मा० सूप्रीम कोर्ट ने कहा - पैदल चलना लोगों का मौलिक अधिकार, फुटपाथ पर राहगीरों का हक सबसे पहले
@OfficialGNIDA ग्रेनो वेस्ट मे सड़कें तो काफी चौड़ी-चौड़ी है, मुख्य सड़क है, बस लेन है, उसके साथ सर्विस रोड भी है, लेकिन यदि 1-2 सड़क को छोड़ दें तो बाकी किसी भी सड़क पर पैदल चलने वालों के लिए आज तक फूटपाथ नहीं बना। कृप्या सूप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सभी सड़कों के साथ फूटपाथ बनवाए
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सड़कों के हाल बेहाल, निकलना दुष्भार
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में सोसायटियों को जोड़ने वाली सड़कों की स्थिति बेहद खराब है। हर जगह गड्ढे ही गड्ढे है और नालियों का पानी सड़क पर भरा पड़ा है। रोड़ से निकलने में मुश्किल हो रही।
@myogiadityanath@CMOfficeUP
हम नहीं सुधरेंगे
एक हरेभरे पेड़ की टहनियों को काटकर दिखाने के लिए खानापूर्ति कर दी गई,गिरे हुए पेड़ को उठाकर खड़ा किया जा सकता था। उसको @OfficialGNIDA के संबंधित विभाग ने काट ही दिया, पौधे लगाने के बजाए ये पेड़ काटने पर विश्वास रख रहे है !
अरिहंत अंबर में सर पर प्लास्टर गिरने से मौत हृदयविदारक है।
एक दशक से इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही है।
संलग्न आदेश एक सोसायटी का है जहाँ इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं।
क्या प्रशासन प्राधिकरण पुलिस सरकार किसी की मौत पर ही जागेगी?
नेफोवा माँग करती है कि
1. जिम्मेदार बिल्डर पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो।
2. अविलंब स्ट्रक्चरल ऑडिट हो न केवल अरिहंत अंबर की बल्कि अन्य सभी हाइराइज बिल्डिंग की।
3. आदेश/निवेदन के बाद भी स्ट्रक्चरल ऑडिट न करवाने वाले बिल्डर, मेंटेनेंस एजेंसी और अधिकारियों पर भी हत्या के प्रयास का मुकदमा चले।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सड़कों पर हर दिन लाखों लोगों की मजबूरी दिखाई देती है।
घंटों के ट्रैफिक में फंसी महिलाएं, स्कूल और ऑफिस के लिए संघर्ष करते बच्चे, इलाज और जरूरी कामों के लिए परेशान बुजुर्ग , अब यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि रोज़ की पीड़ा बन चुकी है।
माननीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी,
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों परिवार आपसे आशा लगाए बैठे हैं। कृपया इस क्षेत्र की पीड़ा को समझिए और मेट्रो परियोजना में हस्तक्षेप कर जल्द समाधान दिलाइए। इसी दर्द ने आज मेट्रो की मांग को जन आंदोलन बना दिया है। हर सोसाइटी में सिग्नेचर कैंपेन चल रहा है, लोग उम्मीद के साथ अपनी आवाज जोड़ रहे हैं।
यह सिर्फ मेट्रो की मांग नहीं, बल्कि सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर जीवन की पुकार है।
#Metro4GreaterNoidaWest
#Metro4GreaterNoidaWest
10 सालों का संघर्ष अब जनआवाज़ बन चुका है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की लाखों आबादी आज भी ट्रैफिक जाम, लंबी दूरी और खराब पब्लिक ट्रांसपोर्ट की समस्या से जूझ रही है।
मेट्रो अब सुविधा नहीं, जरूरत है।
यह सिर्फ सफर आसान नहीं करेगी, बल्कि समय, रोजगार, प्रदूषण और पूरे क्षेत्र के विकास को नई दिशा देगी।
अब वक्त है कि सरकार ग्रेटर नोएडा वेस्ट की आवाज सुने और मेट्रो परियोजना को जल्द मंजूरी दे।
#नोएडा_अतिक्रमण की अराजकता
सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन के बाहर तो रेहड़ी-पटरी व ऑटो ई-रिक्शा का जमावड़ा सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है. मेट्रो यात्रियों के साथ दिल्ली मेट्रो भी परेशान है.
प्राधिकरण के बुलडोजर खामोश हैं, जिम्मेदार देख नहीं रहे हैं
@noida_authority@CeoNoida
माननीय विधायक श्री @DhirendraGBN जी द्वारा उठाया गया यह मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय है। गौतमबुद्ध नगर व गाजियाबाद के हाई-राइज क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा की स्थिति वाकई चिंताजनक है। अब आवश्यक है कि समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित हो, सख्त सेफ्टी ऑडिट, आधुनिक फायर सिस्टम और नियमित मॉक ड्रिल ज़मीन पर लागू हों। सोसाइटी में फायर सेफ्टी की ग्राउंड रियलिटी चिंताजनक है।
मा. @narendramodi जी
आपकी सरकार ने जयपुर फेज 2 मेट्रो को भी अप्रूवल दे दिया,आखिर हम ग्रेटर नोएडा वेस्ट वालों से क्या समस्या है?क्यों ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो को बार-बार अप्रूवल देने से रोका जा रहा है? हम लोगों ने तो हर चुनाव में आपको झोली भर कर वोट दिया
#Metro4GreaterNoidaWest
ये है ग्रेटर नोएडा वेस्ट की गौर 14th एवेन्यू सोसायटी...
चंद कुत्ता प्रेमी गैंग की वजह से यहां आवारा कुत्तों की संख्या इतनी बढ़ गई कि लोगो का घर से निकलना मुश्किल हो गया है।
@OfficialGNIDA मस्त है... जनता त्रस्त है।
एक समय ऐसा आता है जब खामोशी धैर्य नहीं, मजबूरी बन जाती है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट आज उसी मोड़ पर खड़ा है।
@narendramodi@PMOIndia@mlkhattar@MoHUA_India
सालों से यहां के निवासी मेट्रो के वादों, और टालमटोल के बीच जी रहे हैं। रोज़ाना घंटों का ट्रैफिक जाम, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अभाव, और इससे होने वाला मानसिक व आर्थिक क्षति अब आम जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। यह केवल असुविधा नहीं, बल्कि एक बुनियादी अधिकार का सवाल है।
मेट्रो रेल की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रस्तावित यह प्रदर्शन सिर्फ एक जुटान नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की आवाज़ है जो हर दिन इस परेशानी को झेल रहे हैं। यह आवाज़ उन कामकाजी लोगों की है जो सुबह से पहले घर छोड़ते हैं, उन माता-पिता की है जो अपने बच्चों के सुरक्षित सफर को लेकर चिंतित हैं, उन बुजुर्गों की है जो खुद को असहाय महसूस करते हैं, उन महिलाओं की है जो सुबह शाम शेयरिंग ऑटो रिक्शा में बैठकर जाम से जूझती हैं और खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं।
यह एक भावनात्मक अपील है सत्ता को चला रहे अफसरों से तथा नीति निर्माताओं से, क्योंकि मेट्रो की मांग ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लिए विलासिता नहीं बल्कि जरूरत है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के हर निवासी की इस मांग में भागीदारी जरूरी है। यह सिर्फ समर्थन नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है।
इतिहास गवाह है परिवर्तन खुद नहीं आता, उसे शांतिपूर्ण तरीके से मांगना पड़ता है।
अगर अब नहीं, तो कब? अगर हम नहीं, तो कौन?
#Metro4GreaterNoidaWest
@CeoNoida@OfficialGNIDA@CPCB_OFFICIAL@myogiadityanath condition of the road from La Residentia to Nirala Estate Greater Noida West IV4 is extremely poor, with damaged stretches, no footpath, lack of proper cleaning and maintenance, and no fencing to protect roadside plants.
प्रधानमंत्री जी ने आगे बढ़कर इनकी माता जी का स्वास्थ पूछा सम्मान दिया था
और इनकी भाषा देख लीजिए
जिस आदमी के संस्कार ही ख़राब हों उससे तमीज़ की उम्मीद करना बेईमानी है 👇
मा. प्रधानमंत्री @narendramodi जी,
सादर निवेदन है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों निवासी बार-बार मेट्रो परियोजना की डीपीआर निरस्त होने से गहरी निराशा में हैं।
“ग्रेटर नोएडा वेस्ट की जनता ने अब ठाना है,
मेट्रो रेल अब यहां लाना है।"
अब केवल नारा नहीं, बल्कि हमारी आवश्यकता बन चुका है। यह क्षेत्र आज भी सार्वजनिक परिवहन के अभाव, रोज़ाना लगने वाले ट्रैफिक जाम, तथा उससे होने वाले मानसिक और आर्थिक नुकसान से जूझ रहा है। इसलिए हजारों की संख्या में निवासी 26 अप्रैल 2026 को दिल्ली में जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर अपनी इस जायज़ मांग को आपके समक्ष रखने वाले हैं।
आपसे विनम्र निवेदन है कि इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए मेट्रो परियोजना को शीघ्र स्वीकृति प्रदान कराएं, ताकि लाखों लोगों को राहत मिल सके।
निवेदक
समस्त ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासी
" बहुत हो गया डीपीआर का खेल,
कब आएगी मेट्रो रेल"
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो की मांग कोई विलासिता नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की जरूरत बन चुकी है। लाखों लोग हर दिन घंटों ट्रैफिक जाम में फंसकर समय, ऊर्जा और उत्पादकता खो रहे हैं। बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अभाव में क्षेत्र का विकास बाधित हो रहा है। जब देश के कई टियर-2 शहरों में मेट्रो नेटवर्क सफलतापूर्वक चल रहा है, तो फिर इतनी बड़ी आबादी वाले ग्रेटर नोएडा वेस्ट को इस बुनियादी सुविधा से वंचित क्यों रखा जा रहा है?
यह मांग सिर्फ सुविधा की नहीं, बल्कि समान विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और सम्मानजनक जीवन की है। अब समय है कि सरकार जनभावना को समझे और बिना और देरी के मेट्रो परियोजना को मंजूरी दे।
#Metro4GreaterNoidaWest #JantarMantarProtest4Metro #UrbanMobility #PublicTransport
एक बार जंगल में आग लगी, तो बड़े-बड़े जानवर दूर खड़े होकर सिर्फ तमाशा देख रहे थे। कोई आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर रहा था। उसी समय एक छोटी सी चिड़िया अपनी चोंच में पानी भरकर लाती और आग पर डाल देती। पास बैठे कौवे ने हँसते हुए पूछा - “तुम्हारी इस छोटी सी कोशिश से क्या फर्क पड़ेगा?”
चिड़िया ने बहुत शांत होकर जवाब दिया - “फर्क पड़े या न पड़े, लेकिन जब भी कभी जंगल की इस आग की चर्चा होगी, तो मेरा नाम आग बुझाने वालों में लिया जाएगा, न कि दूर बैठकर तमाशा देखने वालों में।”
आज ग्रेटर नोएडा वेस्ट की लाखों की आबादी रोज़ ट्रैफिक, जाम, असुरक्षा और खराब कनेक्टिविटी की “आग” में झुलस रही है।
अब सवाल ये है -
क्या हम भी किनारे खड़े होकर सिर्फ शिकायत करते रहेंगे?
या उस छोटी चिड़िया की तरह आगे बढ़कर अपने हक के लिए आवाज़ उठाएंगे?
मेट्रो कनेक्टिविटी कोई सुविधा नहीं, हमारी बुनियादी ज़रूरत है। और इसे पाने के लिए हर एक आवाज़ मायने रखती है।
आइए, एकजुट हों, आवाज़ बुलंद करें - क्योंकि बदलाव तभी आता है जब “छोटी-छोटी कोशिशें” मिलकर एक बड़ा आंदोलन बन जाती हैं।
इतिहास तमाशा देखने वालों को नहीं, बदलाव लाने वालों को याद रखता है। @Shwetabharti22