समाजवादी पार्टी, उत्तर प्रदेश
19, विक्रमादित्य मार्ग, लखनऊ
प्रकाशन/प्रसारण हेतु- दिनांकः24.09.2024
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने मऊ जनपद के वरिष्ठ नेता एवं समाजवादी पार्टी के राज्य कार्यकारिणी के पूर्व सदस्य श्री प्रेमचन्द यादव के निधन पर गहरा शोक जताया है।
श्री अखिलेश यादव ने दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हुए संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है।
(राजेन्द्र चौधरी)
मुख्य प्रवक्ता
परीक्षा समय के साथ अतिरिक्त पांच मिनट के अभ्यर्थियों के आग्रह पर, सम्यक विचारोपरान्त, बोर्ड द्वारा पांच मिनट का अतिरिक्त समय प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।इस संबंध में केन्द्र व्यवस्थापकों एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश दे दिये गये हैं।
-अध्यक्ष @rajeevkrishna69@cmofficeUP@chiefsecyUP@dgpup@uppolice
हमारे गांव जहनियापुर(ब्लॉक मुहम्मदाबाद गोहना)में ट्रांसफार्मर के जलने से बिजली बाधित है,हमारे किसान भाई काफी परेशान है धान की खेती को लेकर,संबंधित विभाग में शिकायत करने के बाद भी कुछ हो नहीं रहा।
कृपया मामले का संज्ञान ले @aksharmaBharat@UPPCLLKO@UPGovt@PuVVNLHQ@EMofficeUP
कल उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक स्तर के पदों को आउटसोर्सिंग से भरने का एक पत्र वायरल हुआ जिस पर देर रात डीजीपी ने सफाई देते हुए कहा कि यह पत्र त्रुटिवस जारी हो गया था।
माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी ने चुनाव के दौरान ही यह कहा था कि भविष्य में यह सरकार सारे सरकारी पदों को संविदा पर कर देगी ताकि आरक्षण को समाप्त किया जा सके।
@yadavakhilesh@samajwadiparty
हर हाल में और हर स्थान पर किसी के जीवन की रक्षा करना सरकार का सबसे पहला दायित्व और कर्तव्य होता है। सरकारों पर निम्नलिखित हालातों में से किसी भी हालात में, किसी बंधक या क़ैदी की मृत्यु होना, न्यायिक प्रक्रिया से लोगों का विश्वास उठा देगा:
- थाने में बंद रहने के दौरान
- जेल के अंदर आपसी झगड़े में
- जेल के अंदर बीमार होने पर
- न्यायालय ले जाते समय
- अस्पताल ले जाते समय
- अस्पताल में इलाज के दौरान
- झूठी मुठभेड़ दिखाकर
- झूठी आत्महत्या दिखाकर
- किसी दुर्घटना में हताहत दिखाकर
ऐसे सभी संदिग्ध मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में जाँच होनी चाहिए। सरकार न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार कर जिस तरह दूसरे रास्ते अपनाती है वो पूरी तरह ग़ैर क़ानूनी हैं।
जो हुकूमत जिंदगी की हिफ़ाज़त न कर पाये उसे सत्ता में बने रहने का कोई हक़ नहीं।
उप्र ‘सरकारी अराजकता’ के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। ये यूपी में ‘क़ानून-व्यवस्था का शून्यकाल है।