चंपत राय जी पर टूरिज्म माफिया क्यों हुआ आग बबूला?
आज अगर अयोध्या में कोई भी बिना शुल्क के वीआईपी दर्शन कर सकता है तो इसके पीछे पूजनीय चंपत राय जी की सोच थी।
बिना किसी VIP शुल्क के ऑनलाइन निशुल्क बुकिंग से हजारों तीर्थयात्री प्रतिदिन निकट से रामलला के VIP दर्शन कर पाते हैं। जिसमें वृद्ध आदि अधिक होते हैं ताकि लंबी लाइन में न लगना पड़े।
वृद्ध श्रद्धालुओं को मंदिर में सुलभ व्हीलचेयर की निःशुल्क उपलब्धता का दिमाग भी आदरणीय चंपत राय का था।
आज पूरी अयोध्या जी में कोई भी कहीं पर भी बिना पैसे खर्च किए हुए अपना सामान लॉकरों में सुरक्षित रख सकता है तो इसके पीछे भी सोच आदरणीय चंपत राय जी की थी। हजारों तीर्थयात्री मुफ्त लॉकर सुविधा का लाभ ले रहे हैं।
आज अयोध्या में कोई भी बिना किसी भी तरह के टिकट / पास के खर्चे के स्नान करके भगवान रामलला के दर्शन कर सकता है तो उसके पीछे भी भक्तों की सुविधा की सोच आदरणीय चंपत राय जी की थी। वरना टूरिस्ट माफिया मंदिर को कमाई का अड्डा बनवा देता।
मंदिर में प्रसाद के नाम पर होने वाली अव्यवस्था को व्यवस्थाओं में बदला उसके पीछे दिमाग आदरणीय चंपत राय जी का था।
आज बिना गंदगी के, बिना धक्कामुकी के सुव्यवस्थित सुरक्षित लाइनों के माध्यम से श्रद्धालु अयोध्या श्री राम मंदिर में दर्शन कर रहे हैं, तो इसके पीछे की व्यवस्था आदरणीय चंपत राय जी द्वारा बनवाई गई है। जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी जैसे बड़े त्यौहारों पर देश के बड़े मंदिरों में भीड़ मैनेजमेंट में विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं की व्यवस्था को बड़े मंदिरों के प्रशासन ऐसे ही अचूक नहीं मानते।
महाकुंभ में भी निर्माण कार्य चालू रहने के उपरांत भी राममन्दिर में करोड़ों लोगों के दर्शन की चाकचौबंद व्यवस्था इसी मंदिर ट्रस्ट ने तन मन धन से सुनिश्चित की थी।
यह व्यवस्था तो नाम मात्र है ऐसी न जाने कितनी अनगिनत व्यवस्थाओं को अमलीजामा पहनाकर अयोध्या जी को एक आदर्श व्यवस्थाओं के लिए आदरणीय चंपत जी को जाना जाता है लेकिन यह धर्म द्रोही नहीं चाहते भगवान रामलला के पावन मंदिर की व्यवस्था निर्विघ्नतापूर्वक चले।
चढ़ावा चोरी के दोषियों को तो सजा अवश्य मिलेगी ही, जिसे कोई नहीं रोक सकता। पर उसके नाम पर एक निर्दोष वृद्ध सरल व्यक्ति के प्रति जो अपराध जिन जिनने किया है वे भी अवश्य पाप के भागी होंगे।
और अगर यह सोच रहे हो कि चंपत जी के इस्तीफे से या SIT की रिपोर्ट से, और कानून सम्मत कार्यवाही से यह आसुरी शक्तियां शांत हो जाएंगी।
तो यह समझ लो कि राममन्दिर पर उनकी गन्दी दृष्टि न तो 500 साल से हटी न अब हटेगी और ये हिन्दू विरोधी असुर नित नए नए नीचतापूर्ण हथकंडे षड्यन्त्र करते ही रहेंगे। इन स्वर्ण मृग बने मारीचों को न तो राममन्दिर कल फूटी आंख सुहाता था न आज सुहाता है न कल सुहाएगा।
राममन्दिर के खिलाफ इन प्रपंचों को केवल हिन्दू एकता ही रोकती आई है, रोक सकती थी, और हिन्दू एकता ही आगे चाहेगी तो आगे रोक सकेगी। वरना इनके हाथों की कठपुतली बनकर रह जाओगे।
जिस महान् भव्य राममन्दिर को 500 साल की तपस्या से पाया है, उसे षड्यंत्रों में पड़कर मत गंवाओ।
अब सोचना आपको है आप निर्धार्मियों के साथ है या धर्मियों के।
@VHPDigital@ChampatRaiVHP@vinod_bansal@VijayVst0502@AlokKumarLIVE@ramlal@chidswami@irakeshpanday@Vhpinnews@vhpsocialmedia@ivivekbansal@girdharilalgoyl@Abhishek_Mshra@meashishmishra@shriramteerth@sanjeev_vhp@Vipul_ban@MuditUpdates
@SwamiRamsarnac4 स्वयं घोषित स्वामी @SwamiRamsarnac4, ये @X हिंदू ऐप नहीं है, ओर आप तो सिर्फ हिंदू से ही बात ओर मतलब रखते है। कृपा जल्दी प्रस्थान करे इस ऐप से। कम से कम अपनी ही बात की मर्यादा रख ले।
जरा सोचिए कि एक हिंदू हो कर भी क्या कोई इतनी नीचता पर उतर सकता है कि वह दान को सार्वजनिक करे और उसे वापस भी मांगे..!
भाई साहब दान किया था या भगवान श्री राम को कोई लॉन दिया था, जिसकी उगाही करना चाहते हैं?
ऐसा वक्तव्य सिर्फ कोई हिंदू द्रोही या कांग्रेसी ही सार्वजनिक रूप से दे सकता है..!!
जिन्होंने दान दिया था, है। अगर वो पूछ रहे कि उनके दान का प्रयोग कहा ओर कैसे हो रहा है, तो दलालों को इसमें नंगा नाच दिख रहा है।परंतु जिन्होंने उस दान से चोरी की ओर जो लोग ऊपर वाले डकैतों को बचा रहे है वो सब पूज्य ओर महान लोग है। ग़ज़ब तर्क है।
जिस किसी ने दान दिया, उन चीजों को मंदिर में कुछ समय के लिए रखा गया, ताकि भक्तों की भावनाओ का सम्मान है। अब इन सबकी अपेक्षा ये है कि इनके द्वारा दान की गई चीजों की हर रोज पूजा हो।
जिस देश में लोग पाँच हज़ार रुपए का चबूतरा बनवाकर उसपर 500 रुपए का पत्थर लगवा देते हैं, वो भी पूरे खानदान का नाम लिखवा कर, वहाँ आप और क्या ही अपेक्षा कर सकते हैं।
वैसे सोने के रामचरितमानस सुरक्षित हैं। लेकिन जो नंगा नाच इन दान दाताओं ने किया है, वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। खैर प्रभु श्री राम न्याय करें।
जय श्री राम।
@neelabh_2014@CMMadhyaPradesh सरजी अभी अपने पारिवारिक व्यवसाय में व्यस्त है, वहां पर्सनल प्रॉफिट की बात है। अभी नया हाईवे निकालना है तो वहां की जमीन कोई ओर न खरीद ले, वो पहले ज्यादा जरूरी है।
@akhileshsharma1 जैसे वैक्सीन सबने अपनी मर्जी से खुद जा जा के लगवाई, उसी तरह सब अपनी मर्जी से प्योर पेट्रोल को छोड़ के खुद E20 पेट्रोल अपनी गाड़ी में डलवा के खराब कर रहे है।
सुना है सरकार आज इथेनॉल पर ‘एक्सपर्ट्स’ के साथ प्रेस कॉन्फ़्रेंस करेगी। BPCL वाले को भी बिठा लेना और नीचे जो मैंने SIAM के सुझाव रखे हैं, वह भी दिखाना।
कार-बाइक निर्माताओं ने अपनी ओर से कह दिया था कि E20 के लिए पुरानी गाड़ियों को रेट्रोफिट करना असंभव होगा- IMPOSSIBLE!
साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि जब तक E20 के लिए गाड़ियाँ पूरी तरह से बन नहीं जातीं, E10 को बेस फ्यूल के रूप में रहना चाहिए। @nitin_gadkari और @HardeepSPuri बताएँ कि किस तर्क से, सड़क पर घूमते 20 करोड़ E10 गाड़ियों से E10 का विकल्प छीना गया और सीधा E20 को बेस फ्यूल बना दिया गया?
यह सरकार आज के प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इथेनॉल के लाभ बताएगी, कितना पैसा बचा वह सुनाएगी, पर यह नहीं बताएगी कि E10 और सादा पेट्रोल का विकल्प पम्पों से क्यों हटा दिया गया?
साथी पत्रकार सरकार से यह पूछें कि क्या आपने कोई जागरूकता अभियान चलाया था? क्या पम्प पर कोई बोर्ड लगा कभी कि आप अपना इंजन चेक करें कि सही पेट्रोल ही उसमें जाए? क्या आवश्यकता थी पुरानी गाड़ियों को फेज-आउट करने से पाँच वर्ष पहले आपने E20 यूनिवर्सल बना दिया? 2023 में जब पहली E20 गाड़ियाँ आईं तो किस तर्क से लगभग 20 करोड़ नॉन-कम्प्लाएन्ट गाड़ियों में वह तेल जबरन डलवाया गया?
@BesuraTaansane चोरों से बचने के लिए चौकीदार के भेष में डकैतों को चुन रखा है, बस हिंदू के नाम पे हिंदू को ही बनाए जा रहे है ओर हिन्दू बन भी रहे है खुशी खुशी।
कौन कहता है कि वशीकरण जैसा कुछ नहीं होता।
जब भारत के सामने दो विकल्प है, तो भारत के लोगों को क्यों दो विकल्प नहीं मिल रहे है। जिसके पास E20 गाड़ी नहीं है, उसको जबरदस्ती क्यों E20 पेट्रोल खरीदने पे मजबूर कर रही है सरकार।
भारत के सामने दो विकल्प हैं
तेल के चक्कर में या तो गल्फ देशों को साधता फिरे और बीच -बीच में अमेरिका की प्रेशर पॉलिटिक्स भी झेलता रहे।
या फिर एथनॉल, हाइड्रो फ्यूल आदि वैकल्पिक ईंधन पर जाकर आत्मनिर्भर बन जाए। चाहे कोई वैश्विक संकट आए, किसी के आगे गिड़गिड़ाना नहीं होगा।
एथनॉल सिर्फ गन्ने से ही नहीं बनता, चावल, बाँस आदि से भी बनता है। कृषि प्रधान देश में ये सब प्रचुर मात्रा में हैं।
23 लाख करोड़ का तेल आयात कम होगा तो भारत का पैसा बाहर भी नहीं जाएगा॥ विदेशी मुद्रा भंडार भी ठीक रहेगा।
ड्रामा या कुछ और? 🤔
सोनम वांगचुक के पास 2 बोतलें हैं, पर एक को सफेद कपड़े से क्यों छुपाया गया है?
अगर सादा पानी है तो छुपाने की क्या जरूरत?
क्या अनशन के नाम पर अंदर Orange Juice या energy drink चल रहा है?
@PoddarVaishali जहां सिर्फ जूस पीने का संदेह है, वहां आपकी आवाज़ निकली
परंतु जहां सरकार ओर मंत्री करोड़ों डकार गए जनता का, वहां क्यों मुंह सिल जाता है।
दाल में कुछ तो काला है !! 🤡
सोनम वांगचुक दिल्ली में सीजेपी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के मंच पर रात में लेटे हुए आराम कर रहे थे।
लेटे हुए ऐसा प्रतीत हुआ कि वह अपने पास कपड़े से ढककर रखी हुई एक बोतल से जूस पीने वाले थे।
तभी उनकी नज़र सामने वीडियो रिकॉर्ड कर रहे किसी व्यक्ति पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने तुरंत जूस की बोतल बिना पिए नीचे रख दी।
इसके तुरंत बाद उनके चेहरे के भाव बदल गए, मानो उन्हें एहसास हो गया हो कि वह कुछ ऐसा करते हुए कैमरे में कैद हो गए हैं …
राजनाथ सिंह का संसद में दिया बयान हमारे वायु सेना के जहाज गिराये जाने और उसके फाइटर पायलट्स के बारे में था।रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी करके कहा है कि राजनाथ सिंह के बयान को संसर्भ से बाहर करके देखना भ्रामक है।इस बयान को सुनिए।इससे कांटेक्स्ट समझ आता है।
By abusing Suniel Shetty and not even sparing his 15-month-old granddaughter because he expressed her fondness for PM @narendramodi , the Congress ecosystem has once again exposed its politics of hate.
Congress loves Parivar, hates the People of India.
@AshokShrivasta6 MSME की जमीनी हकीक़त कागजों ओर आंकड़ो में नहीं, धरातल पे उतर के ही दिख सकती है, स्टूडियो में बैठ कर दलाली करने वाले क्या जाने की क्यों श्रमिकों ने हड़ताल की थी।