रिजीम चेंज गैंग रोज़ सत्ता परिवर्तन के सपने देखता है, षड्यंत्र रचता है, झूठ फैलाता है और नैरेटिव गढ़ता है। लेकिन जनता के जनादेश के सामने इनके सपने साबुन के बुलबुले की तरह फूट जाते हैं।
पंजाब यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी, ओडिशा के 13 विश्वविद्यालयों में ABVP की जीत, गुजरात निकाय चुनाव और असम, बंगाल व पुडुचेरी उपचुनाव के नतीजे बहुत कुछ बयां करते हैं।
गाँव हो या शहर, युवा हों या आम नागरिक...जनता का मूड कुछ और है, और रिजीम चेंज गैंग की स्क्रिप्ट कुछ और
अब हर हार के बाद बस एक ही सवाल कि भैया, भारत में तुम्हारी दाल गल क्यों नहीं रही?
तो रिजीम चेंज गैंग आत्ममंथन करे, फिर भी समझ न आये तो कल मैं बताऊंगा कि उनकी दाल गल क्यों नहीं पा रही...
It’s done bro, everything is exposed !!
Afterall, it was all about ‘Regime Change’..
आखिर मन में छुपी बात होठों पर आ ही गई!
सारा खेल सत्ता की कुर्सी पाने का है.. फिर उसके लिए विद्यार्थियों, किसानों को उकसाना ही क्यों ना पडे, जाति और भाषा के नाम पर द्वेष फैलाना पडे, या देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं की प्रतिमा मलीन करनी पडे। आंदोलन की आड में अराजकता फैलाना ही 'इनका' उद्देश है।
#Maharashtra
मैं मोदी सरकार की आलोचना करता हूँ और उसकी सीधी वजह है कि जिन वादों के साथ वो सत्ता में आए थे, उनमें से बहुत सारे वादे आज भी अधूरे हैं।
“अच्छे दिन आएँगे”, “बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार”, काला धन वापस लाने का वादा- ये सब बातें थीं। आज देख लीजिए कि एक मजदूर या एटीएम गार्ड की सैलरी पिछले छह साल में कितनी बढ़ी है और महंगाई कितनी बढ़ गई है। किसान खेती छोड़ने को मजबूर क्यों हो रहा है? क्योंकि उस कमाई से वो सम्मानजनक जीवन नहीं जी पा रहा। आम आदमी से पूछ लीजिए कि उसके कितने अच्छे दिन आए या सिर्फ खर्चा बढ़ा है?
और हम ये कहकर बात खत्म नहीं कर सकते कि सरकार के पास पैसा नहीं था। विज्ञापन और प्रचार पर हजारों करोड़ खर्च करने के लिए पैसा है, लेकिन जनता से किए गए वादों के समय पैसों की मजबूरी दिखा रहे हो। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में सीएजी ने जो गड़बड़ियाँ बताईं, उनका जवाब कौन देगा?
दूसरी बात, जिन नेताओं पर आप भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे, बाद में उन्हीं के लिए अपनी पार्टी के रास्ते खोल दिए, मुख्यमंत्री तक बना दिया। फिर आपकी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की मंशा पर सवाल क्यों नहीं उठेगा?
इन सब बातों को लेकर मेरा इस सरकार से बहुत कड़ा विरोध है। मैं चाहता हूँ कि ये बातें जनता तक पहुँचें, जनता सवाल पूछे और जनता फैसला करे। पिछले आठ-नौ साल से यही अवेयरनेस फैलाने की कोशिश रही है। बेरोजगारी और रोजगार देने को लेकर सरकार की नीयत और गंभीरता पर सवाल हैं। भर्तियों में जिस तरीके से पेपर लीक होते रहे हैं, उससे तो लगता है जैसे पेपर लीक का उद्योग चल रहा हो।
लेकिन फिर भी मैं सीधे ये नहीं कहूँगा कि मोदी वोट चोरी से ही प्रधानमंत्री बने। बिना ठोस सबूत के ऐसा कहना गैरजिम्मेदाराना होगा। एसआईआर जरूरी था, लेकिन उसके तरीके पर सवाल हैं। जो लोग वोट दे सकते थे, उनके नाम गलत तरीके से कटने की शिकायतें हैं। चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी हुए या नहीं, इस पर सवाल हैं। इन सब चीजों के खिलाफ हमें लड़ना पड़ेगा, इसमें कोई दो राय नहीं है।
लेकिन एक सच्चे देशभक्त होने के नाते मैं अपने देश में अशांति फैलाकर, नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात बनाकर सत्ता बदलने की कल्पना भी नहीं कर सकता। शांतिपूर्ण विरोध होना चाहिए, सरकार से जवाब माँगना चाहिए और जनता को अपने साथ जोड़ना चाहिए।
अभी 2029 तक विपक्ष के पास भी खुद को साबित करने का मौका है। जितनी अलग-अलग पार्टियाँ हैं, उनके जितने सांसद हैं, वो अपने-अपने क्षेत्र में मिले अधिकारों और संसाधनों से ऐसा काम करके दिखाएँ कि देश के सामने उदाहरण बनें। जनता खुद कहे कि देखो, फलाँ पार्टी के सांसद ने अपने क्षेत्र में कितना अच्छा काम किया है।
फिर उस काम का खूब प्रचार करिए। जनता को दिखाइए कि जहाँ हमें मौका मिला, वहाँ हमने ये करके दिखाया और देश चलाने का मौका मिलेगा तो ये करके दिखाएँगे। वो भरोसा तो जनता का जीतना ही पड़ेगा।
अभी कई बार भारत को बदलने की इच्छा से ज्यादा सत्ता छीनने की होड़ दिखती है। बाकी पार्टियों को भी ये भरोसा दिलाना पड़ेगा कि आप इनसे बेहतर कर सकते हैं। कैसे कर सकते हैं, उसका रोडमैप भी जनता के सामने रखना पड़ेगा और जनता को उस पर यकीन भी दिलाना पड़ेगा।
और सत्ताधारी पार्टी को भी सोचना पड़ेगा कि उनका इतना विरोध क्यों हो रहा है। जो वादे किए थे, उनका क्या हुआ? सत्ता में आने के बाद अहंकार इतना क्यों बढ़ गया? आज देश के लोगों को कितना कष्ट सहना पड़ रहा है, पुलिस के जवानों तक को किन हालात में काम करना पड़ रहा है-ये सब भी तो आपको सोचना पड़ेगा।
बाकी बहुत कुछ है मन में लिखने को, आगे भी लिखूँगा।
Protecting democracies everywhere is essential work, and the Indian people — like the American people — deserve free and fair elections. Non-violent resistance movements are essential in these moments and I stand with the Indian people who are engaging in non-violent protests to counter anti-democratic efforts in India.