सुख तो दोनों तरफ़ ही नहीं है,
ना दुर्योधन की तरफ़,
ना अर्जुन की तरफ़।
जब दुख दोनों ही तरफ़ है
तो कम-से-कम
सही दुख का चयन करो।
और सही दुख है,
अपने विरुद्ध रण करने में।
सही दुख का ही नाम आनंद है।
@BaDastoor इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है
नाँव जर्जर ही सही लहरों से टकराती तो है
एक खंडहर के ह्रदय-सी, एक उंगली फूल सी
आदमी की पीर गूंगी ही सही, गाती तो है
- दुष्यंत कुमार