लड़कों के हिस्से ख़्वाब नहीं, हिसाब आता है,वे घर की ज़रूरतों के साथ बड़े होते हैं उनका प्रेम भी किसी कोने में सिसकता होगा, पर वे रोते नहीं क्योंकि समाज को उनके आँसू नहीं,उनके हाथों के छाले पसंद हैं उन्होंने अपने हिस्से की मोहब्बत को जिम्मेदारियों के बाजार में गिरवी रख दिया...!!!
लड़के चाहते तो,चुन सकते थे,ज़हर
प्रेम में हारने के बाद , किंतु उन्होंने चुना, सिगरेट और शराब को ,
शायद उन्हें वहम था कि धीमे ज़हर से काटा जा सकता है विरह का विष... ❣️🌻
जिन्हें मंज़िल नहीं मिली, उन्हें लगता है मंज़िल मिलते ही संघर्ष समाप्त हो जाएगा और जो मंज़िल तक पहुँच चुके हैं, वे जानते हैं कि वहाँ से एक नई लड़ाई शुरू होती है। कोई अवसर पाने के लिए संघर्ष कर रहा है, तो कोई उसे बनाए रखने के लिए। कोई पहचान खोज रहा है, तो कोई पहचान के बोझ से जूझ रहा है। सत्य यही है कि जीवन में संघर्ष समाप्त नहीं होते, वे केवल अपना स्वरूप बदलते रहते हैं।
हर व्यक्ति अपने हिस्से की लड़ाई लड़ रहा है,
और हर मुस्कान के पीछे एक अनकहा संघर्ष छिपा है।
मुझमें एक कमी यूं भी रही कि जब भी किसी ने मुझे छींट भर अपनापन दिखाया मैंने अपना सारा संसार उसे सौंप दिया.. फलस्वरूप वो भर गया अति से और छोड़ गया अकेला...!!!
मैं जिस संघर्ष में हूँ, उसमें शरीर नहीं थकता, थकता है तो कभी विश्वाश, कभी हौसला, कभी दिल, तो कभी आत्मा फिर भी जंग जारी है, खुद से वक्त से ओर तकदीर से...