चित भी मेरा, पट भी मेरा!
किताब भी यही बेचेंगे,
पढ़ाएंगे भी यही।
सेटिंग भी यही करेंगे,
सीट भी यही बेचेंगे।
रद्द भी यही करवाएंगे,
फिर आंदोलन में भी यही बैठेंगे।
कोर्ट भी यही दौड़ेंगे,
तस्वीरें भी यही खिंचवाएंगे,
जंतर-मंतर के आंदोलन को भी यही कोसेंगे।
मतलब खेल भी इनका, नियम भी इनके, फैसला भी इनका और फायदा भी इनका।
आप बस तैयार रहिए
भीड़ बनने के लिए। @JmmJharkhand@HemantSorenJMM
झारखण्ड में छात्रों का असली गुनाहगार कौन है असली गुनाहगार कोचिंग माफिया है जो वर्षों के कोर्स बेच कर बस जेब भरना चाहता है परीक्षा होने के बाद भी उसे कैंसिल कराना चाहता है ताकि फिर से कोर्स बेच कर अपनी जेबें भर सके। कोचिंग माफियाओ से विनम्र आग्रह है अपनी दुकान चलाने के लिए भोले भाले छात्रों का इस्तेमाल करना बंद करो।
#save_jharkhandi_students_from_coaching_mafia
#JSSC_CGL
#JPSC
#Jharkhand_protest
इस नौकरी को पाने के लिए ना जाने कितने अभ्यर्थियों ने बलिदान दिया सिर्फ इसीलिए ताकि वो अपने परिवारों के साथ रह सके । कुछ लोगों की गलती की सजा उन जैसे लोगों और अन्य बेकसूर विद्यार्थी क्यों भुगते । निर्दोष अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो।
#JSSC_CGL
झारखंड के भोले भाले छात्रों अब भी वक़्त है अपने आने वाले भविष्य को संवारना है तो ऐसे कोचिंग माफियाओं के राजनीतिक झांसे में न आएं, सही और गलत का पहचान करना सीखें.....
#jssccgl#jpsc
भाजपा नेताओं को छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करने की आदत छोड़ देनी चाहिए :
भाजपा नेताओं को छात्रों के मुद्दों की आड़ में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश बंद करनी चाहिए। जो लोग सत्ता में रहते हुए युवाओं और छात्रों के सवालों का समाधान नहीं कर पाए, वे आज छात्रों के पीछे खड़े होकर राजनीतिक ड्रामा कर रहे हैं। जबकि हकीकत अब पूरा देश जान चुका है कि माननीय मुख्यमंत्री ने छात्रों की सभी मांगों को मान लिया है, छात्र अपने घर लौट चुके हैं और 25 अगस्त को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में कई और महत्वपूर्ण निर्णय सरकार छात्र हित में लेने जा रही है।
भाजपा नेताओं की राजनीति अब इतनी कमजोर हो चुकी है कि उन्हें अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए छात्रों को आगे करना पड़ रहा है। छात्र-युवा पढ़ाई, रोजगार और अपने भविष्य को लेकर संघर्ष करें, यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनके आंदोलनों को राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना भाजपा की पुरानी कार्यशैली रही है।
भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी बताएं कि यदि उन्हें वास्तव में छात्रों की चिंता है तो वे छात्रों के बीच जाकर उनके मुद्दों पर सकारात्मक संवाद क्यों नहीं करते? हर प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक दमन बताकर माहौल गरमाना और फिर थाने पहुंचकर राजनीतिक प्रदर्शन करना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करना है।
कानून अपना काम करेगा और किसी भी मामले में पुलिस को कानून के दायरे में ही कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन किसी व्यक्ति पर कार्रवाई को लेकर बिना पूरी जानकारी के पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाना और उसे राजनीतिक रंग देना जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं है। भाजपा को कानून और लोकतंत्र की दुहाई देने से पहले अपने राजनीतिक आचरण का आईना देखना चाहिए।
भाजपा नेता लगातार ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे छात्रों और युवाओं के बीच भ्रम और टकराव की स्थिति पैदा हो। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर कानून हाथ में लेने या राजनीतिक उकसावे की राजनीति को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
भाजपा की परेशानी यह है कि झारखंड की जनता ने उसकी राजनीति को नकार दिया है। अब कभी छात्रों के नाम पर, कभी युवाओं के नाम पर और कभी कानून-व्यवस्था के नाम पर भाजपा अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रही है। जनता सब देख रही है और समझ रही है कि कौन छात्रों के भविष्य की चिंता कर रहा है और कौन उनके मुद्दों को अपनी राजनीति का ईंधन बना रहा है।
बाबूलाल मरांडी से सवाल है?.. कि यदि भाजपा को सचमुच छात्रों की इतनी चिंता है तो वह यह बताए कि केंद्र की भाजपा सरकार के कार्यकाल में युवाओं के रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवालों पर उसने क्या ठोस कदम उठाए? सिर्फ थाने में दो घंटे बैठ जाने से छात्र हितैषी होने का प्रमाणपत्र नहीं मिल जाता।
झामुमो छात्रों और युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करता है, लेकिन किसी भी आंदोलन को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश का विरोध करेगा। भाजपा नेताओं को सलाह है कि छात्रों को आगे करके अपनी राजनीति चमकाने के बजाय खुद मैदान में उतरें और जनता के सवालों का सामना करें।
भाजपा नेताओं को यह समझ लेना चाहिए कि छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर झामुमो से राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। जनता के बीच जाकर लड़ना है तो भाजपा नेता खुद मैदान में उतरें।
@JmmJharkhand
नमक हलाल फिल्म का एक गाना था- “राम नाम जपना, पराया माल अपना।”
बस इसी से इनकी पूरी क्रोनोलॉजी समझिए। मिलकर छात्रों को बेवकूफ बनाना, उनके आंदोलन की आड़ में अपनी राजनीति चमकाना और फिर सत्ता की मलाई चाटना-यही इनका असली खेल है।
@HemantSorenJMM@JmmJharkhand