कसाब की पहले जांच फिर सजा ,
सवर्ण को पहले सजा फिर जांच ,
मतलब सवर्ण कसाब से बड़ा अपराधी है जबकि
नेता सरकार, कोर्ट, जज, वकील सबको पता है कि scst act में 60% मामले झूठे होते हैं !!
#ugcrollback
मनुस्मृति। जब मुद्दाविहीन हो जाओ तो मनुस्मृति को गाली दे दो। जब स्वयं को आधुनिक व बुद्धिजीवी दिखाना हो तो मनुस्मृति को गाली दे दो। जब वोक दिखना हो तो मनुस्मृति को गाली दे दो।
मनुस्मृति कहती है कि कन्या का अविवाहित रह जाना बेहतर है, लेकिन उसका विवाह किसी गुणहीन पुरुष से नहीं किया जाना चाहिए। नारी-सशक्तिकरण के लिए इससे बेहतर समझ रखते हैं आप? मनुस्मृति कहती है कि शारीरिक परिपक्वता के बाद निर्धारित अवधि तक प्रतीक्षा करने के बाद ही लड़की का विवाह हो, उस समय के हिसाब से 17 वर्ष तक। बाल-विवाह के विरुद्ध इससे बेहतर कोई प्रमाण है आपके पास?
मनुस्मृति कहती है - विन्देत सदृशं पतिम्। कन्या अपने योग्य पति का स्वयं वरण करे। यदि अभिभावक विवाह नहीं कराते और कन्या स्वयं पति चुन ले, तो न कन्या किसी पाप या अपराध की भागी होती है, और न वह पुरुष जिसे वह चुनती है। स्वेच्छा और कंसेंट को इससे बेहतर परिभाषित कर सकते हैं आप?
पुत्रेण दुहिता समा। पुत्री पुत्र के समान है। स्त्री-पुरुष समानता के लिए मनुस्मृति से बेहतर कुछ ला सकते हैं आप? क़ुरान या बाइबिल लेकर आइए, देख लीजिए। स्वयं डॉ आंबेडकर ने बुढ़ापे में मनुस्मृति का लोहा माना है, उत्तराधिकार वाले विषय को लेकर। मनुस्मृति माता की निजी संपत्ति को अलग से मान्यता देती है और उसे अविवाहित पुत्री का भाग बताती है। परिवार में महिलाओं को सशक्त रखने के लिए इससे बेहतर कोई व्यवस्था अबतक लेकर आए आप?
बल, दबाव या जबरन नियंत्रण से स्त्रियों को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। विश्वसनीय पुरुष भी उन्हें क़ैद नहीं रख सकते। आत्मानमात्मना यास्तु रक्षेयुस्ताः सुरक्षिताः। मतलब, जो स्त्री अपने विवेक से अपनी रक्षा करती हैं, वही सुरक्षित है। बाहरी निगरानी से ऊपर विवेक को रखा गया है। स्त्रियों को विवेकी माना गया है। इससे अधिक सम्मान देते हैं आप? आपने तो अपनी बहन तक को चुनावी राजनीति में खुद के 2 दशक बाद उतारा।
धन के देखभाल एवं प्रबंधन के लिए मनुस्मृति ने स्त्रियों पर विश्वास जताया है। राजा को मनुस्मृति आदेश देती है कि ऐसी स्त्रियों की रक्षा करे जिनके पति बाहर हैं, जिनका परिवार प्रभावशाली नहीं है, जो बीमार हैं या जिनके पति या पुत्र नहीं हैं। अगर कोई संबंधी भी किसी स्त्री की संपत्ति हड़पता है तो उसे चोर मानकर दंड देने को कहा है। इससे अधिक परवाह है आपको स्त्रियों की?
पति को आदेश है कि बाहर जाने से पहले पत्नी की आजीविका की व्यवस्था करके जाए। अब ये मत कहिएगा कि पत्नी ख़ुद नहीं कर सकती क्या। जीवेच्छिल्पैरगर्हितैः। आगे ये भी लिखा है कि पति न करे तो स्त्री ख़ुद सम्मानजनक कार्यों के जरिए कमाए। आत्मनिर्भरता के लिए इससे बेहतर नियम बना लेंगे आप?
तस्मात्साधारणो धर्मः श्रुतौ पत्न्या सहोदितः। धार्मिक कार्य पति-पत्नी साथ मिलकर करें। पत्नी के बिना कोई अनुष्ठान पूरा नहीं होता है। हमारे यहाँ पत्नी को बेगम नहीं, अर्धांगिनी कहा गया है। यहीं से निकला है 'आधी आबादी'। पूरे पचास प्रतिशत - उतना ही, जितना पुरुष का हिस्सा। पचास-पचास। इससे अधिक सटीक तरीके से बराबरी का सन्देश दे सकते हैं आप? अन्योन्यस्य। एक-दूसरे के प्रति। वैवाहिक जीवन में भी दोनों की ज़िम्मेदारियाँ हैं। मनुस्मृति कहती है कि न स्त्री और न ही पुरुष वैवाहिक मर्यादा का उल्लंघन करे। इसमें क्या जोड़ देंगे आप क्रांतिकारी कहलाने के लिए? कुछ बाक़ी है क्या? मनुस्मृति कहती है कि नियम दोनों पर हैं।
मनुस्मृति ने स्त्री को महाभागाः (सौभाग्यशालिनी और सौभाग्य लाने वाली) कहा। मनुस्मृति ने स्त्री को पूजार्हाः (सम्मान की अधिकारी) कहा। मनुस्मृति ने स्त्री को गृहदीप्तयः (घर को प्रकाशित और प्रसन्न रखने वाली) कहा। परिवार के सुख का आधार कहा। गृहस्थ-जीवन का प्रत्यक्ष आधार कहा।
अब जिसने परिवार नामक संस्था को ख़त्म करने का लक्ष्य ले रखा हो, उसे ये सब बुरा लगेगा ही। वो पूछेगा कि स्त्री परिवार के सुख के लिए तिनका भी क्यों हिलाए। वो ये नहीं पूछेगा कि मनुस्मृति ने पुरुष को भी स्त्री के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी उठाने को क्यों कहा है।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते… रटा-रटाया है, इसीलिए इसे नहीं गिनाया। सबको पता है। इसी प्रसङ्ग में ये भी लिखा है कि जिस घर में स्त्री दुःखी रहती है वह परिवार शीघ्र नष्ट होता है। यानी, परिवार की स्थिति का पैमाना यह तय कर दिया गया है कि उसमें महिलाओं को प्रसन्न रखा जा रहा है या नहीं।
लेकिन नहीं, गाली तो केवल मनुस्मृति को ही पड़ेगी। क़ुरान और बाइबिल का नाम नहीं लिया जाएगा। राहुल गाँधी आज 'स्त्रीवादी' बने हैं, काश मनुस्मृति पढ़ लिया होता कम से कम। पढ़ा तो हमने भी नहीं है, इसीलिए जो कहा जाता है मान लेते हैं। सफाई देने लगते हैं कि ये उस समय की व्यवस्था थी।
मनुस्मृति से अधिक फेमिनिज्म और कहीं नहीं है। फ़िलहाल इस इकोसिस्टम के लिए तो फेमिनिज्म सिर्फ़ अश्लीलता और अंग-प्रदर्शन ही है।
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
He is the son of a nine-time MP and a three-time MP himself. How much more empowerment does he need?
He has wealth, power, and political clout, so why does he continue to contest from reserved seats? Why not fight from an open seat? By monopolizing a reserved constituency, isn't he actively preventing a less privileged Dalit brother or sister from his party from entering Parliament?
And he isn't alone. There are many like him in every field. This argument is not a conspiracy by the GCs; they gain nothing either way. It is a question of internal accountability. Your own influential elites are holding the broader community back by refusing to step aside. So Dalits should start asking questions about where the real issue lies, instead of blaming GCs for their lack of opportunities.
Ex-servicemen, who dedicated their youth to defend the nation, deserve utmost respect and timely compensation for their service, This kind of behaviour with them is totally unacceptable!
Whoever prepared this World Happiness Index report that ranks India 126 out of 137 needs to get their heads checked. War torn Ukraine, a bankrupt Pakistan, a struggling Lanka above India? Pl come and meet our Fit and Fine group on Marine Drive: all rather happy!!
i failed pretty hard at my first startup--it sucked!--and am doing pretty well on my second.
the thing i wish someone told me during the first one is that no one else thinks about your failures as much as you do, and that as long as don't psych yourself out you can try again.
some remote, but mostly in person.
imo most tech companies who rushed to full remote permanently made a big mistake, and the cracks are starting to show. (works for some!)
hard work is even less fashionable than in-person work, but i still really believe in that too!
Spend time cultivating your deepest desires, no matter how impractical or impossible they seem. It’s perfectly OK to want the impossible. It’s not OK to pretend that your desires don’t matter.
Surely @ArvindKejriwal can put all his ads on YouTube instead of releasing them to media. That would save thousands of crores of taxpayers money, including tax collected from Kashmir Files, from being used to promote his face and bogus promises.
Your startup's customer doesn't care if:
- Your tech is built on Golang or PHP or NoCode
- You use AI/ML, Web3 or execute manually
- You analyze 150 data points with Big data or run on Excel
It simply boils down to whether you are solving their problem.
@narendramodi Excellent Modiji. Very progressive reforms. Jo bacha hua 40% hai wo bhi minorities, lgbt, refugees, atheists, sentinel island residents, etc me baant do taaki desh jaldi se jaldi Vishwaguru ban jaye.