मुख्य न्यायाधीश पर बिना किसी प्रमाण के रिश्वतखोरी और “मैनेज” होने का आरोप लगाना घोर निंदनीय है।
अपने अहंकार को संविधान से ऊपर समझने वालों को याद रखना चाहिए—इस देश में व्यक्ति नहीं, कानून सर्वोच्च है। @SACHNAMA_@JmmJharkhand@JharkhandCMO@gutthi_org
@SACHNAMA_@kunalpratap86 सरकार हो या न्यायपालिका @kunalpratap86 ने सबको बदनाम किया है।
इससे अच्छे से पूछताछ किया जाना चाहिए कि ए जो आरोप लगा रहा है उसमें क्या सत्यता है?
या फिर ए किसी पर भी आरोप लगाते घूम रहा है
इसकी मानसिकता, इसकी शिक्षा और इसका ओवरऑल स्तर—सब कुछ इस ट्वीट में साफ़ दिखाई दे रहा है। जिस तरह इस कोचिंग माफिया ने न्यायपालिका तक पर तरह-तरह की टिप्पणियाँ की हैं, उससे सवाल उठता है कि आखिर इसके पीछे कौन है, क्या ऐसी टिप्पणियों पर इसके खिलाफ Contempt of Court नहीं लगना चाहिए?
@prakashpoddarjh 4 लाख को क्या पढ़ाये थे जो 26398 ही पास हो पाएं 🤣
और यही मिलियन में व्यू��� जा रहे है एक महीने में 🤣
और ज्यादा घमंड होगा न तो बस एग्जाम बता देना साथ में एग्जाम देंगे और तुम्हे 2 घंटा एक्स्ट्रा भी देंगे।
अगर मेरे से ज्यादा मार्क्स ला दिया। तो तुम जो बोलेगा वो करूंगा।
@iNaveendev@HemantSorenJMM कुणाल को न कोर्ट पर विश्वास है, न सरकार पर। ऐसे रवैये से वह लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने और अराजकता फैलाने का काम कर रहा है
वाह कुणाल @kunalpratap86 !
अब सोशल मीडिया क��� अदालत भी लग गई है क्या? 😏
झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जी पर इतने गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, मानो फैसला भी आ गया और सबूत भी पेश हो गए!
बस एक छोटी-सी दिक्कत है—
आरोपों के साथ तथ्य और प्रमाण दिखाई नहीं दे रहे।
भाई,
माइक पकड़ लेना आसान है,
लेकिन गंभीर आरोपों को साबित करने के लिए सबूत भी चाहिए।
कहीं ऐसा तो नहीं कि
“मेरी बात ही प्रमाण है” वाला नया कानून लागू हो गया है? 😂
@lagatarIN @The_FollowUp @JmmJharkhand @JharkhandLIVEIn @JharkhandPolice
कुणाल प्रताप सिंह@kunalpratap86द्वारा माननीय झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान एवं पूरी न्यायपालिका को लेकर दिए गए कथित बयान को गंभीर��ा से लिया जाना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक मंच से यह दावा करता है कि “हाईकोर्ट बिक गया है”, तो यह केवल एक सामान्य टिप्पणी नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
ऐसे गंभीर आरोपों के साथ ठोस प्रमाण और तथ्य भी सामने रखे जाने चाहिए। सवाल यह है कि इस दावे का आधार क्या है? कौन-से तथ्य या दस्तावेज इस आरोप को प्रमाणित करते हैं?
लोकतंत्र में सरकार, प्र���ासन और न्यायपालिका से सवाल पूछने का अधिकार सभी को है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाते समय शब्दों के साथ जिम्मेदारी और प्रमाण भी जरूरी हैं।
इसलिए संबंधित व्यक्ति को स्पष्ट करना चाहिए कि—
आरोप का आधार क्या है? प्रमाण क्या हैं? और यह दावा किन तथ्यों के आधार पर किया गया?
न्यायपालिका की आलोचना हो सकती है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर आरोप बिना प्रमाण के नहीं लगाए जाने चाहिए।
#JharkhandHighCourt #Judiciary @kunalpratap86
@dgpjh @hemantsoren
@JmmJharkhand @JharkhandPolice
@The_FollowUp
@yourBabulal
ये कुणाल अपने आप को हाई कोर्ट से भी ऊपर समझने लगा है, माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान पे ये व्यक्ति खुल के आ���ोप लगा रहा है, माननीय मुख्यमंत्री महोदय @HemantSorenJMM जी से अनुरो�� है कि ये कोचिंग माफिया पर नियम संगत करवाई की जाए ताकि सभी लोगों का उच्च न्यायालय पे भरोसा बना रहे।
@AgRajivRanjan
@JmmJharkhand
@VinodPandeyJMM
@HemantSorenJMM
कुणाल प्रताप सिंह@kunalpratap86द्वारा माननीय झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान एवं पूरी न्यायपालिका को लेकर दिए गए कथित बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक मंच से यह दावा करता है कि “हाईकोर्ट बिक गया है”, तो यह केवल एक सामान्य टिप्पणी नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
ऐसे गंभीर आरोपों के साथ ठोस प्रमाण और तथ्य भी सामने रखे जाने चाहिए। सवाल यह है कि इस दावे का आधार क्या है? कौन-से तथ्य या दस्तावेज इस आरोप को प्रमाणित करते हैं?
लोकतंत्र में सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका से सवाल पूछने का अधिकार सभी को है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाते समय शब्दों के साथ जिम्मेदारी और प्रमाण भी जरूरी हैं।
इसलिए संबंधित व्यक्ति को स्पष्ट करना चाहिए कि—
आरोप का आधार क्या है? प्रमाण क्या हैं? और यह दावा किन तथ्यों के आधार पर किया गया?
न्यायपालिका की आलोचना हो सकती है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर आरोप बिना प्रमाण के नहीं लगाए जाने चाहिए।
#JharkhandHighCourt #Judiciary @kunalpratap86@dgpjh@hemantsoren@JmmJharkhand@JharkhandPolice@The_FollowUp@yourBabulal
🚨 BREAKING NEWS | JSSC CGL EXAM
सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है।
बताया ���ा रहा है कि JSSC CGL EXAM में शामिल हुए लगभग 3 लाख 4 हजार अभ्यर्थियों से पूछताछ की तैयारी CID कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ की प्रक्रिया के तहत परीक्षा में शामिल सभी अभ्यर्थियों के लोकेशन को ट्रेस किए जाने की तैयारी भी की जा रही है।
@iNaveendev इसकी जानकारी कितना है यह तो दिख रहा है यह सिर्फ एक तरह का राजनीति मोहरा बना हुआ है और कुछ नहीं...
इसको विद्यार्थियों के भविष्य पूछ लेना देना नहीं है....
और और भविष्य का विधायक की वाला सपना छोड़ दे अगर कोई देख रहा हो तो...
🚨 BREAKING NEWS | JSSC CGL EXAM
सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है।
बताया जा रहा है कि JSSC CGL EXAM में शामिल हुए लगभग 3 लाख 4 हजार अभ्यर्थियों से पूछताछ की तैयारी CID कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ की प्रक्रिया के तहत परीक्षा में शामिल सभी अभ्यर्थियों के लोकेशन को ट्रेस और CDR निकाल���े की तैयारी भी की जा रही है।
#jssccgl #jpsc
आपको कुछ पता नहीं है कुणाल 2016 में रद्द का विरोध किया था क्यों कि वो खुद उस समय अपना लाइफ का पहला और आखिरी परीक्षा पास किया था, और 2024-25 में विरोध कर रहा है क्यों कि वो खुद असफल है, अगर वो या आप खुद पास रहते तो न आप विरोध क���ते न कुणाल विरोध करता। और जब आपलोग को पता है कि किसको किसको 20 या 40 या 60 प्रश्न मिले है तो आपलोग खुद CID को वो लोगो का लिस्ट बना के क्यों नहीं दे देते ताकि CID को भी ज्यादा मेहनत नहीं करना पड़ता और जो अपने मेहनत से गए है वो भी इस झंझट से दूर रह��े।
@SACHNAMA_
@JmmJharkhand
मुझे सब पता है JSSC CGL की पूरी कहानी 2015 से पता है । 2015 में जब भर्ती आई उस समय कुछ ऐसे पद साथ में जोड़ दिए गए थे जिसके लिए विशेष डिग्री चाहिए थी बाद में सरकार को लगा कि ये कोर्ट में रद्द हो जाएगा इसलिए सरकार ने ख़ुद से रद्द कर दिया । सरकार की गलती थी ��ोई लीक नहीं थी उस समय रद्द के ख़िलाफ़ कुणाल सर थे । रही बात जनवरी 2024 में तो पेपर लीक हो गया तो क्यों नहीं रद्द की माँग करते , हम भी रद्द की माँग कर रहे थे क्यूंकि व्हाट्सएप पर प्रश्न रोटेट कर रहा था । सितंबर वाले पेपर व्हाट्सएप पर वायरल नहीं हुए मगर सैकड़ो के ग्रुप में लोगों को होटलों ने उत्तर रटवा दिया गया ऐसे गई ग्रुप थे । जिन लोगों को उत्तर रटाया गया इनलोगों ने अपने ��ाई , बहन , दोस्तों को परीक्षा से पूर्व कॉल कर के उत्तर लिखवाए । किसी को 20 , किसी को 40 तो किसी को 60 उत्तर । ऐसे में किस किस तक प्रश्न पहुचा ये जाँच का विषय है । जाँच अगर निष्पक्ष हो तो ये जो बातें मैं लिखा हूँ स्क्रीन शॉट ले लीजिए एक एक बात सही साबित होगा । बाक़ी मैं या हमारी टीम ये कभी नहीं कहती कि कोई फेयर नहीं आया मगर अगर सेग्रेगेशन संभव ही नहीं हो सका तो क्या करना चाहिए । चोर दरवाज़े वाले जॉब में रह ज��एँ ये कहाँ तक सही है । जो फेयर है उनको दुबारा मौक़ा मिल जाएगा मगर अगर ग़लत लोग सिस्टम में रह गए तो वो समाज के लिए ठीक नहीं । और आपके चंदे वाला बात बिल्कुल ग़लत है क्यूँकु चंदे के पैसे कैसे कैसे खर्च हुए है मुझे सब पता है । बाक़ी जोहार @kunalpratap86