National President
SC-ST Sikshak Sangh &
State Media Incharge Bihar at All India Parisangh @aiscstteacher (All India Confederation of SC/ST Organization
गुमनाम शहीदों को कोटिशः नमन 🙏🙏
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आज 11 अगस्त , हमारे परिवार के लिये विशेष रूप से काफी महत्वपूर्ण है। आज हीं के दिन 1942 को हमारे पितामह ( बाबा ) पं॰राम परिक्षण मिश्र अंग्रेजी हुकूमत के क्रूरता के शिकार हो गये थे । एक विकलांग " लांगर कहार " को बचाने के क्रम में गोरा फौजों ने मेरे बाबा को बंदूक के कुंदे से बेरहमी पूर्वक इतना मारा कि काफी प्रयास के बावजूद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका । और ठीक एक महिने बाद वे इस संसार से रूखसत हो गये ।
11 अगस्त 1942 के दिन की घटना के संबंध में अपने पिताश्री स्मृतिशेष पं श्री विन्ध्येश्वरी प्रसाद मिश्र जी द्वारा सुनाये गये आँखों देखा संस्मरण -------
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9 अगस्त को बम्बई ( वर्तमान में मुम्बई ) मे महात्मा गांधी द्वारा ' अंग्रेजों भारत छोड़ो ' का उद्घोष किया गया । सम्पूर्ण भारत में क्रान्ति सड़कों पर उतर आयी । छात्र और युवा शायद इसी दिन की प्रतीक्षा कर रहे थे । मेरे पिता जी भी कॉलेज छोड़कर घर आ गये थे । उनकी मुलाकात हाजीपुर के राम नारायण सहनी ( पूर्व सांसद स्व जय नारायण निषाद के बड़े भाई और वर्तमान में सामाजिक कार्यकर्ता श्री विजय सहनी के पिताश्री ) से हुई जो छात्रों को भड़काने के आरोप में हाजीपुर हाई स्कूल से निकाल दिये जाने के बाद भगवानपुर हाई स्कूल में अपना नाम लिखवा लिये थे। उनके नेतृत्व में छात्रों ने मुजफ्फरपुर- हाजीपुर रेल लाइन के बीच बेनीपट्टी - सतपुरा में वाया नदी पर बने रेलवे पुल की पटरी को उखाड़ने की योजना बनाई । लगभग एक दर्जन छात्र - नौजवान रेलवे पूल की पटरी को खोल रहे थे । इसी बीच अंग्रेज फौजों को लेकर एक ट्रेन मुजफ्फरपुर से आ रही थी । उसने पूल के करीब हीं स्थित रेलवे गुमटी के पैट-मैन बेनीपट्टी गांव के निवासी स्व.खेलावन दास के पिता गंगा दास को गोली मार दी और ट्रेन से उतरकर पैदल हीं पूल की ओर बढने लगे और गोलियां चलाने लगे । रेलवे पटरी उखाड़ने वाले छात्र इधर-उधर भाग कर अपनी जान बचाई । मेरे पिता जी , सरयू ठाकुर और कुछ अन्य छात्र पुल पर से नदी में कूद गये और तैर कर अपनी जान बचाई । अंग्रेजी फौज इन छात्रों को ढूंढते हुए गाँव में आ गये । अंग्रेजी फौज को देखकर गाँव के लोग घरों में छुप गये । लांगर कहार नामक एक विकलांग अपने घर के सामने सड़क पर बैठा था । वह कहीं भागने अथवा छुपने में असमर्थ था । अंग्रेजी फौज उससे इसकुलिया ( छात्र ) सब का घर पुछने लगे । उसने जब अनभिज्ञता बताई तो वे उसकी पिटाई करने लगे । इसी बीच हमारे बाबा स्मृति शेष पं॰ राम परिक्षण मिश्र जी भगवानपुर स्थित हाई स्कूल की प्रवंध समिति ( जिसके वे संस्थापक अध्यक्ष थे ) की बैठक में भाग लेकर पैदल हीं घर लौट रहे थे। वे उपरोक्त घटना से अनभिज्ञ थे । उन्होंने देखा कि अंग्रेजी फौज लांगर कहार को पीट रहा है । उन्होंने इसका बिरोध किया और पीटने का कारण जानना चाहा । परिणामस्वरूप अंग्रेजी फौज लांगर कहार को छोड़कर इनकी पिटाई करने लगा । ये वहीं बेहोश होकर गिर गये । अंग्रेजों के जाने के बाद इन्हें दरवाजे पर लाया गया । घटना की जानकारी जब बाबा के मित्र और भगवानपुर के बड़े व्यवसायी स्व श्री पूरन महतो जी ,स्व श्री भगवती चरण साह जी , स्व श्री गेना चौधरी जी और स्व श्री ईश्वरी साह जी को मिला जो कुछ हीं देर पहले हाई स्कूल भगवानपुर के प्रबंध समिति की बैठक में बाबा के साथ हीं थे , दरवाजे पर आये और उन्हें बेहतर ईलाज के लिए मुजफ्फरपुर ले गये। लगभग एक महीने तक वे जीवन और मौत से जूझते रहे पर अन्ततः उनकी हार हुई । मेरी दादी स्व चन्द्रज्योती कुंवर और मेरे पिताश्री स्मृतिशेष पं श्री विन्ध्येश्वरी प्रसाद मिश्र सहित चार पुत्रों को छोड़कर वे स्वर्गवासी हो गये । उस समय मेरे पिताश्री की उम्र 23-24 वर्ष रही थी होगी और वे पढ हीं रहे थे । पिताश्री के बड़े भाई स्व पं. श्री रामचन्द्र मिश्र जी मेरे पूर्वजों की विरासत वाली करहरी कोठी बाले घर पर रहते थे । हमारे सबसे छोटे चाचा स्मृतिशेष पं श्री गदाधर प्र मिश्र उस समय मात्र एक साल के और बड़े चाचा स्मृतिशेष पं श्री गया प्र मिश्र 'मयंक' मात्र पांच साल के थे । बाबा के असमय गुजर जाने के बाद पिताश्री को बीच में हीं पढाई छोडने को मजबूर होना पड़ा ।
1942 के इस आन्दोलन का इतना जबरदस्त असर पड़ा कि अंग्रेजों को भारत छोड़ने और 15 अगस्त 1947 को भारत को आजाद करने को मजबूर होना पड़ा ।इस आजादी को प्राप्त करने के लिए हजारों हजार लोगों ने अपना बलिदान दिया है जो गुमनाम रह गये ।और जो लोग अंग्रेजों का मुखबिरी करते थे वे आज ' राष्ट्र भक्त ' बन गये । 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
#भारत_छोड़ो_आंदोलन #QuitIndiaMovement
#QuitIndia
बिहार गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। राज्य का खजाना खाली है। सरकारी विभागों के कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए भी अब सरकार के पास पैसे नहीं है। सभी विकास कार्य ठप्प है। सरकार बस गप्पेबाज़ी और घपलेबाजी में मस्त है।
#TejashwiYadav#Bihar
कई मामलों में झारखंड का प्रोटेस्ट अद्भुत रहा । सरकार ने प्रोटेस्ट करने वालों के लिये टेंट /पंडाल लगवाया । सुरक्षा का इंतजाम किया। धरनास्थल पर कोई भी आसानी से आ जा सकता था । शौचालय और पेयजल का इंतजाम करवाया।
आंदोलनकारी बच्चों को विधानसभा के पचास मीटर करीब तक जाने दिया गया । हल्का -फुल्का पानी की बौछार, ताकि गर्मी और उमस से परेशान बच्चे रैनडांस कर सके ।
फ्रेंडली मैच की तरह हल्का-फुल्का लाठी डंडा हिलाया ।
@ShilpiNehaTirki@JmmJharkhand@HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren@sakshijoshii@UrmileshJ
आरक्षण विरोधी आरक्षण को “भीख” इसलिए कहते हैं ताकि आप आरक्षण लेने में शर्म महसूस करें, आपका मनोबल गिराया जा सके, आरक्षण को बदनाम किया जा सके और आप इसे छोड़ दें। इसके पीछे असली षड्यंत्र आपके अधिकारों को छीनना और आपको फिर से जाति व्यवस्था में गुलाम बनाए रखना है।