Urgent: Justice for the victims of Mayur Vihar Phase 3 violence! In Pocket 2, Mayur Vihar Phase 3, Delhi, a group of goons brutally beat up more than 10 innocent people with pipes and wooden planks. The main culprit drove his black Verna car and rammed into people. At least 2 people have died and many are seriously injured. My 13-year-old brother is currently fighting for his life on a ventilator.The main culprit and his friends were roaming freely in the area. His family has powerful Congress connections. It feels like political pressure is stopping proper action.We need immediate arrest of all the culprits, strict investigation without any pressure from goons or politicians, and justice for the victims.Delhi Police and Delhi Government — please take immediate action, deploy adequate force in the area, and ensure the safety of https://t.co/8YUYwjtQgX, please cover this incident properly and help us get justice.@ndtv@ndtvindia@aajtak@ajtak_news@ABPNews@TimesNow@republic@News18@News18India@ZeeNews@IndiaToday
@WION
@CNNnews18@TheLallantop@ANI@MirrorNow@AsianetNews@gupta_rekha@CMODelhi@DelhiPolice@CPDelhi
#JusticeForMayurVihar #MayurViharViolence #DelhiPolice #DelhiGovernment
@official_dda@gupta_rekha@MCD_Delhi Sahi hai, but we need a long term solution. Had it rained for few more hours, basement में पानी भर जाता.
Sewers are blocked, drains are blocked.
Last year हाफ-नालियाँ bani wo bhi back gully me aur uska outfall nhi dia kahin, निल बटे सन्नाटा.
@PMOIndia@narendramodi हे महाराज,
आपसे विनती है की सभी सरकारी दफ्तरों मे ये स्लोगन लगाया जाए "हम सब चोर हैं"
इससे ट्रैन्स्पेरन्सी आएगी की ऐसा ही होता है ... अलग अलग डिजाइन है, जिसको जो पसंद आए वो लगा ले
Looking at these images, your first thought would probably be that this is another abandoned government school building somewhere in Uttarakhand.
But the reality is far more shocking.
This is Government Primary School, Gangoda in the Ranikhet Assembly constituency of Almora district. The school is fully functional. It has two teachers, children are attending classes every day, and because there is no separate Anganwadi centre, Anganwadi children also study here.
Yet, the building has reportedly remained in a dilapidated condition despite repeated representations to the department and administration over the past two years.
When parents lose confidence in government schools, the blame often falls on teachers. But can teachers alone overcome unsafe classrooms, crumbling infrastructure and years of inaction?
The people of the area are requesting the concerned authorities and public representatives to visit the school themselves and take immediate steps to restore it before an avoidable tragedy occurs.
@official_dda गाजीपुर पेपर मार्केट में पिछले 3 दिन से ऐसा बदबूदार पानी सप्लाई किया जा रहा है, कृपया संज्ञान ले।
पिछले महीने भी कुछ दिन ऐसा पानी आया था, हमारे घर में एक आदमी की टाइफाइड हो गया।
@LtGovDelhi@gupta_rekha
#WATCH | Mumbai | On his marriage plans, actor Aamir Khan says, "I am getting married on July 5, and the wedding will take place at home with close family and friends. We seek everyone's blessings and hope that we remain happy forever..." (02.07)
DPS नोएडा के एक अभिभावक ने सोशल मीडिया पर खुली चिट्ठी लिखी है…लाखों ₹ की मोटी फ़ीस देने वाले माँ बाप ध्यान से पढ़े 👇
मैं आप सभी का ध्यान एक घटना की तरफ दिलाना चाहता हूं, जो कल दिल्ली पब्लिक स्कूल नोएडा सेक्टर 132 में मेरी बेटी के एक क्लासमेट के साथ हुई। इतनी उमस भरी गर्मी के बावजूद दोपहर करीब 1 बजे छात्रों को मैदान में ले जाया गया। वहाँ लड़के फुटबॉल खेल रहे थे। अचानक एक लड़का गिर पड़ा। उसके कुछ क्लासमेट्स उसे तुरंत मेडिकल रूम ले गए। लेकिन स्कूल की मेडिकल सर्विस की लापरवाही से उस लड़के की जान चली गई।
उस लड़के को अस्थमा था। गर्मी की वजह से उसे अटैक पड़ा। उसके क्लासमेट्स ने उसे CPR दिया, लेकिन नर्स बहुत धीरे-धीरे काम कर रही थी। बच्चे चिल्ला रहे थे कि उसे अस्पताल ले जाया जाए, जो स्कूल से सिर्फ़ 100 मीटर दूर है, लेकिन उसे मेडिकल रूम के बाहर ही रखा गया और 20 मिनट तक इंतज़ार कराया गया।
20 मिनट बाद हालत और बिगड़ गई। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। सबसे बुरी बात यह है कि मेडिकल रूम में कोई ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था, जो आजकल बहुत ज़रूरी है। सच में बहुत दुख की बात है कि कुछ मिनटों की देरी की वजह से परिवार ने अपना प्यारा बच्चा खो दिया। हम सभी को स्कूलों द्वारा दी जा रही सुविधाओं पर नज़र रखनी चाहिए, वरना इतनी भारी फीस देने का क्या मतलब है अगर स्कूल हमारे बच्चे को सुरक्षित नहीं रख सकते?
ये हाल नोएडा जैसे शहर के पॉश स्कूल का है 🥺
DPS नोएडा की यह घटना सभी पेरेंट्स को सोचने पर मजबूर करती है
––––
मैं आप सभी का ध्यान एक घटना की तरफ दिलाना चाहता हूं, जो कल दिल्ली पब्लिक स्कूल नोएडा सेक्टर 132 में मेरी बेटी के एक क्लासमेट के साथ हुई। इतनी उमस भरी गर्मी के बावजूद दोपहर करीब 1 बजे छात्रों को मैदान में ले जाया गया। वहाँ लड़के फुटबॉल खेल रहे थे। अचानक एक लड़का गिर पड़ा। उसके कुछ क्लासमेट्स उसे तुरंत मेडिकल रूम ले गए। लेकिन स्कूल की मेडिकल सर्विस की लापरवाही से उस लड़के की जान चली गई।
उस लड़के को अस्थमा था। गर्मी की वजह से उसे अटैक पड़ा। उसके क्लासमेट्स ने उसे CPR दिया, लेकिन नर्स बहुत धीरे-धीरे काम कर रही थी। बच्चे चिल्ला रहे थे कि उसे अस्पताल ले जाया जाए, जो स्कूल से सिर्फ़ 100 मीटर दूर है, लेकिन उसे मेडिकल रूम के बाहर ही रखा गया और 20 मिनट तक इंतज़ार कराया गया।
20 मिनट बाद हालत और बिगड़ गई। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। सबसे बुरी बात यह है कि मेडिकल रूम में कोई ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था, जो आजकल बहुत ज़रूरी है। सच में बहुत दुख की बात है कि कुछ मिनटों की देरी की वजह से परिवार ने अपना प्यारा बच्चा खो दिया। हम सभी को स्कूलों द्वारा दी जा रही सुविधाओं पर नज़र रखनी चाहिए, वरना इतनी भारी फीस देने का क्या मतलब है अगर स्कूल हमारे बच्चे को सुरक्षित नहीं रख सकते?
एक पेरेंट्स का मैसेज...
DPS नोएडा की यह घटना सभी पेरेंट्स को सोचने पर मजबूर करती है
––––
मैं आप सभी का ध्यान एक घटना की तरफ दिलाना चाहता हूं, जो कल दिल्ली पब्लिक स्कूल नोएडा सेक्टर 132 में मेरी बेटी के एक क्लासमेट के साथ हुई। इतनी उमस भरी गर्मी के बावजूद दोपहर करीब 1 बजे छात्रों को मैदान में ले जाया गया। वहाँ लड़के फुटबॉल खेल रहे थे। अचानक एक लड़का गिर पड़ा। उसके कुछ क्लासमेट्स उसे तुरंत मेडिकल रूम ले गए। लेकिन स्कूल की मेडिकल सर्विस की लापरवाही से उस लड़के की जान चली गई।
उस लड़के को अस्थमा था। गर्मी की वजह से उसे अटैक पड़ा। उसके क्लासमेट्स ने उसे CPR दिया, लेकिन नर्स बहुत धीरे-धीरे काम कर रही थी। बच्चे चिल्ला रहे थे कि उसे अस्पताल ले जाया जाए, जो स्कूल से सिर्फ़ 100 मीटर दूर है, लेकिन उसे मेडिकल रूम के बाहर ही रखा गया और 20 मिनट तक इंतज़ार कराया गया।
20 मिनट बाद हालत और बिगड़ गई। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। सबसे बुरी बात यह है कि मेडिकल रूम में कोई ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था, जो आजकल बहुत ज़रूरी है। सच में बहुत दुख की बात है कि कुछ मिनटों की देरी की वजह से परिवार ने अपना प्यारा बच्चा खो दिया। हम सभी को स्कूलों द्वारा दी जा रही सुविधाओं पर नज़र रखनी चाहिए, वरना इतनी भारी फीस देने का क्या मतलब है अगर स्कूल हमारे बच्चे को सुरक्षित नहीं रख सकते?
एक पेरेंट्स का मैसेज...