बाहर आ गया तो आज गिनने वालों को पकड़ा जा रहा है, परंतु जिन्होंने गिनने वालों को वहाँ लगवाया, वो क्या त्यागपत्र दे कर अपने दायित्व से हाथ धो लेंगे?
चम्पत राय जी और अनिल मिश्र जी का त्यागपत्र स्वीकार करके उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ न्यास से पदमुक्त कर दिया गया है।
साथ ही गोपाल नगरकोटे को विशेष आमन्त्रित सदस्य सूची से हटाने का निर्णय किया गया।
श्रीकृष्ण मोहन जी को अन्तरिम महासचिव का दायित्व सौंपा गया है।
विशेष बात ये है कि ये अब नई टीम का गठन करेंगे जो मन्दिर व्यवस्था का संचालन करेगी।
सुनो ज़ायनिस्ट @netanyahu सिर्फ RSS और उसके चेले चपाटों के अलावा कोई भी भारतीय ज़ायनिस्टस आतंकी 🇮🇱 के साथ नहीं है। ज़ायनिस्टों के साथ उतने ही भारतीय हैं, जितने स्वाधीनता संग्राम में अंग्रेज़ों के साथ थे। लिहाज़ा ख्याली पुलाव बनाने की चेष्टा ना करें। भारत गांधी से मोदी तक 🇵🇸 के साथ रहा है, और रहेगा।
अयोध्या में हर युग में अग्निपरीक्षा होती है-
(आज संतों को चढ़ावे का सामान देश को दिखाना पड़ रहा है. वैसे चढ़ावे को लेकर ऐसा पहली बार देश में हो रहा है. जिन लोगों की ओर से बड़ा चढ़ावा भविष्य में दिया जायेगा उनसे निवेदन है कि भई बड़ी रसीद लिये बिना चढ़ावे का सामान मत दे देना, और एक बार चढ़ावा दे देने के बाद ये पूछने मत जाना कि मेरा चढ़ावा कहाँ है? सबूत दिखाओ)
इस से अधिक तो मैंने दान किया था और मुझमें साहस नहीं है बच्चे को लंदन में पढ़ाने का। और राम का था राम को गया। होईहे वही जो राम रचि राखा। इतना छोटा मन रख के कांग्रेसी नेता भक्ति करते हैं?