फ़ोटो नंबर एक मे गली छः महीने पहले बनी फ़ोटो नंबर इस गली को फिर से बनाया गया और उसी गली के ठीक पहले गली कई सालों से खराब है उसे ऐसे ही क्यों छोड़ दिया है । @myogiadityanath@myogioffice@dmbareilly@nagarayukt
तीर्थराज में महाकुंभ की रेत पर संतो की आकाशगंगा
गंगा की रेत पर 4000 हेक्टेयर में महाकुंभ नगर बसाया गया है। बारिशों वाली गंगा सिमट चुकी है। उसके किनारे किसी बेहिसाब चादर की तरह फैले हैं। और उस पर एक पूरे नगर की बसाहट हो चुकी है। 600 किमी लंबी चकर्डप्लेट की सड़कें हैं। इस छोर को उस छोर से मिलाने वाले 30 पैंटून पुल हैं। आसरा देने लाखों तंबू मजबूती से खड़े हैं। 13 किमी इलाके के 25 सेक्टर में एआई ऑपरेटेड खंभे और चैट बोट्स के जरिए
एक महीने के लिए मानो समुद्र मंथन वाला सतयुग तीर्थराज के डिजिटल युग में उतर आया है।
अंधेरा होते जब रेत पर हजारों खंभों पर खड़ी रोशनी गंगा में अपना अक्स देखती है तो ये इलाका आसमां में बुनीं हुई हजारों आकाशगंगाओं सा नजर आता है।
…अखाड़ों से लाउडस्पीकर पर आवाज आ रही है। श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि…। किसी शिविर में कथा बांची जा रही है। कहीं अर्जुन की कहानी सुना रहे हैं, कोई गीता का सार पढ़ रहा है। और इसी बीच संत करगिल युद्ध और सैनिकों का भी जिक्र कर देते हैं।
ये संतो का उत्सव है। अगले एक महीने यही उनका ठौर है। चारों ओर संत ही नजर आ रहे हैं। कोई ब्रह्मचारी, कोई कोतवाल, कोई पुजारी, महंत, श्रीमहंत तो कोई पदाधिकारी और महामंडलेश्वर। कोई भगवा, कोई गेरुआ, कोई सफेद तो कोई काली पोशाक पहने।
कोई गुरु के आगे दंडवत है, कोई साष्टांग है, कोई टखने तक झुकता है, तो कोई सिर्फ गुरु के पैरों के आगे की जमीन छू लेता है। किसी की आंखों में आंसू हैं, तो कोई आंखे भींचे मंत्र बुदबुदा रहा है।
पढ़िए महाकुंभ से मेरी आंखन देखी…।
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