यह देखिए exam fighters वाले को इसका काम है बच्चा लोग को पढ़ाना, ना की आंदोलन खड़ा करना, पुतला दहन करना, राजनीति करना।
इसका संचालक कुणाल प्रताप सिंह है जो झारखंड में हो रहे छात्रों के आंदोलन को हाईजैक करके अपने हिसाब से आंदोलन को चला रहा था और अभी भी चल रहा है।
क्रोनोलॉजी समझ सकते हैं कि इस कोचिंग माफिया ने किस तरह झारखंड के छात्रों को मूर्ख बनाया है। गंगा पार से आकर यहाँ चंदा उगाही का खेल किया है, और कुछ नहीं। छात्रों के हित की बातें सिर्फ दिखावा हैं; असली मकसद अपना स्वार्थ साधना ही लगता है।
#Exposejharkhandcoachingmafia
हमारी सफलता किसी की कृपा नहीं, हमारे संघर्ष, त्याग और ईमानदारी का परिणाम है।
मेहनती अभ्यर्थियों के सम्मान के साथ खिलवाड़ बंद करो #coachingmafia@JmmJharkhand@HemantSorenJMM
देखिए, एक गरीब परिवार से चयनित बच्चे और उसके परिवार का दर्द—जिसने वर्षों की मेहनत, संघर्ष और उम्मीदों के बाद यह मुकाम हासिल किया है। यह दर्द शायद उन लोगों को कभी समझ नहीं आएगा, जो अपने स्वार्थ में हजारों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।”
@HemantSorenJMM
कैमरे के सामने एक बुजुर्ग महिला (संजीत की माँ) चेहरे पर उम्र की लकीरें, लेकिन आंखों में आज भी उम्मीद। वहीं दूसरी ओर संजीत (ASO), जो अपने भविष्य और अपने अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
मैं आप लोगों से पूछना चाहता हूँ, क्या एक लड़का जिसके सिर से पिता का साया तक नहीं है। अपने परिवार को 10 वर्ष के उम्र से पाल रहा है, उसपर 35-40 लाख दे कर नौकरी पाना कितना सही कितना गलत।
अपनी राय कमेंट के जरिए साझा करें।
#exposejharkhandcoachingmafia
@HemantSorenJMM@Jhar_Voice@JharkhandCMO@JmmJharkhand@The_FollowUp@livelagata79748@ZeeBiharNews@aajtak@ndtv@ndtvindia@cnnbrk@BBCHindi
कैमरे के सामने एक बुजुर्ग महिला (संजीत की माँ) चेहरे पर उम्र की लकीरें, लेकिन आंखों में आज भी उम्मीद। वहीं दूसरी ओर संजीत (ASO), जो अपने भविष्य और अपने अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
मैं आप लोगों से पूछना चाहता हूँ, क्या एक लड़का जिसके सिर से पिता का साया तक नहीं है। अपने परिवार को 10 वर्ष के उम्र से पाल रहा है, उसपर 35-40 लाख दे कर नौकरी पाना कितना सही कितना गलत।
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जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET के छात्र अपने अधिकारों और न्याय के लिए धरना दे रहे थे, तब कुणाल प्रताप ने देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को टैग करके छात्रों का पिछवाड़ा लाल और हरा करने कहा था।
आज वही व्यक्ति झारखंड में युवाओं का शुभचिंतक बनने का ढोंग कर रहा है। सच्चाई यह है कि इनका कोई जनहित या छात्रहित से लेना-देना नहीं है।
इनका एकमात्र एजेंडा QR कोड से चंदा लेना, छात्रों के आंदोलन की आड़ लेकर हेमंत सरकार की लोकप्रिय छवि को धूमिल करना और राज्य के शासन-प्रशासन में बाधा उत्पन्न करना है।
जो इंसान कल तक छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने की वकालत क��� रहा था, वह आज झारखंड के युवाओं का हितैषी कैसे हो सकता है?
@HemantSorenJMM