उ.प्र निकाय चुनाव को लेकर हाईकोर्ट का आदेश है कि 'जब तक ट्रिपल टेस्ट ना हो, OBC आरक्षण नहीं मिलेगा, अब से सभी सीटें जनरल, OBC आरक्षण खत्म।' वहीं दुसरी ओर EWS को आरक्षण देने के लिए न तो किसी आयोग की जरूरत, न सर्वेक्षण की, न बहस की, न संविधान की, न 50%सीमा की।
#ओबीसी_विरोधी_भाजपा
EWS कोटा - आँकड़ों की कोई ज़रूरत नहीं है।
OBC कोटा- आयोग बनाओ। सर्वे करो। पिछड़ापन साबित करो। कौन कौन पिछड़ा है, उसके आँकड़े लाओ। जो पिछड़ा है, वो सचमुच पिछड़ा है, ये साबित करो। राजनीतिक पिछड़ापन साबित करो। आँकड़ों से साबित करो कि वह बिना आरक्षण के वे चुन कर नहीं आ सकते।
आज सोते रहे तो कल देर हो जाएगी। स्थानीय निकाय के बाद नौकरी और शिक्षा का आरक्षण ख़त्म होगा। ओबीसी के बाद SC और ST का नंबर आएगा। आरक्षण बचाओ, संविधान बचाओ।
ओबीसी और दलित विरोधी है भाजपा सरकार
दलित पिछड़े साथ आएं
मिलकर आरक्षण बचाएं
#ओबासी_विरोधी_योगी_इस्तीफा_दो
ओबीसी और दलित विरोधी है भाजपा!
-69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण घोटाला किया
-जातिगत जनगणना नहीं कराई
- निकाय चुनाव में पिछड़ों का आरक्षण गलत तरीके से किया।
भाजपा सरकार दलितों और पिछड़ों के अधिकारों का कर रही है हनन।
#ओबीसी_विरोधी_योगी_इस्तीफा_दो
Retweet: योगी आदित्य नाथ के राज में यूपी में स्थानीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण ख़त्म हो गया है। अनुसूचित जाति, जनजाति के दोस्त योगी को हटाने की माँग का समर्थन करें। आज ओबीसी का गया है। कल SC, ST का जाएगा। आरक्षण बचाओ। #ओबासी_विरोधी_योगी_इस्तीफा_दो
आज आरक्षण विरोधी भाजपा निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण के विषय पर घड़ियाली सहानुभूति दिखा रही है। आज भाजपा ने पिछड़ों के आरक्षण का हक़ छीना है,कल भाजपा बाबा साहब द्वारा दिए गये दलितों का आरक्षण भी छीन लेगी।
आरक्षण को बचाने की लड़ाई में पिछडों व दलितों से सपा का साथ देने की अपील है।
“नोट गिनते समय ज़्यादातर लोग थूक का इस्तेमाल करते हैं, ये किसे पता कि किस-किस तरह के लोगों ने नोटों पर थूक लगाया है? नोट शराब के ठेके से लेकर माँस की दुकान और वेश्यालयों तक से होकर गुज़रते हैं, इसलिए भी नोटों को किसी भी मंदिर में न चढ़ाएँ । पाप लगेगा। मंदिरों में सिर्फ फूल चढ़ाए।
मन तो वैसे ही दुखी रहता है लेकिन ऐसी ख़बर सुनकर मन और टूट जाता है।
एक बेरोजगार......!
भाजपा सरकार से आग्रह करता हूं कि रोजगार के अवसर पैदा करें।🙏
@myogiadityanath ji
बुलडोजर चल रहा है
रोजगार, महंगाई, शिक्षा, संवैधानिक संस्थाओं, निष्पक्ष पत्रकारिता, लोकतंत्र के मुद्दों को कुचल रहा है।
जनता का ध्यान भटकाने में लगा समूचा तंत्र।