दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरी परीक्षा रद्द करना न्याय नहीं है। असली सवाल यह है: अपनी मेहनत से चुने गए छात्रों की आवाज़ कौन सुनेगा?@SACHNAMA_@JmmJharkhand@gutthi_org@Jhar_Voice
मुख्य न्यायाधीश पर बिना किसी प्रमाण के रिश्वतखोरी और “मैनेज” होने का आरोप लगाना घोर निंदनीय है।
अपने अहंकार को संविधान से ऊपर समझने वालों को याद रखना चाहिए—इस देश में व्यक्ति नहीं, कानून सर्वोच्च है। @SACHNAMA_@JmmJharkhand@JharkhandCMO@gutthi_org
ये कुणाल अपने आप को हाई कोर्ट से भी ऊपर समझने लगा है, माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान पे ये व्यक्ति खुल के आरोप लगा रहा है, माननीय मुख्यमंत्री महोदय @HemantSorenJMM जी से अनुरोध है कि ये कोचिंग माफिया पर नियम संगत करवाई की जाए ताकि सभी लोगों का उच्च न्यायालय पे भरोसा बना रहे।
@AgRajivRanjan@JmmJharkhand@VinodPandeyJMM@HemantSorenJMM
मुख्य न्यायाधीश पर बिना किसी प्रमाण के रिश्वतखोरी और “मैनेज” होने का आरोप लगाना घोर निंदनीय है।
अपने अहंकार को संविधान से ऊपर समझने वालों को याद रखना चाहिए—इस देश में व्यक्ति नहीं, कानून सर्वोच्च है। @SACHNAMA_@JmmJharkhand@JharkhandCMO@gutthi_org
कुणाल प्रताप सिंह@kunalpratap86द्वारा माननीय झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान एवं पूरी न्यायपालिका को लेकर दिए गए कथित बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक मंच से यह दावा करता है कि “हाईकोर्ट बिक गया है”, तो यह केवल एक सामान्य टिप्पणी नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की निष्पक्षता और विश्वसन���यता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
ऐसे गंभीर आरोपों के साथ ठोस प्रमाण और तथ्य भी सामने रखे जाने चाहिए। सवाल यह है कि इस दावे का आधार क्या है? कौन-से तथ्य या दस्तावेज इस आरोप को प्रमाणित करते हैं?
लोकतंत्र में सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका से सवाल पूछने का अधिकार सभी को है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाते समय शब्दों के साथ जिम्मेदारी और प्रमाण भी जरूरी हैं।
इसलिए संबंधित व्यक्ति को स्पष्ट करना चाहिए कि—
आरोप का आधार क्या है? प्रमाण क्या हैं? और यह दावा किन तथ्यों के आधार पर किया गया?
न्यायपालिका की आलोचना हो सकती है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर आरोप बिना प्रमाण के नहीं लगाए जाने चाहिए।
#JharkhandHighCourt #Judiciary @kunalpratap86
@dgpjh @hemantsoren
@JmmJharkhand @JharkhandPolice
@The_FollowUp
@yourBabulal
@YouthReporcp4z@kunalpratap86 कुछ लोग अपनी मनमानी को ही न्याय समझ बैठे हैं और संवैधानिक संस्थाओं पर कीचड़ उछाल रहे हैं।
न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश साहस नहीं, बल्कि कानून और संविधान के प्रति गंभीर असम्मान है।
कुणाल प्रताप सिंह@kunalpratap86द्वारा माननीय झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न��यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान एवं पूरी न्यायपालिका को लेकर दिए गए कथित बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक मंच से यह दावा करता है कि “हाईकोर्ट बिक गया है”, तो यह केवल एक सामान्य टिप्पणी नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
ऐसे गंभीर आरोपों के साथ ठोस प्रमाण और तथ्य भी सामने रखे जाने चाहिए। सवाल यह है कि इस दावे का आधार क���या है? कौन-से तथ्य या दस्तावेज इस आरोप को प्रमाणित करते हैं?
लोकतंत्र में सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका से सवाल पूछने का अधिकार सभी को है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाते समय शब्दों के साथ जिम्मेदारी और प्रमाण भी जरूरी हैं।
इसलिए संबंधित व्यक्ति को स्पष्ट करना चाहिए कि—
आरोप का आधार क्या है? प्रमाण क्या हैं? और यह दावा किन तथ्यों के आधार पर किया गया?
न्यायपालिका की आलोचना हो सक���ी है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर आरोप बिना प्रमाण के नहीं लगाए जाने चाहिए।
#JharkhandHighCourt #Judiciary @kunalpratap86
@dgpjh @hemantsoren
@JmmJharkhand @JharkhandPolice
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@yourBabulal
झारखंड ने आज एक कर्मठ जनप्रतिनिधि और समर्पित जनसेवक को खो दिया।
माननीय मंत्री श्री सुदिव्य कुमार सोनू जी के आकस्मिक निधन पर विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को संबल दें।
ॐ शांति। 🙏
प्रकाश जी आपका जो भी विचार है कुणाल के बारे में वो कुछ दिन बाद जरूर बदलेगा, आपने कभी ये सोचने की कोशिश की है कि कुणाल हमेशा CGL के पीछे ही क्यों इतना जोर दि��ा है? वो भी 2016 से कुछ तो मंशा होगी? और आपको भी पता है कि लगभग 1937 सफल अभ्यर्थियों में सभी गलत तरीके से नहीं आए है।कुणाल कभी भी जो अपने मेहनत से और जो गलत तरीके से आए है उसे "segregate" करने की बात नहीं की बस हमेशा परीक्षा रद्द करने की ही बात की है,आखिर क्यों?? और आप खुद शिक्षक है आपको पता है कि इस से कम मार्क्स में चयन कभी भी कोई परीक्षा में नहीं हो सकता है और उसका कारण आपको पता है। और जहां तक मेरी बात रही तो मैं ��ी एक छात्र हूँ जो 2015 से ये सब झेल रहा हूँ।
@Sanjeet48920241@HemantSorenJMM सिस्टम को कोसने से पहले आंकड़े देखिए—सिर्फ 26,398 ही मेरिट तक पहुंचे। परीक्षा रद्द की मांग सिर्फ अपनी कमियों को छिपाने का बहाना है।
जब अपना भविष्य दांव पर था तब भर्ती प्रक्रिया बचाने की गुहार लगाई,
अब जब खुद की बारी खत्म हो गई तो हजारों मेहनती छात्रों का भविष्य बर्बाद करने पर तुले हैं।
छात्र हितैषी बनने का ढोंग बंद करो!
@HemantSorenJMM
नीचे दिखाया गया page JSSC CGL मामले में high court के जजमेंट में उल्लेख paper 3 का minimum marks है, जिसपर छात्रों को DV के लिए शॉर्टलिस्टेड किया गया था।
22 सितंबर के paper 3 पर leak का आरोप है ।
21 सितंबर के exam पर कोई आरोप नहीं है जिसमें UR का cut off marks 450 में मात्र 275 यानी कि 57% और 22 सितंबर जि��� दिन के exam पर आरोप है उसमें UR का 450 में मात्र 236 यानी 52% cut off है।
अब मेरा सवाल ए है कि Railway का group d का exam जो level 1 का exam है, जिसपर किसी प्रकार की कोई धांधली का आरोप नहीं है उसमें 80% cut off जा रहा है तो फिर JSSC CGL में मात्र 52% marks पर selection कैसे हो गया।
जिस प्रकार से कुछ कोचिंग वाले पार्टी पोषित एजेंट द्वारा आरोप लगाया जाता है कि बृहद स्तर पर paper leak हुआ है तो क्या संभव है कि अगर बृहद स्तर पर paper leak हो जाए तो इतना कम marks पर selection हो जाएगा?
@GaganPratapMath @abhinaymaths @adityaranjan108 @ajitanjum @shubhankrmishra @abhisar_sharma
मात्र 26,398 का सभी पेपर्स में पास होना यह साबित करता है कि मुकाबला कितना कड़ा था। बिना न्यूनतम अंक लाए परीक्षा रद्द कराने का दबाव बनाना उन योग्य छात्रों के साथ खुला अन्याय है जिन्होंने निष्पक्ष रूप से सफलता पाई है। विरोध प्रदर्शन से पहले खुद के प्रदर्शन का मूल्यांकन करें|
@JSSC__CGL केवल 26,398 अभ्यर्थी ही अंतिम मेरिट सूची में पहुंचे। असफलता मिलने पर परीक्षा रद्द करने की मांग करना कोई हल नहीं। व्यवस्था को दोषी ठहराने से पहले अपनी तैयारी और कमियों का विश्लेषण जरूरी है। जिन्होंने पूरी ईमानदारी से मानक पूरे किए हैं, उनकी मेहनत को दरकिनार नहीं किया जा सकता।
मात्र 26,398 का सभी पेपर्स में पास होना यह साबित करता है कि मुकाबला कितना कड़ा था। बिना न्यूनतम अंक लाए परीक्षा रद्द कराने का दबाव बनाना उन योग्य छात्रों के साथ खुला अन्याय है जिन्होंने निष्पक्ष रूप से सफलता पाई है। विरोध प्रदर्शन से पहले खुद के प्रदर्शन का मूल्यांकन करें|
कुणाल तुम झूठ बोल रहे हो, 2016 से पहले तुम विद्यार्थी थे लेकिन , 2016 में तुमने "चंदा का धंधा" स्टार्टअप शुरू किया था, सबसे पहले तुमने अपने ही साथी लोग को चुना लगाया जो तुम्हारे साथ 2016 में JSSC_CGL का प्रीलिम्स ��ास किये हुए थे ,उनलोगों से कोर्ट केस करने के नाम पे चंदा उगाही किया था, उसके बाद तुम्हे इसमें अच्छा प्रॉफिट हुआ तो तुम्हे इसकी लत लग गई।
जब अपना भविष्य दांव पर था तब भर्ती प्रक्��िया बचाने की गुहार लगाई,
अब जब खुद की बारी खत्म हो गई तो हजारों मेहनती छात्रों का भविष्य बर्बाद करने पर तुले हैं।
छात्र हितैषी बनने का ढोंग बंद करो!