@meesho_support
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Kindly reach in DM.
Since 2004 High Court orders have been ignored, encroachments remain and now Jains are restricted from chanting Neminath Prabhu ki Jai or offering Nirvan Laddu at our own Moksha Bhoomi, Girnar.
We are a true minority, protect minority rights in India🙏🏻
#JainRightToGirnar5thPeak
ट्वीट का मुख्य विषय गिरनार पर्वत की 5वीं टोंक पर धार्मिक अधिकार और संरचना को लेकर जैन समुदाय की चिंता है, जिसमें वे अपने धार्मिक अधिकारों के हनन और हाई कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं।
2004 के हाई कोर्ट आदेश का सार
2004 में गुजरात हाई कोर्ट ने गिरनार की 5वीं टोंक पर स्थापित दत्तात्रेय की मूर्ति और अन्य अवैध निर्माणों को हटाने का आदेश दिया था, क्योंकि ये निर्माण जैन तीर्थ के मूल स्वरूप और धार्मिक अधिकारों के खिलाफ पाए गए थे। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से आगे कोई नया निर्माण न करने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन इसके बावजूद अवैध निर्माण जारी रहे और जैन श्रद्धालुओं के लिए भगवान नेमिनाथ के चरण चिन्हों तक पहुंचना और पूजा करना मुश्किल हो गया।
गिरनार की पुरातात्विक और धार्मिक महत्ता (विशेषकर जैनों के लिए)
गिरनार पर्वत जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की मुक्ति भूमि (मोक्षभूमि) है, जहां उन्होंने दीक्षा ली, ज्ञान प्राप्त किया और अंततः मोक्ष प्राप्त किया। यहां 5 टोंक हैं, जिनमें 5वीं टोंक पर नेमिनाथ के चरणचिन्ह हैं, जो जैनों के लिए अत्यंत पवित्र हैं और हर साल लाखों जैन श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। यह स्थल तीसरी शताब्दी से जैनों के लिए तीर्थस्थल रहा है और यहां कई ऐतिहासिक जैन मंदिर हैं।
आलोचनात्मक विश्लेषण
गिरनार की 5वीं टोंक पर धार्मिक अधिकारों को लेकर जैन और कुछ हिंदू समुदायों के बीच लंबे समय से विवाद है, खासकर जब 2004 में दत्तात्रेय की मूर्ति स्थापित की गई और उसके बाद अवैध निर्माण हुए। हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अमल में ढिलाई और धार्मिक राजनीति के चलते विवाद सुलझ नहीं पाया, जिससे जैन समुदाय के धार्मिक अधिकारों और भावनाओं को ठेस पहुंची है। पुरातात्विक दृष्टि से भी मूल स्वरूप से छेड़छाड़ चिंता का विषय है, क्योंकि इससे ऐतिहासिक प्रमाण और धार्मिक परंपराएं दोनों प्रभावित होती हैं।
निष्कर्ष
गिरनार की 5वीं टोंक जैनों के लिए मोक्षभूमि है, जिस पर उनका ऐतिहासिक, धार्मिक और भावनात्मक अधिकार है। हाई कोर्ट के आदेशों की अनदेखी और अवैध निर्माण न केवल जैन समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि भारत की धार्मिक विविधता और अल्पसंख्यक अधिकारों की संवैधानिक भावना के भी विपरीत है। प्रशासन को निष्पक्षता से कोर्ट के आदेशों का पालन कराते हुए सभी पक्षों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
`गुजरात में अब जैन समाज के संग तानाशाही` 😡
`जैन समाज के साथ एक बार फिर धोखे बाजी हुई,`
गुजरात जूनागढ़ प्रशासन द्वारा एक तरफा निर्णय लिया गया, और ६ महीने से हजारों कि.मी. की पदयात्रा के उद्देश्य पर पानी फेरा गया
पहले जैन समाज को गिरनार पर्वत की ५वीं टोंक जहां से भगवान नेमीनाथ ने मोक्ष प्राप्त किया था , उसे हड़पकर दत्तात्रय मंदिर बनाकर वहां नहीं जाने देते थे , लेकिन आज नया निर्णय जारी किया -जिसमें पहली टोंक के मंदिर पर ही जैन समाज पूजा करेगा और जयकार लगा सकेगा!
यदि २,३,४,५वी टोंक पर जयकार लगाए या द्रव्य चढ़ाई , तो कानूनी कार्यवाही होगी। जबकि गिरनार की हर टोंक तीर्थंकर की प्रतिमा बनी है!
*यह कैसा आजाद भारत का तानाशाह है की, जैन अपने ही मंदिरों के बाहर गिरनार पर नेमीनाथ स्वामी के जयकारे नहीं लगा सकते।
📢 श्री गिरनार जी पर अन्याय नहीं सहेंगे!
गुजरात स्थित श्री #गिरनार पर्वत की पंचम टोंक, जहाँ 22वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान ने मोक्ष प्राप्त किया, जैन धर्म की अत्यंत पावन भूमि है। 2 जुलाई 2025 को हम मोक्षकल्याणक महोत्सव मनाने जा रहे हैं — लेकिन दुखद है कि वही मोक्षभूमि आज अन्य मतानुयायियों के अनधिकृत कब्जे, भेदभाव, हिंसा और जैनों के साथ दुर्व्यवहार का केंद्र बन चुकी है। वर्षों से श्रद्धालुओं को रोका गया, अपमानित किया गया, यहां तक कि एक मुनिराज पर चाकू से जानलेवा हमला भी हो चुका है। अब ये अन्याय और बर्दाश्त नहीं होगा।
हम भारत सरकार, राष्ट्रपति महोदया और गुजरात सरकार से निवेदन करते हैं कि:
🔸 2 जुलाई को मोक्षकल्याणक महोत्सव मनाने की अनुमति दी जाए
🔸 पंचम टोंक पर पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था की जाए
🔸 अनधिकृत कब्जा हटाकर गिरनार को आधिकारिक जैन तीर्थस्थल घोषित किया जाए
कल लाखों श्रद्धालु गिरनार आएंगे — कृपया सुनिश्चित करें कि उनकी श्रद्धा के साथ खिलवाड़ न हो।अन्यथा परिणाम देश व समाज के लिए गंभीर हो सकते हैं।
✊🏻 #जैन समाज अब चुप नहीं बैठेगा!
#MoKshKalyanak2025 #Girinarnath #JainHeritageUnderThreat #SaveGirinarnath #JusticeForJains
@rashtrapatibhvn@PMOIndia@narendramodi@narendramodi_in@HMOIndia@AmitShah@CMOGuj@sanghaviharsh@gujratpolice555
24 तीर्थंकरों के चरण चिह्न भी एक साथ गिरनार पर्वत पर हैं, यहाँ भी अतिक्रमण कर रखा है।इस प्रकार सरकार चुप रहेगी तो जनता न्याय के लिए किसका दरवाज़ा खटखटायें??
#JainRightToGirnar5thPeak
#JainRightToGirnar5thPeak
प्रभु नेमीनाथ की मोक्ष भूमि गिरनार पर्वत
हमारा था, हमारा है और हमारा ही रहेगा।
इतना जुल्म तो मुगलों ने नहीं किया जितना ये वर्तमान सरकार कर रही है।
#Hawaii#Hawaiian
#JainRightToGirnar5thPeak
गिरनार की 5वीं चोटी सिर्फ एक पर्वत नहीं, वो भगवान नेमिनाथ की सिद्धि भूमि है।
जैन समाज का इस पर पूर्ण धार्मिक अधिकार है।
हम सिर्फ एक चोटी नहीं, अपनी आस्था और इतिहास की रक्षा की लड़ाई लड़ रहे हैं।
#JainRightToGirnar#savegirnar
लाडू अन्यत्र क्यों चढाया जाएं?यह जैनो के साथ बहुत गहरी साजिश है।ताकि जैनो को यहां से दूर रखा जाएं।कुछ दिनो मे ये लोग बोल देंगे कि जहां लाडू चढता है,वहीं भगवान नेमिनाथ की मोक्ष स्थली है।अब जैन इन तथाकथित जैनो के बहकावे मे आनेवाला नही है। आगे बढो।
#गिरनार_नेमिनाथ_की_मोक्षस्थली
@Mahaveer_VJ In logo ne Sanatan ka mtlb Vaidik se jod lia h, jo ki asli Sanatan ki परिभाषा fulfil nhi krta to Khud ko Sanatani likho श्रमण add kro nhi to wapis ye bolenge Jain hindu hai
#JainRightToGirnar5thPeak
Jai Jinendra
Girnar is an ancient hill in Junagadh, Gujarat, India. It is one of the holiest pilgrimages of Jains, a Mahatirth, where the 22nd Tirthaṅkar, Bhagwan Neminath attained omniscience, and later nirvana at its highest peak (Neminath Shikhar).
सनातन की परिभाषा समझो फिर खुद को Snatani बोलो अन्यथा फालतू का आडंबर ना करो, और जो सत्य सनातन जिन धर्म है, जो था है रहेगा जिसका ना आदि है ना अंत ना कोई संस्थापक है वही सत्य सनातन शाश्वत जिन धर्म है जो चला आ रहा है अनंत 24 तीर्थंकर हुए और होते रहेंगे
#JainRightToGirnar5thPeak
3 दशक पहले गिरनार की पांचवीं टोंक के इसी स्थान पर जैन मंदिर और भगवान नेमीनाथ के चरण थे
अब वहा पर नेमीनाथ के चरण पर अवैध कब्जा और जैन मंदिर को हटा कर दत्तात्रेय की मूर्ति लगा दी गई है
अवैध स्ट्रक्चर को हटा कर पुनः वहां जैन समुदाय को सौंपा जाए
#JainRightToGirnar5thPeak