मेरी मां अब सशरीर इस दुनिया में नहीं है, उसका राजनीति से भी कोई लेना-देना नहीं था। फिर भी जिस प्रकार उसे भद्दी गालियां देकर अपमानित किया गया, उसका दुख-दर्द मुझे बिहार की माताओं-बहनों और बेटियों के आंसुओं में साफ नजर आया।
ओपन चैलेंज एक गुजराती का :
मे 13 तारीख़ रविवार को अपने साथियों के साथ मुंबई आ रहा हूँ और सीधी विनायक मंदिर के बहार ही हिन्दी में बात करुंगा.
रोक सको तो रोक लो .
तुम्हारे बाप की जागीर नहीं है मुंबई.
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@iMohdAnsar अबे टुच्चे
हमारे लिए गद्दार...गद्दार ही होता है
हिंदू हो तो भी...
100 आतंकवादी में से 99 बुल्ले निकलते हे तब तेरी जबान क्यों गांव में चली जाती हैं