संपूर्ण परीक्षा परिणाम पर प्रश्नचिह्न लगाना उन हज़ारों मेधावी छात्र-छात्राओं के साथ अन्याय है जिन्होंने अपने जीवन के सर्वश्रेष्ठ वर्ष पढ़ाई को दिए हैं। #हमारा_कसूर_क्या_है?
अगर गलती व्यवस्था की है, तो सजा उस अभ्यर्थी को क्यों मिले जिसने ईमानदारी से नियुक्ति लिया है?
अनियमितता हुई है तो निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, यह भी सुनिश्चित किया जाए। @dgpjh@HemantSorenJMM@JmmJharkhand@JharkhandPolice
युवाओं पर AK 47, PELLET GUN और कील लगी लाठियां बरसाने वाली भाजपा कल से गहरे सदमे में हैं क्यूंकि उन्मादी भाजपा अपना लोकतंत्र का उत्सव नहीं मना पायी।
और सिर्फ 1500-1600 से अधिक लोगों पर FIR करके की उन्हें अपने परम दुःख को किसी हद तक कंट्रोल करना पड़ा।
उन्मादी @BJP4Jharkhand
#लाठीचार्ज_पर_दोहरा_मापदंड
पूरा झारखंड जानना चाहता है कि @BJP4Jharkhand@yourBabulal जी बिहार में हो रहे छात्रों पर हिंसक रवैया पर अबतक चुप क्यों हैं।
एक तरफ झारखंड में ये छात्रों के लिए सरकार के विरुद्ध अपने पैसों से वकील दे रहे हैं वहीं बिहार में इन्हीं की सरकार छात्रों पर डंडे बरसा रही है।
#हेमंत_है_तो_विरोधियों_को_हिम्मत_है
@JmmJharkhand@HemantSorenJMM
#लाठीचार्ज_पर_दोहरा_मापदंड
"सत्ता में सन्नाटा, विपक्ष में हंगामा—आख़िर कब तक चलेगी यह दोगली राजनीति?" 🎭📢
👉 जब अपने शासित राज्य में निहत्थे लोगों पर पुलिस की लाठियाँ बरसती हैं, तब नेताओं के मुँह पर ताले लग जाते हैं। मीडिया सेल को सांप सूँघ जाता है और बयान आता है—"कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य का कर्तव्य है।"
👉लेकिन वही घटना जब किसी विपक्षी राज्य (जैसे झारखंड) में होती है, तो अचानक 'लोकतंत्र की हत्या' की चीखें सुनाई देने लगती हैं। रातों-रात पोस्टर छप जाते हैं, टीवी डिबेट्स में गला फाड़कर चिल्लाया जाता है और 'सड़क से सदन तक' चक्का जाम कर दिया जाता है!
यह सिर्फ किसी एक पार्टी की बात नहीं है, यह आज की राजनीति की कड़वी सच्चाई बन चुकी है:
👉 अपने राज में: पुलिस की बर्बरता भी 'प्रशासनिक सख़्ती' कहलाती है।
विपक्ष के राज में: वही लाठीचार्ज 'तानाशाही' और 'मानवाधिकार का हनन' बन जाता है।
अपने राज में: चुप्पी ही सबसे बड़ा समाधान है।
विपक्ष के राज में: इस्तीफा माँगे बिना रोटी हज़म नहीं होती!
असली सवाल लाठी का नहीं, राजनीतिक चश्मे का है!
👉 मुद्दा यह कभी था ही नहीं कि जनता पर लाठी क्यों चली या किसका ख़ून बहा। मुद्दा सिर्फ इतना सा है कि "लाठी घुमाने वाली सरकार अपनी है या दूसरे की?"
अगर आपकी हमदर्दी इस बात पर निर्भर करती है कि पीड़ित किस राज्य में है और हुकूमत किसकी है, तो यह जनता का दर्द नहीं, आपकी राजनीतिक अवसरवादिता (Political Opportunism) है। जनता अब इस 'सुविधाजनक विरोध' (Selective Outrage) के ढोंग को अच्छी तरह समझ चुकी है।
👉 न्याय और विरोध का मानक राज्य की सीमाएँ या पार्टी का झंडा देखकर नहीं बदलना चाहिए। लाठी का दर्द हर नागरिक के लिए एक समान होता है, चाहे वह भाजपा शासित राज्य हो या विपक्ष शासित!
⚡ आप राजनीति के इस दोहरे चरित्र पर क्या सोचते हैं? क्या आपको भी लगता है कि विरोध अब सिर्फ़ कुर्सी का खेल बनकर रह गया है?
#राजनीतिक_दोहरा_चरित्र #पक्षपातपूर्ण_राजनीति #लाठीचार्जi
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@SACHNAMA_@KunalSarangi कोचिंग माफिया का इलाज—कानून के दायरे में सख्त कार्रवाई। ⚖️🔥
अफवाह, भ्रम और छात्रों के भविष्य से कारोबार—अब नहीं।
झारखंड के युवाओं को बचाना है तो ऐसे गिरोहों पर लगाम जरूरी है।