📍अररिया, बिहार
₹266 की खाद ₹400 में बेचे जाने का मुद्दा उठाने वाले डिजिटल पत्रकार मोईद आलम को जेल भेज दिया गया।
खाद की कालाबाज़ारी पर सवाल उठाना गुनाह है या किसानों की आवाज़ दबाना?
ये कैसा बिहार है, जहाँ सवाल उठाने की कीमत जेल है!
दिल्ली संसद मार्ग थाना में इस व्यक्ति का मार मार कर बुरा हाल कर दिया है किसने किया बताने की जरूरत नहीं है पुलिस ने किया
व्यक्ति ने कहा मेरी बेटी को भी पीटा गया
यह मोदी सरकार झूठी सरकार है, ईवीएम से बनी सरकार है
@rajendersingh56
बहुत कुछ कहना है मगर इस वक़्त यह देख कर अफ़सोस से भर गया हूँ। शर्म आ रही है। गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है। इसका कभी इस हवाले कभी उस हवाले से बचाव करने वाले भी इसमें शामिल हैं। यह कोई मामूली ग़लती तो नहीं जो हो जाती है। जो गोदी मीडिया वोट चोरी का बचाव कर सकता है उससे मुझे उम्मीद नहीं कि इसके ख़िलाफ़ बोलेगा। जिस चैनल का नाम नेहा ने लिया है उसे जवाब तो देना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ, कैसे हुई? क्या गोदी मीडिया का कोई भी चैनल इस पर डिबेट करेगा? रिजीम चेंज की नौटंकी वाले क्या एक महिला के साथ हुई इस घृणित कार्रवाई पर बहस कर पाएंगे कि उन्हें और कहाँ तक गिरना है और कब तक इस खाई में गिरते रहना है?
@ABPNews की ये ख़बर देखिए.
ये चैनल मुझे वेश्या और कॉल गर्ल बताना चाहता है.
मैं सरकार से सवाल पूछूँगी तो ये बिके हुए चैनल मुझे इस तरह से अपमानित करने का प्रयास करेंगे.
इस देश का महिला आयोग मर गया है क्या? @NCWIndia
इन गोदी चैनलों का भाजपा की दलाली से पेट नहीं भर रहा है. इन्हें अब बेटियों का सम्मान खाना है.
@narendramodi इस देश को आपने बेटियों के लिए नर्क बना दिया है.
चार साल हो गए। इंसाफ देना ही नहीं था। राज्य में लगातार विरोध प्रदर्शन होता रहता है। अगर जी- प्रिंटर से नतीजों के प्रिंट निकाल लाने का गुमान नहीं होता तो कोई भी राजनीतिक दल राज्यपाल का पद नहीं देता। पहले इंसाफ करता। इसका क्या बचाव हो सकता है कि चार साल से राज्य की जनता अंकिता के इंसाफ को लेकर संघर्ष कर रही है। उत्तराखंड की जनता के उस हिस्से की दाद देनी होगी जो आए दिन इसे लेकर सड़क पर उतरती है। बड़ी बात है।
CJI सूर्य कांत का कहना है कि "अगर हर नागरिक पत्रकार बन जाए, तो यह सबके लिए मुश्किलें पैदा करेगा।"
मीलॉर्ड, संविधान के साथ खड़े हों, न कि सत्ता के साथ !
: राजदीप सरदेसाई, वरिष्ठ पत्रकार
रात के करीब 2 बज रहे हैं।
प्रधानमंत्री और गृहमंत्री शायद चैन की नींद सो रहे होंगे।
लेकिन युवा कांग्रेस और NSUI के साथी अब भी संसद मार्ग थाने के बाहर बैठे हैं।
क्योंकि हमारी दो बहनों अथिरा और रितु बराला के साथ दिल्ली पुलिस की बर्बरता को 48 घंटे से ज़्यादा हो गए। वीडियो पूरे देश ने देखे, लेकिन न एक FIR हुई, न किसी पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई।
मोदी जी, आपकी नींद पूरी हो सकती है, हमारी लड़ाई नहीं।
अपनी बहनों को न्याय दिलाए बिना यहाँ से नहीं उठेंगे।
सीतापुर (लुधौरा): दलित युवक मनोज गौतम (35) को NH-30 पर बाजार से लौटते समय लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या।
आरोपी: शुभम सिंह समेत धीरेंद्र, नरेंद्र/नागेंद्र, वीरेंद्र व परिवार की दो महिलाएं।
तत्काल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी व सख्त कार्रवाई हो।
@sitapurpolice@dm_sitapur
"ये एक कान से नहीं सुन पा रहीं, क्योंकि इनके कान पर मारा गया"
◆ PC में राहुल गांधी ने कहा
#RahulGandhi | Rahul Gandhi | @rahulgandhi | #Delhi | Delhi | Delhi Police
लोकेशन वेस्ट चंपारण बिहार 📍
बिहार के पश्चिमी चंपारण में 25 वर्षीय दिलशाद अंसारी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। NDPS मामले में गिरफ्तार दिलशाद को पुलिस के अनुसार चलती गाड़ी से कूदने के बाद गंभीर चोटें आईं।
लेकिन उनके पिता अख़बर अंसारी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके बेटे के सिर पर जोरदार वार किया। पत्नी नगमा खातून के मुताबिक, पुलिस रात 2 बजे उन्हें घर से ले गई थी और सुबह तक छोड़ने का भरोसा दिया था।
घटना के बाद 6 पुलिसकर्मी निलंबित किए गए हैं। परिवार उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहा है। सवाल है कि दिलशाद की मौत की सच्चाई सामने कब आएगी और परिवार को इंसाफ कब मिलेगा?
कहते हैं कफ़न का माप जितना छोटा हो शव का बोझ उतना ही ज़्यादा होता है। प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी से राघोपुर क्षेत्र में हुई हृदय विदारक घटना के अपने पीड़ित परिजनों से मिला तो जो बातें सामने आईं उसे सुनकर बड़बोले सम्राट चौधरी और तमाम NDA नेताओं को शर्म से डूब मरना चाहिए।
* प्रशासन को घटना की सूचना मिलते ही तत्काल जानकारी दी गई लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया।
* SDRF की टीम घटना स्थल पर 3 घंटे की देरी से पहुंची, तब तक स्थानीय लोगों ने मिलकर सभी पीड़ितों को बाहर निकाल लिया था। 2 घंटे की देरी से पहुंची टीम फोटोशूट के लिए बेमलतब कई घंटे Boat घुमाती रही।
* ग्रामीणों और स्थानीय तैराकों द्वारा पानी से निकाले गए कई बच्चे घंटों तक जीवित थे और बच जाने की स्थिति में थे लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने उनकी जान ले ली
* एंबुलेंस देर से पहुंची। एंबुलेंस में ऑक्सीजन नहीं था। किसी तरह घंटों बाद बच्चों को हॉस्पिटल लाया गया तो वहाँ भी ऑक्सीजन नहीं था और ना ही दवाई एवं इलाज की उचित व्यवस्था थी।
* ऑक्सीजन की कमी से कम से कम 5-6 बच्चे मरे।
21 साल से सत्ता में कुंडली मार कर बैठे बेशर्म लोग राहत के नाम पर महज 04 लाख देकर बच्चों की जिंदगी का सौदा करना बंद करें। सरकार की घोर लापरवाही और जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था से कई परिवारों का वंश खत्म हो गया है। पीड़ित परिवारों का रुदन और चीत्कार छाती को चीर रहा है। । मुख्यमंत्री अविलंब स्वयं जाकर पीड़ित परिवारों से मिलें और उनकी चीख पुकार को सुनें तब जाकर शायद उनको थोड़ी शर्म आए। साथ ही स्वास्थ्य मंत्री भी Paid PRबाजी से बाहर निकल पीड़ित परिवार के पास जाएँ और जवाब दें कि इलाज, दवाई और ऑक्सीजन की कमी से आधा दर्जन से अधिक चिराग क्यों बुझ गए?
साथ ही सरकार हर पीड़ित परिवार को कम से कम 03 डिसमिल जमीन दे। प्रशासनिक व्यवस्था को चाक चौबंद करे ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटना भूल से भी ना हो। और ज़रूरत पड़े तो समय से एंबुलेंस आए, ऑक्सीजन की व्यवस्था हो और साथ ही अस्पतालों में उचित इलाज और दवाई की समूची सुविधा हो।