कैसा घबराया साहेब बात-बात पे डरता है, डगमग डगमग हुए कुर्सी धर्म को आगे करता है।
पटर-पटर बोले है ये तो सौ में नब्बे झूठ, राम नाम का लगा मौखौटा सबको लेगा लूट।
ऊपर पर्वत पर बैठी देवी मां राक्षसों को कहती थी कि जो मुझे जीत लेगा , मैं उसकी पत्नि बन जाऊंगी !
राक्षस भोग की आकांक्षा लिये पर्वत पर जाते थे तो बहुत पिटते थे ! सप्तशती कथा के अनुसार अंत में देवी शुंभ - निशुंभ जैसे सारे असुरों का सफाया कर देती हैं !
तब प्रकृति में जो भी गड़बड़ हो गया था सब ठीक हो जाता है , नदी स्वच्छ हो गयीं , आसमान के काले बादल छंट गये, सूर्य पूरे ओज के साथ चमकने लगता है !
- आचार्य प्रशांत
आप अगर किसी प्राणी की जान तब ले रहे हो,
जब उसकी जान लिए बिना भी आप जी सकते थे, तो ये हिंसा है।
आप किसी प्राणी की जान तब ले रहे हो,
जब वो आपको नुकसान पहुँचाने नहीं आ रहा, तो ये हिंसा है।
आप ये सिद्ध कर दो कि आप जिस जानवर का शोषण कर रहे हो,
वो आपके खून का प्यासा था, इसीलिए आपने उसको मार दिया।
तो मैं कहूँगा, बिल्कुल ठीक किया।
भाई, आपके ऊपर चढ़ा आ रहा था बकरा या भैंस या मुर्गा, अपने तीन-तीन फुट लंबे दाँत लेकर के
और अपने पैने पंजों से आपकी गर्दन पर वो आक्रमण कर रहा था
और बकरे तो होते ही हैं माँसाहारी, जैसा हम जानते हैं
और भैंसें तो खास तौर पर इंसानों को मारकर, काटकर खाना पसंद करती हैं।
तो उस पशु ने आप पर इतना ज़बरदस्त आक्रमण किया,
तो अपनी आत्मरक्षा में आपने उसे मार दिया।
चलिए, कोई बात नहीं, ये हिंसा नहीं हुई।
या तो आप ये साबित कर दीजिए कि ऐसा है।
आप अपने स्वार्थ की खातिर अरबों पशुओं को रोज़ मारते हैं!
~ आचार्य प्रशांत
मेरी असली ज़रूरत कुछ और है, लेकिन मैं कई तरह की फालतू चीज़ों की उम्मीद करने लगता हूँ।
मेरी असली बीमारी कुछ और है, लेकिन मैं कई तरह के नकली इलाज आज़माने लगता हूँ।
दूसरों से उम्मीद रखना भी उन नकली इलाजों में से एक है।
Issue raised at 7:48 AM
Response by UP CEO at 7:16 PM
Call by 8:51 PM
Issue resolved by 9:32 PM.
Does this happen to every voter. Or for the privileged few?
Gems of Karnataka SIR!
At least 37 people have filed Form-7 to delete their own names from Karnataka’s electoral rolls, saying they are “dead”
In another 334 pairs of cases, two people have filed forms declaring each other dead
Hello @ceo_karnataka, @ECISVEEP 👋🏼 👋🏼
https://t.co/QfZ65PG56W
UP SIR : One person submitted Form-6 TEN times. Don’t @ceoup and @ECISVEEP have a system to flag and stop duplicate applications? Is this really so difficult for @TCS to implement?
In several other cases (as mentioned in the X thread below), people submitted three-four Form-6 applications, and the EC issued three-four different EPIC IDs to the same person.
@MrsGandhi Hello @MrsGandhi, That video is from August, When people from Indian and Pakistani Diaspora celebrated Independence Day. Nothing to do with Protest involving @dhruv_rathee in London.
Gems of UP SIR :
17 people. 34 voter IDs. One booth in Bulandshahr.
15 filed just ONE Form 6 each as per available data available on UP CEO website, yet all 17 appear twice in the final roll with different voter IDs.
Hello Mr. Navdeep Rinwa @ceoup, We were told, SIR was supposed to remove duplicates. How did your process create them? Who is responsible?
Instead of trying to intimidate “Mr Fact-Checker,” do the job entrusted to you. Explain these discrepancies, fix the rolls and answer the public. Bullying those who expose failures is no substitute for accountability.
#UPSIRFiles
Hello @ceoup, You now Tweeted, You'll take action against people for wrong Declaration in Form-7 with punishment with Imprisonment up to one year or fine or both.
There is a long list of bulk objectors, Incan share the full list. Babu Ram alone filed 250 Form 7 objections in March (95% against Muslim voters). What action have you taken on these people filing mass deletion requests?
@ECISVEEP@SpokespersonECI@yadavakhilesh@RahulGandhi
इस दलाल @ABPNews को पता है कि ये किसी भी लड़की को कुछ भी अनाप-शनाप बोल देगा तब भी इसका कुछ नहीं बिगड़ेगा.
ये कॉन्फिडेंस सरकार का आशीर्वाद मिले बिना नहीं आ सकता. इस @ABPNews को लगता है कि सरकार से सवाल पूछने वाली लड़की को ये कॉल गर्ल बोल देगा तो इसकी दलाली की रकम बढ़ जाएगी.
अब कोर्ट में मुलाक़ात होगी.
खूब नारी वंदन करवा हैं आप मोदीजी…@narendramodi
Gems of UP SIR!
Several voters whose names were missing from the draft electoral roll (jan 6th) submitted Form 6 for inclusion. In some cases, two applications were submitted for the same person and the Election Commission went ahead and issued four voter IDs.
In plain words: One person applied twice. The EC gave them four voter IDs. 😎
Buy one get one free! 🫰🏼
There are several such cases. @ceoup@yadavakhilesh@RahulGandhi
Rajnath Singh :
You allege that Congress wants “regime change” the Bangladesh route
No. People want “regime change”
Protests with slogan “India against corruption” brought you power
Then :
You embraced corruption
Captured institutions
Manipulated voters list
Time to go !
Hundreds detained by the Delhi Police today for trying to peacefully gather in the Central Park in Connaught Place. Is it a crime to raise the national flag? Is it a crime to peacefully protest? Why is the govt so scared of people raising their voice to demand the scrapping of SIR and resignation of CEC Gyanesh Kumar?
लोकतंत्र की आत्मा पर रिजीम चेंज का भूत डांस
SIR और वोट चोरी के आरोपों का जवाब नहीं दिया गया। कई दिनों तक चुप रहने के बाद गृहमंत्री ने कहा कि राहुल घुसपैठियों को बचाने के लिए SIR का विरोध कर रहे हैं। पिछले साल जून से SIR हो रहा है, गृहमंत्री बता देते कि कितने घुसपैठिए SIR से पहचाने गए हैं। आयोग ही बता देता। बिहार SIR के समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई निकला भी तो उसकी जाँच की सक्षम अथॉरिटी गृहमंत्रालय है। गृहमंत्री बता सकते हैं कि ऐसे कितने केस उनके सामने आए हैं।
असम में कई दशक तक घुसपैठ का भूत नचाया गया। सुप्रीम कोर्ट से भी भूत नचवाया गया। कोर्ट ने NRC का आदेश दिया। डेढ़ हज़ार करोड़ से अधिक की राशि फूंक दी गई। NRC की लिस्ट बनी तो लाखों की संख्या में हिन्दू भी निकल गए जिनकी नागरिकता संदिग्ध थी। निकलनी थी क्योंकि किसके पास काग़ज़ होता है। SIR में भी लोग पिछले SIR का सबूत नहीं दे पाए। विपक्ष ने कोर्ट से लड़कर आधार नहीं जुड़वाया होता तो आधे वोटर बाहर हो गए होते। लौटते हैं असम के NRC पर। बीजेपी ने NRC को तुरंत फेंका। NRC के बाद असम में जो पहला विधान सभा चुनाव हुआ, उसमें NRC का नाम तक लेना बंद कर दिया। फिर से उसी भूत को SIR के नाम से नचाया जा रहा है कि घुसपैठिया पकड़ा जा रहा है।
जंतर मंतर पर जेन ज़ी का आंदोलन अहिंसक था फिर भी दिमाग़ी नक्सल कहा गया। पेपर तो लीक हो ही रहा था। NTA बेकार एजेंसी साबित हुई। परीक्षा में सुधार के लिए नंदन कमेटी बनानी पड़ी। प्रधान का इस्तीफ़ा हुआ। हिंसा के आरोप पुलिस पर लगे और गृहमंत्री जवाब देने पूरे आख़िरी दिन छोड़ कर मानसून सत्र के दौरान सदन में ही नहीं आए।
SIR से तब भी ध्यान नहीं भटका तो जंतर मंतर हटाने और राजधानी ठप्प करने में उलझाया गया। सारी बहस प्रदर्शन के अधिकार की तरफ चली गई। उससे भी ज्ञानेश कुमार का मामला पीछे नहीं गया तो रिजीम चेंज ले आए। ये भी नहीं चलेगा तो परिसीमन है ही। इसे भारत की सभी समस्याओं का इलाज बताया जाएगा।
इधर आयोग कोर्ट जाने से पहले नाम जोड़ने में लगा है। नियमों के नाम पर नाम काटे गए और नियमों को ताक पर रख कर नाम जोड़े जा रहे हैं। बिहार और बंगाल में नाम काट कर वोट देने से रोका गया। यह अवैध काम था। ये अपराध सुप्रीम कोर्ट और आयोग की नाक के नीचे हुआ है। जिस तरह से जनता के डर से नाम जोड़े जा रहे हैं, उसी तरह से पहले भी जोड़े जा सकते थे। जवाब है नहीं ।
जनता के बीच चोरी पकड़ी गई तो बेंच के नीचे कॉपी छिपा कर जल्दी जल्दी होमवर्क की कॉपी भर रहे हैं ताकि आयोग तक जनता के पहुँचने के पहले दिखा सकें कि किसी का नाम नहीं कटा है। फॉर्म 6 में जो अवैध था, उसे तो ख़त्म कर दिया। फॉर्म 7 भी अब एक आदमी दस से ज़्यादा नहीं भर सकता। पहले तो सैंकड़ों भर रहा था तब कहाँ थे? 27 लाख लोगों से वोट के अधिकार छीने गए। तब कहाँ थे?
अख़बार में ख़बर छपी कि जेन ज़ी का नाम नहीं जोड़ने के लिए SIR के नाम पर SSR बंद है। तो तुरंत दिल्ली में घोषणा कर दी गई और अब पूरे देश में। इसके बाद जो वोटर लिस्ट आएगी उसकी मशीन से पठनीय कॉपी दी जाएगी। पहले का वोटर लिस्ट तो ख़त्म हो चुका, उसकी कॉपी आयोग ने नहीं दी। नीयत में खोट नहीं होती तो वोटर रोल की मशीन पठनीय कॉपी दे सकता था। राहुल गांधी और दूसरे नेता माँगते रहे। नहीं दिया तो नहिये दिया।
ज्ञानेश कुमार के अपराध को बचाने के लिए असंख्य पुलिस बल उतारा गया। मुद्दा और पब्लिक के बीच पहुंच गया। अब रिजीम चेंज के मुद्दे से ज्ञानेश को बचाया जा रहा है। चुनाव आयुक्त सामने आकर जवाब नहीं दे सकते। जवाब होता तो प्रेस कांफ्रेंस हो जाती। 23 सितंबर से 18 अक्तूबर के बीच दिल्ली में रोज़ प्रेस कांफ्रेंस हुई। केवल चुनाव आयोग की नहीं हुई।
वोट चोरी असली रिजीम चेंज प्रूफ़ काम है। मुद्दा तो यही है कि वोट का अधिकार छीना गया ताकि चुनाव में जनता वोट से हरा न सके। अपने ऊपर लगे आरोप का जवाब नहीं है तो विपक्ष की तरफ से आए एक दो बयान के ज़रिए विपक्ष पर हमला किया जा रहा है कि वह रिजीम चेंज करना चाहता है जैसे इसके लिए विपक्ष ने वोट चोरी की हो। हर नेता ने संवैधानिक तरीके से प्रदर्शन की बात की तो आपने जंतर मंतर को हमेशा के लिए बंद कर दिया। तो ड्रामा से एक वास्तविक मुद्दे का काउंटर तैयार हुआ है लेकिन इससे चुनाव आयोग की साख बहाल नहीं होगी। वोट चोरी लोकतंत्र की हत्या है। उसकी आत्मा पर प्रहार है। अब उस आत्मा पर रिजीम चेंज का भूत डांस हो रहा है ताकि लोग भाग जाएँ।