मैं इससे पूरी तरह सहमत हूँ। हाँ, बेशक सुधार हुआ है।
एक राष्ट्र, एक पार्टी : भाजपा के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड।
एक राष्ट्र, एक पार्टी: राम के नाम पर चंदा, भाजपा के लिए।
एक पार्टी, एक मतदाता सूची: जिसमें वही मतदाता हों जो भाजपा को वोट दें।
एक राष्ट्र, एक मीडिया: जो केवल भाजपा के पक्ष में बोले।
अगर इसे ही सुधार कहते हैं, तो मैं मानती हूँ कि हाँ, सुधार हुआ है।
चुनाव आयुक्त को ले कर सरकार में भारी असमंजस है
किसी भी बड़े नेता ने खुलकर चुनाव आयुक्त का बचाव नहीं किया है
सभी को डर है कि ज्ञानु का इस्तीफा नहीं हुआ तो सरकार पर भी संकट आ सकता है
Ljp और नायडू जैसे लोग कभी भी पाला बदल सकते है
आगे के दिन रोमांचक होने वाले है
उत्तर प्रदेश के चुनाव से पहले गजब का खेल चल रहा है!
Election Commission की वेबसाइट पर Form-6 से जुड़े नए वोटरों के करीब 71.38 लाख applications ही publicly available हैं, जबकि final voter list में 84.3 लाख नाम जोड़े गए हैं।
बाकी 16.18 लाख applications कहाँ हैं?
ये कहाँ से आए? किस बूथ से आए? किस age group के हैं?
इनकी पूरी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं दिखाई दे रही?
मैं इंस्पेक्टर धम्मोर हूँ inspector dhammor ———
आवाज़ तो सुनो इस गुंडे टाइप पुलिस की
आज कल पुलिस वाले कानून पढ़ना छोड़ दिए हैं और दारू से क़ानून बना रहे हैं ??? @UPGovt@Uppolice
दहशत और आतंक का पर्याय बन गयी है योगी पुलिस।
मशहूर युवा अवधी गायक श्री संजय यदुवंशी के घर में परिजनों से गाली गलौज नंगा नाच करती CM योगी आदित्यनाथ की निजी पुलिस।
अदालतों की मौन सहमति के कारण पुलिस द्वारा आम लोगों का उत्पीड़न बढ़ गया है निर्दोष लोगों का इनकाउंटर।
अदालतें मौन होकर तमाशा देख रही हैं।
वोट चोरी का एक और कारनामा
यूपी की वोटर लिस्ट में 16.18 लाख आवेदनों का ब्यौरा गायब
द रिपोर्टर्स कलेक्टिव की रिपोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
खबर के अनुसार, SIR के बाद यूपी की वोटर लिस्ट में शामिल किए गए 16.18 लाख वोटर के आवेदनों की सूची और विवरण आयोग की वेबसाइट पर मौजूद नहीं हैं।
यह कानून का साफ उल्लंघन है। आयोग ने नये जुड़े 16.18 लाख वोटर्स की पहचान छिपाई है।
चुनाव आयोग ने यूपी की वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए 71.38 लाख आवेदनों का विवरण सार्वजनिक किया
लेकिन अंतिम सूची में 84.30 लाख मतदाता जोड़ दिए, ये 12.92 लाख अतिरिक्त लोग कहां से आए?
रिपोर्टर आयुषी कर को पड़ताल में आयोग की एक प्रेस विज्ञप्ति मिली, जिसमें ड्राफ़्ट सूची जारी होने से पहले 16.18 लाख अतिरिक्त आवेदनों का ज़िक्र था। लेकिन इनके नाम और विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए।
ये किस विधानसभा और किस बूथ के आवेदन थे? इनकी जांच कैसे हुई? इसका मिलान कैसे होगा?
रिपोर्टर ने जवाब मांगा तो यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी बोले - “हम आपकी शंकाएं सुलझाने के लिए कंसल्टेंसी सेवाएं नहीं देते।”
चुनाव आयोग अपने को देश का मालिक समझ बैठा है। उसे लगता है कि वह किसी सवाल का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है। क्योंकि वह जनता के लिए नहीं, पार्टी के लिए काम कर रहा है।
बड़ा खुलासा, चुनाव आयोग की बड़ी चोरी
SIR के बाद उत्तर प्रदेश में 16.18 लाख रहस्यमयी तरीके से जोड़े गए है
जोड़े गए मतदाताओं की कोई पहचान सार्वजनिक नहीं है।
ब्रेकिंग🚨
चुनाव आयोग ने 2017, 2019, 2022 और 2024 में बेईमानी की और बंगाल में तो उसने पूरी तरह से बेशर्मी भरा खेल खेला... चंडीगढ़ वाली चाल को कौन भूल सकता है?"
-अखिलेश यादव🔥
इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट ने तब Illegal कहा जब बीजेपी के पास अथाह पैसा हो गया, पैसा रखने की जगह नहीं बची। वैसे ही इलेक्टोरल रोल पर सुप्रीम कोर्ट ने तब बोला जब देश भर में SIR हो गया और बीजेपी ने अपने लिए वोटर लिस्ट बनवा ली।
यह मत समझिए कि कोर्ट ने जो कह दिया, उस पर ही हम चुप हो जाएँ। अब ज्ञानेश कुमार, नरेंद्र मोदी और अमित शाह का डकैती सिस्टम एक्सपोज़ हो गया है। अब इनके जेल जाने का समय आ चुका है।
संघी खेमा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज रोहिंग्टन नरीमन की टिप्पणी से बौखलाया हुआ है और ग़ाली-गलौज़ करता हुआ टूट पड़ा है।संघियों की नाराज़गी स्वाभाविक है। उन्होंने चुनाव आयोग और सरकार ही नहीं सुप्रीम कोर्ट की पोल जो खोलकर रख दी है। आख़िर एसआईआर में सुप्रीम कोर्ट की मिलीभगत किसी से छिपी तो है नहीं।जज रोहिंटन फली नरीमन ने कहा है कि संविधान और लोकतंत्र का दिल—वोट का अधिकार—गंभीर खतरे में है, और ऐसा निर्वाचन आयोग नहीं चल सकता जो इस तरह “malfunction” करे।पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में (उन्होंने करीब 90 लाख का आंकड़ा दिया) लोगों को वंचित किया गया; करीब 22 लाख ने अपील की, और तय हुई करीब एक लाख अपीलों में लगभग 93 प्रतिशत मतदाताओं के पक्ष में गईं।उन्होंने साफ़ कहा कि इससे बंगाल के चुनाव नतीजे ही उलट गए।उन्होंने प्रक्रिया को अवैध करार दिया और सुप्रीम कोर्ट से तुरंत हस्तक्षेप की उम्मीद जताई। उन्होंने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए।अब जब उन्होंने इतने सारे सवाल खड़े कर दिए तो संघी तो बौराएंगे ही, क्योंकि इससे पूरी सरकार और हाल में हुए चुनाव अवैध हो जाते हैं।
मैं इंस्पेक्टर धम्मौर हूं…मादर#%द समझे!!
यूपी पुलिस ने गालियों के साथ “नारी वंदन” करने का नया तरीक़ा निकाला है !! वीडियो सुनिए
सुल्तानपुर पुलिस आधी रात को चोरों की तरह किसी के घर की दीवार फाँदकर कर घुस रही है जैसे किसी माफिया को पकड़ने आई हो!!
गुंडों के सामने कैप सीधी करके सैल्यूट करने वाली पुलिस एक लोकगायक के घर की दीवार फाँदकर खुद को सिंघम समझ रही है!!
संजय यदुवंशी ने कड़ी मेहनत के ज़रिए अपना नाम कमाया, इज़्ज़त बनायी
कल पुलिस वालों ने घर में घुसकर माँ बहन की भद्दी भद्दी गलिया दी, इज़्ज़त को तार तार कर दिया
जितना ये दारोग़ा कमाता होगा उससे ज़्यादा संजय यदुवंशी हर साल टैक्स देता है बावजूद इसके संजय के परिवार की गरिमा का ख़्याल नहीं रखा गया
संजय यदुवंशी को इन पुलिस वालों पर मुक़दमा दर्ज करना चाहिए इन्हें सबक सिखाना बहुत जरूरी है।
सुल्तानपुर में लोक गायक संजय यदुवंशी के घर में पुलिस विनी किसी वारंट कैसे घुस गयी , क्याCore principle Rule of Law यही है ? विना किसी वारंट किसी घर में घुसना दिवाल फाँदना ,बहन बेटियों से बदसलूकी करना ,उस परिवार के निजता का हनन है, ऐसे पुलिस कर्मियों को खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए !
यदि संजय को खिलाफ कोई वारंट हो तो पुलिस को दिखाना चाहिए
आख़िर क्यों यूपी पुलिस बीजेपी के संरक्षित
गुंडो की तरह काम कर रही है ? @dgpup
यह सुप्रीम कोर्ट ही है जिसने कहा था कि "SIR में कोई बाधा बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
योगेंद्र यादव खुद कोर्ट में पेश हुए। तार्किक ढंग से दलील दी कि यह सब गलत हो रहा है। जिंदा लोगों को कोर्ट में पेश किया कि इनके नाम कैसे काटे जा सकते हैं। माननीय कोर्ट ने क्या किया? आधार को मान्य करार दिया और योगेंद्र यादव की तारीफ करके मामला रफा-दफा कर दिया।
ममता बनर्जी खुद कोर्ट में पेश हुईं। दलील दी कि योग्य मतदाताओं के नाम काटना गलत है। राज्य में 27 लाख लोग वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। आखिरकार कोर्ट ने क्या किया? कहा "कोई बात नहीं, अगली बार वोट दे देना।"
क्या बिना वजह, कुछ दिन या कुछ साल के लिए लोकतंत्र को सस्पेंड भी किया जा सकता है? क्या मेरी नागरिकता किसी की इच्छा या दया पर आधारित है? क्या नागरिकता सरकार की मनमानी के बावजूद मिली हुई भीख है?
यह कैसे कहा गया कि "अगली बार वोट दे देना"? जिन 1 लाख लोगों की अपील पर फैसला हुआ, उसमें से 93% नागरिकों के पक्ष में फैसला हुआ, क्या अब भी कोर्ट को नहीं लगा कि उनसे गलती हुई है?
मीडिया में सैकड़ों रिपोर्ट आईं कि कैसे SIR के बहाने लोकतंत्र का जनाजा निकाला जा रहा है, लेकिन कोर्ट ने कोई संज्ञान नहीं लिया।
पिछले कई सालों से बड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट का रवैया अजीब रहा है। वे केस सुनने को तैयार होते हैं। सुनवाई करते हैं। बहुत तार्किक और उम्मीद जगाने वाली टिप्पणियां करते हैं। लेकिन फैसला वह आता है जो नहीं आना चाहिए।
क्या सुप्रीम कोर्ट कभी यह बताएगा कि उनकी निगहबानी में बंगाल के 27 लाख लोगों से वोट का अधिकार क्यों छीना गया? क्या कोर्ट यह चाहता है कि लोग कोर्ट से न्याय की आशा और संविधान में भरोसा करना छोड़ दें?
(मैं कोई सुप्रीम कोर्ट की आलोचना के लायक नहीं हूं। जो देख रहा हूं, बस वही कह रहा हूं। इसे कोर्ट के प्रति एक सामान्य नागरिक की निराशा समझा जाए।)
PM बेटी बचाओ का नारा देते हैं भाजपाई उन्हें हवस का शिकार बनाते हैं।
#गोंडा जनपद का BJP जिलाध्यक्ष महिला के साथ सेक्स करते पकड़ा गया।
#हमीरपुर का BJP जिला अध्यक्ष जिला उपाध्यक्ष बनाने की शर्त सेक्स की डिमांड करते धरा गया।
#बलिया का जिलाध्यक्ष सेक्स किया।
महिलाएं BJP में सुरक्षित नहीं।
‘बेटी बचाओ’ का नारा देने वाली भाजपा से अब एक सीधा सवाल है—भाजपा में बेटियां और महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं?
बीजेपी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री देशवासियों को जबाब दें।
गोंडा में भाजपा जिलाध्यक्ष से जुड़ा आपत्तिजनक वीडियो सामने आया और पार्टी को कार्रवाई करनी पड़ी।
बलिया में भाजपा की महिला नेता ने जिलाध्यक्ष पर यौन शोषण और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
सवाल सिर्फ आरोपों का नहीं, सवाल उस राजनीतिक संस्कृति का है जिसमें महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर बार-बार सवाल खड़े हो रहे हैं।
भाजपा को भाषणों में ‘बेटी बचाओ’ 33% महिलाओं को आरक्षण दो कहने से आगे बढ़कर अपने संगठन में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और शिकायतों पर निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए, उन्हें सुचिता का पाठ क्यों नहीं RSS पढ़ाता?
बेटी बचाओ का नारा तभी सार्थक होगा, जब भाजपा/RSS के भीतर भी बेटियां सुरक्षित महसूस करें।
बाल बिखरे है उसके,
आँखों पर पारदर्शी चश्मा है
इस बीते भर की देह में वह क्रांति की ऐसी आग रखती है
कि हुक्मरानों को चैन से सोने नही देती
वह गलत को गलत कहती हैं
गुंडे को गुंडा और लंपट को लंपट
उसे देखकर लगता हैं भगत सिंह है वो,
सावित्री है वो
चलती फिरती क्रांति है वो
#NehaBora
आज की सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बिहार और बंगाल के चुनाव अवैध घोषित हो जाने चाहिए। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि फॉर्म 6 में किसी किस्म के संशोधन के लिए हमने कोई आदेश नहीं दिया था।
अब यह तेजस्वी @yadavtejashwi और ममता दीदी @MamataOfficial की जिम्मेदारी है कि तत्काल कोर्ट में चुनाव निल घोषित करने की याचिका दें।
मत भूलिए फॉर्म6 में लाखों नाम सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर काटे गए कि कोर्ट ने संशोधन की मंजूरी दे दी है।
साथ ही राहुल गांधी @RahulGandhi@yadavakhilesh समेत समूचे विपक्ष की जिम्मेदारी है कि चीफ जस्टिस सूर्यकांत के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लेकर आए कि इन व्यापक संशोधनों से वो कैसे अनभिज्ञ थे और मनमाने SIR की इजाजत दी।
वोट चोर ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ हल्ला बोल।
8 अक्टूबर को नेता प्रतिपक्ष श्री तेजस्वी यादव जी के नेतृत्व में पूरा बिहार पटना की सड़कों पर होगा। वोट चोरी के ख़िलाफ़ गवर्नर हाउस तक मार्च करेंगे।