विवाह के नाम पर धड़कते दिल
और मचलते अरमान की
जगह ले लिया है आजकल
सशंकित ह्र्दय,डरता हुआ मन
और काँपते हुए दिल ने।
पहले लड़की के घर वाले रहते थे
परेशान
मगर आज लड़के के घर वाले रहते
हैं डरे सहमे।
विवाह का यह रूप दिख रहा है,
पुराना स्वरूप बदल गया है।
रूचिका राय
@KavitaTwoFifty
अलमारी के किसी दराज में
मुड़ा-तुड़ा पड़ा है प्रेम पत्र मेरा।
जैसे भावनाओं को थपकी देकर
किसी कोने में सुलाया है।
हर शब्द स्मृतियों के भँवर में उलझाता
कभी दर्द के सागर में
डूबता उतराता
कभी खुशियों की सैर पर जाता।
भावनाओं का साक्षी यह
स्मृति पटल पर सजा है।
@KavitaTwoFifty@swatikhatri_ अलमारी के किसी दराज में
मुड़ा-तुड़ा पड़ा है प्रेम पत्र मेरा।
जैसे भावनाओं को थपकी देकर
किसी कोने में सुलाया है।
हर शब्द स्मृतियों के भँवर में उलझाता
कभी दर्द के सागर में
डूबता उतराता
कभी खुशियों की सैर पर जाता।
भावनाओं का साक्षी यह
स्मृतियों के पटल पर सुंदरता से सजा है।
@KahaniTwoFifty वह उदास सी बैठी बीते वक़्त को याद कर रही थी,कैसे एक दूजे के सुख दुख के साथी बन वह जिंदगी के पथरीले रास्ते पर आगे बढ़ रहे थे।
पर क्रूर नियति ने इन राहों पर उसे अकेला कर दिया था।
मगर वह अकेली कहाँ थी? आज भी तो वह साथ ही था,यादों के रूप में,प्रथम और अंतिम प्रेम की तरह।
#kahani250
वह उदास सी बैठी बीते वक़्त को याद कर रही थी,कैसे एक दूजे के सुख दुख के साथी बन वह जिंदगी के पथरीले रास्ते पर आगे बढ़ रहे थे।
पर क्रूर नियति ने इन राहों पर उसे अकेला कर दिया था।
मगर वह अकेली कहाँ थी? आज भी तो वह साथ ही था,यादों के रूप में,प्रथम और अंतिम प्रेम की तरह।
#Kavita250
एक इकलौता आशा का दीपक
तूफानों से है लड़ रहा।
कभी तेज हवा संग बुझ रहा,
फिर वो जल रहा।
हौसले भी कुछ इस तरह टूटते
बिखरते कमजोर पड़ते।
कभी आँसूओं संग बुझती आशा,
कभी उम्मीद की लौ जल रही।
बस यही प्रार्थना कि
आशा का दीपक बुझ न पाए।
तूफान चाहे कितने आये
दीपक की लौ जगमगाए।
@KavitaTwoFifty
स्वस्थ हो मानव तन,
खुशहाल रहे हर मन,
रात के अँधेरे पर विजित हो,
सदा ही दिन का प्रकाश।
मुँडेरो ���े ले चौखट तक,
चौरा से ले खलिहान तक
रोशनी का हो वास
दीपों की अवलि से
जगमग रहे हर आम खास।
मेरी दीपावली कुछ
ऐसी रहे,
निराश मन को मिल जाए
सुकून का एहसास।
#kavita250
धरती की सहनशीलता,
आकाश का विस्तार
लेकर जीवन में बढ़े
और पाएं जिंदगी के खूबसूरत लम्हें
तमाम दुश्वारियों के साथ।
धरती जो धारण करें
हमारे जीवन की हर ऊँच नीच
आकाश विस्तार दे सोचों को
और बताये जीवन है अनमोल
जीवन है खास।
#kavita250
क्षितिज पर हो रहा
धरती आकाश का मिलन।
कल्पनाओं में डूब रहा
देखकर ये मन।
मिलेंगे दो प्रेमी क्षितिज के पार
दुनियावी रीति रिवाज से दूर
होगी प्रेम की शुभ शुरूआत
होठों पर मुस्कान के साथ।
उनींदी पलकों में बसा एक स्वप्न,
जागते सोते देखते रहें
की मुस्कान चे��रे की दिल का आईना हो
और दिल मुस्कुराए
जीवन में हो सदा हसीन पल।
बंद मुट्ठी खोलें
और स्वप्न हकीकत बन जाए
जीवन के हर संघर्ष के बाद
मिल जाए सदा हसीन पल।
#Kavita250
मुश्किल राहें जिंदगी की
जब कभी मुझे तोड़ती।
अपनी सी दुनिया के
अपने लगते सारे रिश्ते,
मुझसे मुँह फेरती।
अच्छा लगा रेगिस्तान बीच
जल का सोता बन तेरा आ��ा
प्यासी रूह को
प्रेम से तृप्त कर जाना।
अच्छा लगा बारिश बूँदों
जैसा जीवन में तेरा आना।
तन मन को भिंगोकर
दिल को राहत पहुँचाना।
जख़्मों पर मेरे मरहम लगाना,
बिना कहे ही हक जताना,
मुश्किलों में साथ रहकर,
मेरी मनःस्थिति को समझ जाना
मेरे दिल को अच्छा लगा।
अच्छा लगा तुम्हारा परवाह करना,
नही कोई मुझसे चाह रखना,
मेरे संग में मुस्कुराना,
हँसकर मुझको गले लगाना,
खुले दिल से है अपनाना।
#Kavita250
तेरे नाम की धुन,
मेरे होठों से लगी है।
ह्र्दय स्पंदन जैसे
कोई राग छिड़ी है।
संगीत प्रेम का,
कानों में अमृत घुल गया है।
तड़पते दिल को,
जैसे सुकून मिल गया है।
हर राग उदास है,
प्रेम के इस मनो��म राग बिन।
जैसे तड़पता है संगीत सुर,
सुनहरे स्वप्निल साज बिन।
#kavita250