Some Deduction should be Allowed in New Regime Like......
1. Home loan Principal & Interest
2. Life Insurance Premium
3. Mediclaim
4. Education Expense
5. Saving bank & FD interest
6. Medical Expense
@nsitharaman ji These expenses are essential for daily life; they enable a person to lead a secure existence.
If taxes are levied on these expenses without providing a corresponding deduction, it amounts to an injustice against the common person.
I humbly request you to consider this matter and allow deductions for these expenses.
Salary : ₹14.65 lakh
Tax Paid : ₹98,600
Heart Surgery Expense: ₹4.5 lakh
❌ No deduction under the New Tax Regime.
❌ No Ayushman Bharat benefit due to income criteria.
Then what's the reward for being an honest middle class taxpayer?
Salary : ₹14.65 lakh
Tax Paid : ₹98,600
Heart Surgery Expense: ₹4.5 lakh
❌ No deduction under the New Tax Regime.
❌ No Ayushman Bharat benefit due to income criteria.
Then what's the reward for being an honest middle class taxpayer?
किसी भी बैंक यूनियन के 100 लोग एक साथ इकठ्ठा हो जाएँ, तो अच्छा खासा सर्किल हेड , जोनल हेड हिल जायेगा , परन्तु उसके लिए बैंक गाइडलाइन्स में पकड़, और मुद्दा मजबूत होना चाहिए |
हालाँकि आजकल यूनियन का काम ट्रांसफर में बिचौलिए से ज्यादा का नहीं रह गया है, अगर यूनियन के लीडर ट्रांसफर पोस्टिंग के बदले असली मुद्दे जैसे की बैंकों में 5DAYSWORK लागू करने की मांग और स्पेशल अलाउंस को बेसिक सैलरी में शामिल करने की मांग पर फोकस रखते तो हर बैंकर का हित होता, परन्तु बैंक में भी फूट डालो राज करो की नीति चल रही है, अपने कुछ बन्दे अच्छी जगह पर सेट करके यूनियन लीडर अपने रिटायरमेंट तक अपने घर में मौज काट लेते हैं, बैंक मैनेजमेंट को भी दिक्कत नहीं होती क्यूंकि वो 5 पोस्टिंग यूनियन लीडर्स से पूछ कर कर लेते हैं, और उसके बदले बैंकर समाज का जी भर के शोषण करते हैं, जिसमें लेट सिटींग , दुनिया भर के लॉगिन डे, थर्ड पार्टी के प्रोडक्ट बेचने के लिए जोर देना जैसे कार्य शामिल हैं |
बैंकर भी चुप है, उसको भी उम्मीद है की कभी उसका यूनियन लीडर उसको भी घर पर पोस्टिंग करवा देगा, उसको तनख्वाह से उतना फर्क नहीं पढ़ रहा , जितना की घर की पोस्टिंग से , बस इसीलिए हर बैंकर की कमर टूट रही है !
इसलिए अभी से लिख कर ले लो की बैंक नेताओं की प्रमुख डिमांड जो की स्पेशल पे का बेसिक पे पर मर्जर है , अगले वेज रिवीजन पर जो की नवंबर 2027 पर देय होगा, उस पर भी पूरी नहीं होगी , नेताओं के बस की ही नहीं हैं !
@idesibanda@alashshukla@kmarkri@iNitinTyagi@RtiCell15796
उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों को आदेश दिया गया है कि कोई लंच ब्रेक नहीं होगा... उनके शिर्ष अफसर से सीखें... जब भी मूत्रविसर्जन के लिए जाए तो मुंह मे एक रोटी ठूंस लिया करें... तब जाकर सही ग्राहक सेवा होगी... 😐
कम क़ीमत पर क्या जनता अपनी गाड़ी का इंजन फूंक ले!
कहावत है कि ‘फ़्री मिले तो क्या फिनायल पी ले’?
मुद्दा जनता की मेहनत की कमाई की गाड़ियों की लाइफ़ बचाने का है।
Dear @RBI, please clarify:
If the Branch Manager goes for lunch, who will handle the queries?
If the Head Cashier goes for lunch, who will accept cash and issue receipts?
If the Loan Officer goes for lunch, who will attend to customers seeking loans?
Bankers are humans too🥹
"Judicial servant" is a far better way to address Indian judges than the colonial-era "My Lord" or "Milord." That's what they are- public servants entrusted with administering justice.
I don't know why they felt so insulted with it.
Likewise, as a doctor, I wouldn't mind being addressed as रुग्णसेवक.
ग्राहकों को ऋण देते समय अगर सब नियमों का पालन किया जाए उसके बावजूद अगर लोन NPA हो जाए तो जिम्मेदार कौन?
इसका जवाब होना चाहिए कि जिसने ऋण नहीं चुकाया वही जिम्मेदार है।
लेकिन जमीनी स्तर पर होता क्या है। जमीनी स्तर पर यह ढूंढा जाता है की शाखा प्रबंधक और ऋण अधिकारी द्वारा किन किन गलतियों के कारण लोन एनपीए हो गया। मतलब सीधे-सीधे लोन के लिए बैंकर को अकाउंटेबल ठहरने की प्रक्रिया शुरू होती है।
हम बैंकर कभी नहीं चाहते हैं कि कोई भी लोन एनपीए हो। हमारी पूरी कोशिश रहती है कि हम लोन का पैसा रिकवर कर सके। प्राइवेट बैंक से विपरित सरकारी बैंक में रिकवरी के लिए अलग से कोई व्यक्ति नियुक्त नहीं होता है जो लोन रिकवरी करे।
वैसे भी अधिकतर बैंकों की शाखाएं स्टाफ की कमीं से जूझ रही है ऊपर से NPA होने पर बैंकर की अकाउंटेबिलिटी फिक्स करना गलत है।
बैंकिंग सेक्टर में ग्राहकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है ।
लेकिन बैंक स्टाफ की संख्या में लगातार कमी आ रही है। कुछ बैंकर इस नौकरी को छोड़ दे रहे है।साथ ही वेकेंसी में पहले के मुकाबले कम निकल रही है। बहुत से बैंकर रिटायर भी हो रहे है। बैंक की शाखा में भी बढ़ोत्तरी हो रही है लेकिन उतने ही स्टाफ से काम चलाया जा रहा है।
फिर बोला जाता है कि बैंक वाले अच्छा कस्टमर सर्विस नहीं देते है।
आखिर कैसे देंगे?
The future of our planet depends on the choices we make today. Let's join hands to reduce waste, conserve resources, and create a cleaner, healthier environment for all.
Together, we can make a difference.
#WorldEnvironmentDay2026#EnvironmentDay#MGB#MaharashtraGraminBank
Dear @bankofbaroda@BankofBarodaCEO
Make a Process to take the Periodic feedback & learning of newly recruited Officers & CSAs on various parameters.
You can't deal with new generation the way you did for millenials. Every Bank should follow this. (कच्चे घड़ों का खयाल रखो)