भारतीय जनता पार्टी मंडल अध्यक्ष, ओबीसी मोर्चा, नोएडा महानगर | समर्पित समाजसेवी | राष्ट्रहित और समाज कल्याण के लिए प्रतिबद्ध | #BJP#OBCMorcha#Noida#SamajSeva
🚨 हेडलाइन: मीटर की पर्ची से लेकर इंस्टॉलेशन तक अवैध वसूली के आरोप, मजदूरों की मजबूरी का उठाया जा रहा फायदा!
#चोटपुर नोएडा कॉलोनी में मेहनतकश मजदूर रहते हैं। बिजली मीटर की पर्ची कटवाने के लिए लोग सुबह से शाम तक, बल्कि रात 1 बजे से ही लंबी कतारों में लग रहे हैं। कई लोगों को पर्ची कटवाने में एक-दो दिन तक लग जा रहे हैं, जिससे उनकी रोज़ की मजदूरी भी प्रभावित हो रही है।
आरोप है कि इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए मीटर कैंप में अवर अभियंता अनुज कुमार सिंह द्वारा
‘गोलू’ नाम के व्यक्ति को रखा गया है, (बिजली माफिया के लाइनमैन है) जो लाइन में लगे बिना मीटर की पर्ची/फाइल का काम कराने के नाम पर प्रति मीटर(₹5355) कनेक्शन ₹2,000 अतिरिक्त वसूल रहा है। आरोप यह भी है कि ऐसे और भी लोगों को रखा गया है। सूत्रों के हवाले से कब खबर है प्रतिदिन उपरोक्त व्यक्ति लगभग ₹150000 की अवैध उगाई कर रहा है
वहीं दूसरी ऑडियो रिकॉर्डिंग में आरोप है कि पर्ची कटने के बाद घर पर मीटर लगाने पहुंचे व्यक्ति द्वारा ₹500 से ₹1,000 तक अतिरिक्त पैसे मांगे जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि “पैसा ऊपर तक देना पड़ता है।”
⚠️ विभागीय दावों पर भी उठे सवाल
मामला बेहद गंभीर है। एक तरफ विभागीय अधिकारियों द्वारा अवैध वसूली नहीं होने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सामने आई ऑडियो रिकॉर्डिंग में अतिरिक्त पैसे मांगने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराई जाए। आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन, मुकदमा और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
मेहनतकश मजदूरों की रोज़ी-रोटी प्रभावित कर किसी भी प्रकार की अवैध वसूली की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
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शासनादेश में बिजली सुविधा पर रोक, फिर 1028 ट्रांसफॉर्मर और गली-गली 11 KV लाइनें कैसे लगीं?
नोएडा, सेक्टर-63। चोटपुर–छिजारसी क्षेत्र में बिजली व्यवस्था और कथित अवैध वसूली को लेकर विद्युत विभाग के पुराने पत्रों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विभागीय पत्र संख्या 8513, 8628 और 7988 दिनांक 21.10.2024 में अवैध वसूली की पुष्टि नहीं होने तथा पूर्व में नायब तहसीलदार दादरी और मुख्यालय की टीम द्वारा जांच किए जाने का उल्लेख है।
शिकायतकर्ता का सवाल है कि यदि पहले की जांचों में कुछ नहीं मिला तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के संज्ञान में अब इसी क्षेत्र में 13,000 अवैध कनेक्शनों की बात कैसे आई? शिकायतकर्ता का दावा है कि धरातल पर यह संख्या 35–40 हजार तक हो सकती है।
क्या यह पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर रातों-रात खड़ा हो गया? शिकायतकर्ता तंज कसते हुए पूछता है कि जब वर्षों से शिकायतें की जा रही थीं, तब जांच टीमों को कुछ दिखाई नहीं दिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के संज्ञान में मामला आने के बाद बड़े पैमाने पर अवैध कनेक्शनों की बात सामने आ गई?
अब मांग है कि 2010 से 2026 तक 1028 ट्रांसफॉर्मरों और 11 KV लाइनों की स्वीकृति, कार्यादेश, भुगतान, शटडाउन और मेंटेनेंस रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच हो।
शिकायतकर्ता ने अवर अभियंता अनुज कुमार सिंह, संबंधित SDO और अधिशासी अभियंता स्तर के अधिकारियों की भूमिका की जांच तथा दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल: शासनादेश में नवनिर्मित विद्युतीकरण पर रोक थी, तो इतना बड़ा विद्युत नेटवर्क आखिर किसकी अनुमति से और किस व्यवस्था के तहत खड़ा हुआ?
मीटर के लिए महिलाएं और लोग लंबी कतारों में खड़े हैं। महिलाओं का आरोप है कि बिजली के नाम पर ₹1,000 और ट्रांसफॉर्मर के लिए अलग से पैसे लिए जाते थे। शिकायतकर्ता के पास इससे जुड़े वीडियो होने का दावा है। JE अनुज कुमार सिंह, SDO और अधिशासी अभियंता की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग उठी।
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भ्रष्टाचार की कोई सीमा नहीं: चोटपुर कॉलोनी, नोएडा में बिजली सिंडिकेट के खिलाफ वर्षों से उठ रही आवाज, शिकायतकर्ताओं पर मुकदमे के आरोप
#नोएडा। भ्रष्टाचार की कोई सीमा नहीं है तो इसका एक गंभीर उदाहरण उपरोक्त कॉलोनी में सामने आने वाले बिजली व्यवस्था से जुड़े आरोपों में देखा जा सकता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से बड़े पैमाने पर बिजली माफियों का एक सिंडिकेट संचालित किया जा रहा था, जिसमें आम लोगों से बिजली कनेक्शन, तार जोड़ने, ट्रांसफॉर्मर और मासिक रखरखाव के नाम पर जबरन अवैध अवेद धन वसूली की जाती थी।
पिछले करीब दो वर्षों से लगातार बिजली माफिया और अवैध वसूली के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।
आरोप है कि लगातार शिकायतों, ज्ञापनों और अधिकारियों के समक्ष मुद्दा उठाए जाने के बावजूद इस पूरे प्रकरण से जुड़े मुख्य लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है और वे खुलेआम घूम रहे हैं।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिन लोगों ने कथित अवैध वसूली को रुकवाने और पूरे मामले को उजागर करने के लिए अभियान चलाया, उन्हीं के खिलाफ मुकदमे दर्ज होने का आरोप है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें दबाव में लेने और उनकी आवाज को कमजोर करने के लिए झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है।
मामले में अवर अभियंता अनुज कुमार सिंह, एसडीओ, अधिशासित अभियंता आदि के द्वारा सिंडिकेट से लगभग 6.50 करोड़ रूपया लिये गये झूठे आरोप में निखिल शर्मा और आदित्य सिंह को फसाने के लिए और उनकी आवाज को कमजोर करने के लिए, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने अनुज कुमार सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित कई शिकायतें की हैं और उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार की जाती रही है और संबंधित अधिकारियों की संपत्ति और आय के स्रोतों की भी जांच की जाए।
एक बड़ा सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि जब बिजली व्यवस्था और अवैध वसूली को लेकर लगातार शिकायतें की गईं, तो संबंधित मुकदमे में उन अधिकारियों की भूमिका की जांच क्यों नहीं की गई जिनके खिलाफ शिकायतें पहले से दी जा रही थीं?
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आम जनता से जुड़े इतने गंभीर मामले में केवल अभियान चलाने वाले लोगों पर कार्रवाई होती है और जिन अधिकारियों के खिलाफ लगातार शिकायतें दी गई हैं, उनकी भूमिका की जांच नहीं होती, तो यह निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह मामला अब केवल बिजली व्यवस्था का नहीं, बल्कि जनता से जुड़े भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा एवं निष्पक्ष जांच का भी सवाल बन गया है।
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डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन के लिए रातभर कतार, मातृशक्ति ने उठाए सवाल
एक ही कैंप पर उमड़ी भारी भीड़, महिलाओं को रात रात भर टोकन के लिए करना पड़ रहा इंतजार; मुख्यमंत्री @myogiadityanath से व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग
#नोएडा , सेक्टर-63। #चोटपुर–छिजारसी डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन को लेकर एक बार फिर अव्यवस्था का मामला सामने आया है। सरकार की ओर से पात्र परिवारों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद स्थानीय महिलाओं और परिवारों का आरोप है कि विभाग द्वारा पर्याप्त व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण उन्हें घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक ही स्थान पर कैंप लगाए जाने से भारी भीड़ जमा हो रही है। स्थिति यह है कि कई महिलाओं को रात रात भर टोकन लेने के लिए लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। महिलाओं का कहना है कि लंबे समय तक लाइन में खड़े रहने के बावजूद पर्याप्त संख्या में कनेक्शन नहीं हो पा रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्षों से बिजली की समस्या झेल रहे परिवार अब वैध कनेक्शन मिलने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उन्हें दोबारा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
“पहले बिजली के नाम पर शोषण, अब कनेक्शन के लिए लाइन”
क्षेत्र की महिलाओं का कहना है कि लंबे समय तक उन्हें बिजली व्यवस्था की समस्याओं और अवैध वसूली का सामना करना पड़ा। अब जब वैध कनेक्शन देने की प्रक्रिया शुरू हुई है, तो विभाग को पहले से बेहतर व्यवस्था करनी चाहिए थी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मीटर के लिए लगभग ₹5,355 जमा कराया जा रहा है और तार/लाइन से संबंधित खर्च भी अलग से बताया जा रहा है। जिन मकानों की दूरी बिजली के खंभे से काफी अधिक है, उनके सामने अतिरिक्त खर्च का सवाल भी खड़ा हो रहा है।
35–40 हजार अवैध कनेक्शनों का दावा
माननीय योगी आदित्यनाथ जी के संज्ञान में लगभग 13 हजार अवैध कनेक्शनों की बात सामने आई थी, जबकि स्थानीय स्तर पर वास्तविक संख्या 35–40 हजार तक होने का दावा किया जा रहा है। साथ ही लंबे समय से बिजली माफिया और विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत तथा अवैध वसूली के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं।
पुरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और भ्रष्ट अधिकारी, कर्मचारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने जूनियर इंजीनियर अनुज कुमार सिंह, एसडीओ तथा अधिशासी अभियंता वैभव मिश्रा समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि अवैध वसूली और बिजली माफिया से मिलीभगत के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री से मातृशक्ति की अपील
डूब क्षेत्र की महिलाओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि बिजली कनेक्शन प्रक्रिया को सरल और व्यवस्थित बनाया जाए। क्षेत्र में एक से अधिक कैंप लगाए जाएं, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए अलग काउंटर बनाए जाएं तथा रात में महिलाओं को टोकन के लिए लाइन में खड़े होने की मजबूरी खत्म की जाए।
मातृशक्ति का कहना है कि सरकार ने जब पात्र परिवारों को बिजली कनेक्शन देने की पहल की है, तो इसका लाभ सम्मानजनक, पारदर्शी और बिना किसी बिचौलिए के मिलना चाहिए।
स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लेकर बिजली विभाग की व्यवस्था सुधारने और कथित भ्रष्टाचार एवं अवैध वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। @UPPCLLKO@Uppolice@PVVNLHQ@aajtak@EMofficeUP@dmgbnagar@CMOfficeUP@PMOIndia@AmarUjalaNews@News18India@ABPNews@ZeeNews@News18UP@ZeeUPUK
@thevoicenm अगर यह दावा सही है तो मामला बेहद गंभीर है। ₹6.5 करोड़ की कथित डील की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पैसों के लेन-देन की जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जानी चाहिए। दोषी कोई भी हो, कानून के तहत कठोर कार्रवाई हो।
@thevoicenm सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर: चर्चा है कि कथित बिजली माफिया को बचाने के लिए अधिकारियों के स्तर पर करीब ₹6.5 करोड़ की डील किए जाने का आरोप है। सूत्रों का दावा है कि इसमें लगभग ₹1.5 करोड़ की रकम पहुंच चुकी है, जबकि शेष रकम पहुंचाए जाने की बात कही जा रही है।
चोटपुर कॉलोनी, सेक्टर-63 नोएडा में 24 घंटे से बिजली गुल, महिलाएं परेशान
चोटपुर कॉलोनी में पिछले 24 घंटे से बिजली नहीं होने के कारण महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बेहद परेशान हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायत के लिए जूनियर इंजीनियर और अवर अभियंता को बार-बार फोन किया जाता है, लेकिन फोन नहीं उठाया जाता और समस्या नहीं सुनी जाती।
लोग जब बिजली घर अपनी समस्या लेकर पहुंचते हैं तो आरोप है कि पुलिस बुलाकर लाठी से पिटवाने की धमकी दी जाती है, वहीं जूनियर इंजीनियर पर महिलाओं के साथ बदतमीजी करने के भी आरोप हैं।
बिजली संकट से छोटे-छोटे बच्चों की तबीयत बिगड़ने और उन्हें ड्रिप लगाए जाने की बात भी सामने आ रही है। महिलाओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है कि हाल ही में दिए गए अस्थायी बिजली कनेक्शन के निर्देशों को जल्द लागू कराया जाए, ताकि कम से कम बच्चों की पढ़ाई और परिवारों की जरूरतें पूरी हो सकें।
महिलाओं की मांग है कि समस्या का तत्काल समाधान हो और यदि अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा लापरवाही या दुर्व्यवहार किया गया है तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाए। @Uppolice@UPPCLLKO@myogiadityanath@CMOfficeUP@PVVNLHQ@PankajSinghBJP@PMOIndia
15–16 वर्षों से कथित बिजली सिंडिकेट का आरोप, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले अभियानकर्ताओं पर मुकदमे की साजिश का दावा
नोएडा। चोटपुर-छिजारसी क्षेत्र की कॉलोनियों में पिछले लगभग 15–16 वर्षों से कथित रूप से सक्रिय बिजली माफिया और अवैध वसूली के सिंडिकेट को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बिजली विभाग द्वारा कथित बिजली माफियाओं के खिलाफ लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
अभियानकर्ताओं का दावा है कि वर्ष 2024 में निखिल शर्मा, आदित्य सिंह और उनकी टीम ने इस कथित बिजली सिंडिकेट के खिलाफ अभियान चलाकर मामले को उजागर किया था। टीम द्वारा लगातार शिकायतों के माध्यम से आरोप लगाया गया कि कॉलोनियों में अवैध बिजली कनेक्शन और अवैध वसूली का नेटवर्क चल रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। साथ ही अवैध विद्युत व्यवस्था के कारण सुरक्षा को लेकर भी गंभीर खतरा बना हुआ है और क्षेत्र में कई घटनाएं सामने आने का दावा किया गया है।
अभियानकर्ताओं का आरोप है कि अब भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की आवाज दबाने और कथित माफिया तंत्र को बचाने के लिए उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराने की साजिश की जा रही है।
मामले में सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि कथित बिजली माफियाओं की ओर से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये अधिकारियों तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई है। साथ ही करीब पांच करोड़ रुपये की कथित अतिरिक्त मांग को लेकर भी चर्चाएं हैं, जिसे एक सप्ताह के भीतर पहुंचाए जाने का दावा किया जा रहा है।
इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र जांच और वित्तीय लेन-देन की जांच की मांग उठ रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल बिजली चोरी या अवैध कनेक्शन का मामला नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व, प्रशासनिक व्यवस्था और आम जनता की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।
अलग-अलग क्षेत्रों में कथित अवैध वसूली का आरोप
अभियानकर्ताओं का कहना है कि पूरी कॉलोनी के लोगों को पता है कि अलग-अलग क्षेत्रों में कथित रूप से कौन-कौन लोग अवैध वसूली करते थे। शिकायतों में बब्बन सिंह, अजीत उर्फ बंटी, मनोज उपाध्याय, हरीकिशोर, रविंद्र यादव और उपेंद्र यादव समेत कई नामों का उल्लेख किए जाने का दावा किया गया है।
अभियानकर्ताओं के अनुसार इन नामों और कथित गतिविधियों से संबंधित शिकायतें विभिन्न स्तरों पर लिखित रूप में दी गई हैं। @myogiadityanath , @dmgbnagar और @PMOIndia के स्तर तक शिकायतें भेजे जाने के साथ-साथ मामले में @CBIHeadquarters , @dir_ed और SIT जैसी स्वतंत्र जांच एजेंसियों से जांच कराने की मांग भी की गई थी। अभियानकर्ताओं का आरोप है कि शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई के बजाय मामले को लीपापोती कर छोड़ दिया गया।
“निखिल शर्मा और उनकी टीम को दबाए बिना अवैध वसूली दोबारा संभव नहीं”
अभियानकर्ताओं का आरोप है कि निखिल शर्मा और उनकी टीम लगातार कथित अवैध वसूली और बिजली सिंडिकेट के खिलाफ आवाज उठा रही है। उनका दावा है कि जब तक इन लोगों की आवाज को दबाया नहीं जाता, तब तक कथित अवैध वसूली का नेटवर्क दोबारा उसी तरह सक्रिय करना मुश्किल है। इसी कारण टीम को झूठे मुकदमों में फंसाने की साजिश किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।
जेई और अवर अभियंता की भूमिका पर भी सवाल
अभियानकर्ताओं ने बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) और अवर अभियंता की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायतों के बावजूद विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
अभियानकर्ताओं ने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों को जांच पूरी होने तक उनके पदों से हटाकर निलंबित किया जाए और उनके कार्यकाल के दौरान हुए सभी विद्युत कनेक्शनों, राजस्व वसूली, मीटरों, शिकायतों तथा कथित अवैध कनेक्शनों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की गुहार
अभियानकर्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच किसी विभागीय दबाव या स्थानीय प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वर्षों से कथित रूप से चल रहे अवैध विद्युत नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और सरकारी राजस्व को कितना नुकसान हुआ।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 15–16 वर्षों से कथित रूप से चल रहे इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कब होगी @Uppolice@UPPCLLKO@PVVNLHQ@EMofficeUP@dgpup@PankajSinghBJP@NitinNabin
#Chotpur #Noida
बिजलीमाफियाओं के खिलाफ आवाज उठाने वालों को ही माफिया बनाने का आरोप, भ्रष्ट तंत्र पर गंभीर सवाल
नोएडा सेक्टर-63 में बिजली व्यवस्था और कथित बिजली माफियाओं के खिलाफ लंबे समय से संघर्ष कर रहे अभियानकर्ताओं ने जेई/एसडीओ अभियंता और अन्य अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जो लोग पिछले कम से कम दो वर्षों से अपनी जान की परवाह किए बिना कॉलोनी की जनता के हित और विद्युत विभाग के राजस्व को बचाने के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं, आज उन्हीं लोगों को कथित तौर पर माफिया घोषित करने और फर्जी मुकदमों में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है।
अभियानकर्ताओं के अनुसार, पिछले दो वर्षों के दौरान बिजली माफियाओं और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न माध्यमों से 11,000 से अधिक शिकायतें ट्विटर के माध्यम से की गई हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री, पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी, मुख्य अभियंता, अधिशासी अभियंता सहित संबंधित अधिकारियों और विभागों को ई-मेल एवं लिखित शिकायतें भेजी गई हैं।
शिकायतों और कार्रवाई का दावा
SIT और ED जांच की मांग को लेकर कई बार शिकायतें की गईं।
लगभग 7 बार लखनऊ में जनता दर्शन के दौरान ज्ञापन और शिकायतें प्रस्तुत की गईं।
शक्ति भवन, लखनऊ स्थित विद्युत विभाग के मुख्यालय में भी शिकायतें दी गईं।
100 से अधिक RTI दाखिल कर विद्युत विभाग से जानकारी मांगी गई।
113 जनहित शिकायतें CPGRAMS और जनसुनवाई/IGRS के माध्यम से दर्ज कराई गईं।
लगभग 14 ज्ञापन जिलाधिकारी महोदय को सौंपे गए।
बिजली संबंधी अनियमितताओं के विरोध में कई धरना-प्रदर्शन भी किए गए।
बिजली माफियाओं और अधिकारियों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका लंबित होने का भी दावा किया गया है।
अभियानकर्ताओं का कहना है कि मामले को लेकर @PMOIndia मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया @yadavakhilesh और आयकर विभाग सहित विभिन्न स्तरों पर शिकायतें भेजी गई हैं।
इसके साथ ही कथित बिजली माफियाओं और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए ED सहित अन्य जांच एजेंसियों से जांच की मांग भी की गई है।
अभियानकर्ताओं का आरोप है कि शिकायतों में अवर अभियंता/जूनियर इंजीनियर, एसडीओ, अधिशासी अभियंता तथा बिजली माफियाओं से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग लगातार उठाई गई है।
अभियानकर्ताओं का कहना है कि यदि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप सही हैं तो निष्पक्ष जांच कराई जाए, लेकिन यदि वे जनता और सरकारी राजस्व के हित में आवाज उठाने के कारण निशाने पर हैं, तो पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। उनका दावा है कि उनके पास शिकायतों, RTI, ज्ञापनों और अन्य दस्तावेजों के रूप में बड़ी संख्या में साक्ष्य मौजूद हैं।
सवाल यही है—बिजली माफियाओं के खिलाफ लगातार आवाज उठाने वाले लोग आरोपी कैसे बन गए? और जिनके खिलाफ हजारों शिकायतें की गईं, उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच कब होगी?
@Uppolice@DCPCentralNoida@dmgbnagar@CMOfficeUP@myogiadityanath@UPPCLLKO
कथित अवैध वसूली सिंडिकेट की उच्चस्तरीय जांच हो
बिजली विभाग के जिन जूनियर इंजीनियर, अवर अभियंता, अधिशासी अभियंता अथवा अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों पर बिजली माफियाओं के साथ मिलीभगत कर कथित अवैध वसूली और शोषण का सिंडिकेट चलाने के आरोप हैं, उनकी निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
जांच में यह भी स्पष्ट किया जाए कि पिछले वर्षों में लोगों से किसके द्वारा, किस आधार पर और कितनी धनराशि ली गई। दोष सिद्ध होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
अभियानकर्ताओं को सुरक्षा और निष्पक्ष SIT जांच @Uppolice
बिजली व्यवस्था और कथित अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठाने वाले अभियानकर्ता निखिल शर्मा, आदित्य सिंह और उनकी टीम को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए, क्योंकि उनके द्वारा लगातार गंभीर मामलों को उठाया गया है और उन्हें कथित रूप से धमकियों/घटनाओं का सामना करना पड़ा है।
साथ ही, अभियानकर्ताओं को कथित रूप से झूठे मुकदमों में फंसाने या उनके खिलाफ कार्रवाई करने के प्रयासों की निष्पक्ष SIT जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं शिकायतकर्ताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को ही निशाना तो नहीं बनाया जा रहा। @UPPCLLKO
योगी जी की पुलिस पर गंभीर सवाल: सेक्टर-63 थाने के पुलिसकर्मियों पर गाली-गलौज, के आरोप
नोएडा। थाना सेक्टर-63 की पुलिस पर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि थाना प्रभारी अमित कुमार, हेड कांस्टेबल सुखबीर सहित एक अन्य हेड कांस्टेबल और एक पुलिसकर्मी ने माननीय निखिल शर्मा जी के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और मां-बहन की गालियां दीं।
सवाल यह है कि योगी जी की पुलिस को आखिर ऐसी भाषा बोलने की ट्रेनिंग कहां से मिली? क्या पुलिस की वर्दी किसी व्यक्ति को किसी की मां-बहन को गाली देने का अधिकार देती है? क्या इन पुलिसकर्मियों के अपने घरों में मां-बहन नहीं हैं?
आरोप यह भी है कि क्षेत्र में बिजली माफियाओं और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण और दलाली करने की छूट दी जा रही है, जबकि भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठाने वालों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की जाती है।
इस पूरे मामले का वीडियो सामने आने का दावा किया जा रहा है। वीडियो में पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर की गई अभद्रता और गाली-गलौज को देखा-सुना जा सकता है।
अब सवाल सीधे योगी जी की पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों से है—अगर वीडियो में लगाए गए आरोप सही हैं, तो क्या ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होगी?
मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर विभागीय कार्रवाई की जाए।
थाना सेक्टर-63, नोएडा से सामने आए इस मामले ने पुलिस के व्यवहार और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। @Uppolice@dgpup@PankajSinghBJP@CMOfficeUP@PMOIndia@DCPCentralNoida@noidapolice@dmgbnagar