#JusticeForTeachers
TET अनिवार्यता के प्रश्न पर शिक्षक असमंजस में हैं। RTE से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के अनुभव और सेवा का सम्मान होना चाहिए। नियम परिवर्तन का प्रभाव पूर्व नियुक्तियों पर न्यायसंगत पुनर्विचार योग्य है। हम संवाद और संतुलित समाधान चाहते हैं,शिक्षक सम्मानित होगा तभी शिक्षा और राष्ट्र सशक्त होंगे।
@DrDCSHARMAUPPSS
#JusticeForTeachers
देश के सभी राज्यों में आरटीई लागू होने के पूर्व राज्यों द्वारा निर्धारित अर्हता रखने वाले अभ्यर्थियों को ही शिक्षक पद पर नियुक्त किया गया है जोकि 25-30 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं ।
परन्तु आरटीई लागू होने के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति हेतु निर्धारित अर्हता उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर थोपना सरासर अन्याय है ।हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि संसद द्वारा कानून पारित कराकर इस अन्याय पर रोक लगाकर देश के लाखों शिक्षकों और उनके परिजनों को न्याय दिलाया जाये ।
@PMOIndia@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@jayantrld@CMOfficeUP@myogiadityanath@rajnathsingh@aajtak@brajeshlive@Aamitabh2@ABPNews
शिक्षक साथियों!
जब अधिकारों पर आंच आती है, तो मौन नहीं — संगठित स्वर ही परिवर्तन लाता है
📢 आज, 22 फ़रवरी, दोपहर 2:00 बजे — ट्विटर (X) अभियान
अपनी आवाज़ को एक स्वर दें, अपनी एकता की ताक़त दिखाएँ।
@DrDCSHARMAUPPSS@UPPSS1921
@TFI_2025
#JusticeForTeachers
जब अधिकारों पर आंच आती है, तो मौन नहीं — संगठित स्वर ही परिवर्तन लाता है
📢 आज, 22 फ़रवरी, दोपहर 2:00 बजे — ट्विटर (X) अभियान
अपनी आवाज़ को एक स्वर दें, अपनी एकता की ताक़त दिखाएँ।
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#JusticeForTeachers
एक आग्रह (केंद्र सरकार और राज्य सरकार से)
आज शिक्षक वर्ग को टीईटी अनिवार्यता के प्रश्न पर असमंजस और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता और मनोबल बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है जितना गुणवत्ता सुनिश्चित करना।
हम सरकार से यह निवेदन करना चाहते हैं कि शिक्षा की गुणवत्ता केवल एक परीक्षा से नहीं, बल्कि अनुभव, समर्पण और सतत कार्य से भी आँकी जानी चाहिए। जो शिक्षक आरटीई लागू होने से पूर्व विधिवत नियुक्त हुए, जिन्होंने वर्षों तक सफलतापूर्वक अध्यापन किया, उनके अनुभव और सेवा को एक झटके में कमतर आंकना न्यायोचित नहीं है।
तार्किक पक्ष यह कहता है कि यदि नियुक्ति के समय जो नियम प्रभावी थे, उन्हीं के आधार पर चयन हुआ, तो बाद में नियमों में संशोधन का प्रभाव पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्यायसंगत पुनर्विचार का विषय होना चाहिए। शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता और मनोबल बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है जितना गुणवत्ता सुनिश्चित करना।
एक शिक्षक का आत्मसम्मान ही उसकी सबसे बड़ी पूँजी है। जब वर्षों की सेवा के बाद उसे अपनी योग्यता सिद्ध करने की नई बाध्यता के साथ खड़ा किया जाता है, तो उसके मन में असुरक्षा और पीड़ा स्वाभाविक है। यह पीड़ा केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की चिंता बन जाती है।
हम सरकार से टकराव नहीं, समाधान चाहते हैं। हम संवाद चाहते हैं, सहानुभूति चाहते हैं और ऐसी नीति चाहते हैं जो न्याय, संवेदनशीलता और व्यवहारिकता—तीनों का संतुलन बनाए।
आशा है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार शिक्षक समाज की इस गुहार को संवेदनशीलता से सुनेगी और अतिशीघ्र ऐसा निर्णय लेगी जो शिक्षा की गुणवत्ता भी बनाए रखे और वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की भी रक्षा करे।
क्योंकि शिक्षक मजबूत होगा तो ही शिक्षा मजबूत होगी, और शिक्षा मजबूत होगी तो ही राष्ट्र सशक्त बनेगा।
- विपिन बिहारी
@DrDCSHARMAUPPSS@UPPSS1921
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