माननीय वित्त मंत्री जी के नाम एक वेतनभोगी नागरिक का खुला पत्र
माननीय निर्मला सीतारमण जी, @nsitharaman
सादर प्रणाम.
मैं इस देश का वह प्राणी हूं जिसे सरकारी भाषा में "करदाता" कहा जाता है और घरेलू भाषा में "तनख्वाह आने से पहले ही गरीब हो चुका आदमी."
आपके कर-विभाग की कृपा से मेरी हालत अब आध्यात्मिक हो चुकी है. पहले मैं कमाता था. अब मैं सिर्फ सरकार के लिए संग्रह करता हूं. तनख्वाह आती है, और उसमें से सौ रुपये में इकतीस रुपये ऐसे निकल जाते हैं जैसे घर में कोई बुजुर्ग बिना पूछे दान-पुण्य कर आया हो. फर्क इतना है कि पुण्य सरकार को मिलता है और आत्मग्लानि मुझे.
आप कहती हैं कि कर देना राष्ट्रनिर्माण है. हम मानते हैं. पर राष्ट्रनिर्माण में हमारा योगदान इतना अधिक हो गया है कि अब अपने घर का निर्माण स्थगित करना पड़ रहा है. बच्चा स्कूल जाए, मां-बाप की दवा आए, मकान की किस्त जाए, गाड़ी में पेट्रोल पड़े, राशन आए, बिजली का बिल भरा जाए इन सबके बाद जो बचता है, उसे देखकर मन में देशभक्ति अपने आप आंखों में पानी बनकर आ जाती है.
सबसे प्यारी बात तो बचत खाते का ब्याज है. आदमी बड़ी मुश्किल से दो पैसे बचाता है. बैंक उस पर चार-पांच प्रतिशत ब्याज देता है. वह ब्याज भी ऐसा नहीं कि उससे आदमी स्विट्जरलैंड चला जाए. उससे तो अधिकतम वह एक किलो काजू देखकर वापस मूंगफली खरीद सकता है. लेकिन सरकार को उस पर भी प्रेम उमड़ आता है. वह कहती है ... "यह आय है."
माननीय जी, यह आय नहीं है. यह वेतनभोगी आदमी की राख में बची हुई आखिरी गरमी है. आप उस पर भी टैक्स का ठंडा पानी डाल देती हैं.
हमारी तनख्वाह पर टैक्स. सामान खरीदें तो जीएसटी. पेट्रोल भरवाएं तो टैक्स. बीमा लें तो टैक्स. मोबाइल चलाएं तो टैक्स. होटल में चाय पिएं तो टैक्स. और अंत में अगर कुछ बच जाए और वह बैंक में पड़ा रहे तो उसके ब्याज पर भी टैक्स. अब तो डर लगता है कि कहीं सरकार सांस लेने पर भी यह न पूछ ले ... "इनहेल किया है, पर आउटपुट दिखाइए."
वेतनभोगी आदमी इस देश का सबसे आज्ञाकारी जीव है. उसकी आय छिपी नहीं रहती. उसका टीडीएस पहले ही काट लिया जाता है. वह चोरी नहीं कर सकता, क्योंकि उसकी चोरी भी फॉर्म 16 में पकड़ी जाएगी. वह नकद नहीं खा सकता, हवाला नहीं चला सकता, शेल कंपनी नहीं खोल सकता. वह सिर्फ एक्सेल शीट खोलकर अपने खर्चे देख सकता है और चुपचाप दुखी हो सकता है.
आपके बजट भाषण में जब "मध्यम वर्ग" शब्द आता है, तब हम टीवी के सामने सीधे बैठ जाते हैं. लगता है आज कुछ होगा. फिर घोषणा होती है और हमें पता चलता है कि हमारा दुख अगले वित्तीय वर्ष में भी जारी रहेगा.
माननीय जी, मध्यम वर्ग कोई चुनावी स्लाइड नहीं है. वह बस में खड़ा आदमी है. वह देर रात असाइनमेंट पूरा करती लड़की है. वह बुजुर्ग पिता की दवा और बच्चे की फीस के बीच कैलकुलेटर दबाता बेटा है. वह मां है जो गैस सिलेंडर की कीमत देखकर सब्जी में पानी थोड़ा और बढ़ा देती है. वह पत्रकार है जो महंगाई पर खबर लिखकर घर लौटता है और पत्नी से पूछता है ... "इस महीने कैसे चलेगा?"
हम कर देने से भाग नहीं रहे. हमें देश से शिकायत नहीं है. हमें सिर्फ यह समझ नहीं आता कि ईमानदार आदमी को हर साल यह क्यों सिद्ध करना पड़ता है कि वह अभी भी थोड़ा और निचोड़ा जा सकता है.
कृपया कभी बजट बनाते समय एक वेतनभोगी आदमी की पासबुक भी देखिए. उसमें अर्थव्यवस्था का सबसे ईमानदार डेटा मिलेगा कमाई सीमित, खर्च अनंत, बचत प्रतीकात्मक और टैक्स वास्तविक. आपसे विनम्र आग्रह है कि कभी बचत खाते के छोटे से ब्याज को भी आय मानने से पहले उस आदमी का चेहरा देख लीजिए जो उसे देखकर खुश नहीं होता, बस थोड़ा कम दुखी होता है.
बाकी हम करदाता हैं. देशहित में कटते रहेंगे. बस इतना ध्यान रहे कि कहीं ऐसा न हो कि अगली बार बजट में राहत नहीं, बल्कि वेतनभोगी आदमी की श्रद्धांजलि पढ़नी पड़े.
आपका ही,
एक ईमानदार, थका हुआ और टैक्स-कटा हुआ नागरिक ( जो साल भर टैक्स कटवाकर रिटर्न भरने के दौरान बचत खाते में भी टैक्स कटवाने से दुखी है )
2,3 और 4 जुलाई को आयोजित होने वाली UPTET परीक्षा में शामिल होने जा रहे परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों को एक दिन का विशेष अवकाश प्रदान करने का कष्ट करे।
@CMOfficeUP@myogiadityanath@thisissanjubjp@UPGovt
बेसिक में नियम बनाने वाले नेता व अधिकारियों से कुछ प्रश्न हैं!कृपया पढ़िए और बताइये---
1.पूरे प्रदेश में किसी नेता या किसी अधिकारी का बच्चा आज से स्कूल गया हो तो बताएं।
2.पूरे प्रदेश में ऐसा कौन सा प्राइवेट स्कूल है जो 8 से 2 बजे तक चलता हो?
3.किस नेता या अधिकारियों के बच्चे इस चिलचिलाती धूप में 1-2 किमी पैदल आते हैं?
4. किस नेता या अधिकारी के बच्चे बिना पंखे और लाइट के सड़ी गर्मी में बैठते हैं?
5. पूरे प्रदेश में कोई स्कूल है जिसमे नेता या अधिकारी के बच्चे जहां पढ़ते हैं, वहां लाइट 10 बजे आती हो और हाजरी लगाकर चली जाती हो?
Ac में बैठकर नियम बनाने वाले क्या बिल्कुल ही संवेदनहीन हो चुके हैं?अध्यापकों से आपकी कोई खुन्नस है तो उसे निकाल लो पर बच्चों को पीस रहे हो?ज्यादातर बच्चे नाना नानी के गए हैं 1जुलाई के बाद ही आएंगे!
यदि बच्चों को स्कूल बुलाना है तो अधिकारी व नेताओं के बच्चे भी 25 जून से स्कूल जाने चाहिए।
एक अपील:
शिक्षा एवं शिक्षक हित से जुड़े मुद्दों के लिए @sirjistp को फ़ॉलो अवश्य करें, जिससे मजबूती से अपनी बात रखी जा सके। धन्यवाद।
भीषण गर्मी के कारण कुछ जनपदों में जिला स्तर से विद्यालय समय परिवर्तन किया गया है। आपसे @myogiadityanath अनुरोध है कि उत्तर प्रदेश के समस्त जनपदों के परिषदीय विद्यालयों का समय प्रातः 7:30 से 12:30 बजे तक करने का कष्ट करे।
@CMOfficeUP@thisissanjubjp@UPGovt@basicshiksha_up
आदरणीय @DMKheri सर भीषण गर्मी , तापमान में वृद्धि होने के कारण उमस से दुष्प्रभाव के दृष्टिगत जनपद के परिषदीय विद्यालयों का समय प्रातः 7:30 बजे से दोपहर 11:30 बजे तक करने का कष्ट करें!
धन्यवाद!
@KheriBsa@Gopalgiri_lmp
बढ़ती हुई भीषण गर्मी को देखते हुए बच्चों और शिक्षकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देना न केवल मानवीय दृष्टिकोण से, बल्कि एक जिम्मेदार प्रशासनिक निर्णय के रूप में भी अनिवार्य है।
उच्च तापमान में बच्चों का लंबे समय तक स्कूल में रहना स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है, जिसका सीधा असर उनके सीखने की क्षमता और एकाग्रता पर पड़ता है।
इस विषय पर शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन को संवेदनशील होकर जल्द से जल्द निर्णय लेने की आवश्यकता है, ताकि शिक्षण कार्य भी प्रभावित न हो और स्वास्थ्य सुरक्षा भी बनी रहे।
भीषण गर्मी के कारण बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों का समय प्रातः 7 बजे से 11 बजे तक करने का कष्ट करे। @CMOfficeUP@myogiadityanath@thisissanjubjp@UPGovt@basicshiksha_up@dm_sitapur@DmSitapur@BsaSitapur@dr_bsa@JagranNews@EyeIndiaMedia
#NoTetBeforeRteAct
जो व्यवस्था देश के किसी कर्मचारी,अधिकारी या न्यायाधीश पर लागू नहीं है वो देश के बेसिक शिक्षकों पर लागू करना देश के 25 लाख शिक्षकों एवं उनके करोड़ों परिजनों के साथ अन्याय है ।