झारखण्ड में छात्रों का इस्तेमाल कर के अपनी राजनीतिक रोटी सेकने वाले कुछ कोचिंग माफियाओं को दिल्ली में बैठे छात्र छात्र नहीं लगते थे और उनके खिलाफ कैसी अभद्र भाषा का प्रयोग किया जा रहा था देखिए इनकी यही सच्चाई है अपने फायदे के लिए भोले भाले झारखंडी युवाओं की बलि देना।
#Save_jharkhand_students_from_coaching_mafia
@khurpenchh@KhurpenchhKaTau@JmmJharkhand@BJP4Jharkhand@JMMKalpanaSoren@ShahiPratap
इनकी दोगलापंती ऐसा है एक डंडा पड़ते ही अघोषित आपातकाल का नाम दे देते हैं।
वहीं इनके भाजपा शासित राज्य में थर्ड डिग्री मार भी दे तो मुंह नहीं खुलती।
राज्य में छात्रों हितों को ध्यान में रखते हुवे सरकार बाध्य है पर भाजपा और इनके कोचिंग माफिया के इशारों पर भोले भाले छात्रों से फंडिंग लेकर बरगला रहे हैं!
छात्रों को सही दिशा दिखाने की जगह रोड पर उतरवा रहे हैं छात्रों की भविष्य से इन्हें कोई लेना देना नहीं?
राज्य के छात्रों से अपील है कृपया आप सभी छात्रों इनकी आंदोलन से छात्रों दूर रहे मौसम बिगड़ने वाली है।
छात्रों को सरकार से मिलकर मुद्दों पर बात रखनी चाहिए!
राज्यहित सर्वोपरि भाजपा राज्य को जला जरूर सकती है ठीक नहीं कर सकती सरकार ही शांत कर सकती है।
और सरकार के पास ही सभी बीमारियों का इलाज है इसलिए संघी भाजपा के इशारों पर ना चलें भीड़ का हिस्सा बनने से खुद को बचाएं!
@HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren@JmmJharkhand
#ExposeJharkhandCoachingMafia केवल कुनाल प्रताप ही है। छात्रों का हितेशी, न ही शिक्षक है, न स्टूडेंट है ये बीजेपी का एजेंट है। केवल इसे राजनीति करनी है। छात्र पढ़े या भाड़ में जाय कोई मतलब ही नहीं है।
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।
भ्रम, अफवाह और दबाव की राजनीति नहीं—सच्चाई सामने आए।
सरकार कार्रवाई करे, मेहनती और निर्दोष छात्रों का भविष्य सुरक्षित करे।
@HemantSorenJMM@JmmJharkhand@dalchand86
माननीय हाइकोर्ट का निर्णय के बाद राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM ही क्यों निशाने पर?
पुतला जलाने वाले हाइकोर्ट से भी पूछे छात्रों के साथ ऐसा भेदभाव क्यों?
सरकार ने तो पूरी पहल की थी मगर हाइकोर्ट ने छात्रों के हितों को दरकिनार क्यों किया?
है किसी में हिम्मत जज का पुतला जला पाए?
भाजपा की केंद्र सरकार राज्य की अधिकार खनन बिल विधेयक पास कर राज्य को कमजोर करना चाहती है राज्य के अधिकारों को छीन रही है छात्रों को टारगेट कर सिर्फ अपना राजनीति सेंकना चाह रही है ताकि राज्य का विकास रुके बाहरी मलालाल हो।
@JMMKalpanaSoren@JmmJharkhand
भावनाओं में नहीं, तथ्यों में विश्वास करें।
नारे से पहले सच्चाई को जानें।
और यदि आंदोलन आपके हित के बजाय किसी और के हित में है—तो उससे बाहर निकलने का साहस रखे|
“झारखंड में कोचिंग माफिया पर सख्त कार्रवाई हो। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली किसी भी व्यवस्था को समाप्त किया जाए और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।”
इसी कोचिंग माफिया—उफ़्फ़, भाजपा के दलाल—के पुराने ट्वीट देख लीजिए, यार। इन्हीं के बयानों से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि आज जो खुद को झारखंड का मसीहा बनाकर घूम रहा है, वही कभी जंतर-मंतर के प्रदर्शन को लेकर क्या-क्या कहता था l
#Exposejharkhandcoachingmafia
इन चयनित अभ्यर्थियों के साथ सिर्फ एक परीक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि उनके माता-पिता की उम्मीदें और पूरे परिवार के सपने जुड़े हैं। उनके भविष्य को अधर में न छोड़ा जाए
#ExposeJharkhandCoachingMafia
कोचिंग माफिया भोले भाले छात्रों के साथ खेल रहा है। जबकि सरकार उनकी सारी बाते मान ली थी। ये सभी स्टूडेंट्स को समझा चाहिए ........
भाजपा नेताओं को छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करने की आदत छोड़ देनी चाहिए :
भाजपा नेताओं को छात्रों के मुद्दों की आड़ में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश बंद करनी चाहिए। जो लोग सत्ता में रहते हुए युवाओं और छात्रों के सवालों का समाधान नहीं कर पाए, वे आज छात्रों के पीछे खड़े होकर राजनीतिक ड्रामा कर रहे हैं। जबकि हकीकत अब पूरा देश जान चुका है कि माननीय मुख्यमंत्री ने छात्रों की सभी मांगों को मान लिया है, छात्र अपने घर लौट चुके हैं और 25 अगस्त को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में कई और महत्वपूर्ण निर्णय सरकार छात्र हित में लेने जा रही है।
भाजपा नेताओं की राजनीति अब इतनी कमजोर हो चुकी है कि उन्हें अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए छात्रों को आगे करना पड़ रहा है। छात्र-युवा पढ़ाई, रोजगार और अपने भविष्य को लेकर संघर्ष करें, यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनके आंदोलनों को राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना भाजपा की पुरानी कार्यशैली रही है।
भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी बताएं कि यदि उन्हें वास्तव में छात्रों की चिंता है तो वे छात्रों के बीच जाकर उनके मुद्दों पर सकारात्मक संवाद क्यों नहीं करते? हर प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक दमन बताकर माहौल गरमाना और फिर थाने पहुंचकर राजनीतिक प्रदर्शन करना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करना है।
कानून अपना काम करेगा और किसी भी मामले में पुलिस को कानून के दायरे में ही कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन किसी व्यक्ति पर कार्रवाई को लेकर बिना पूरी जानकारी के पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाना और उसे राजनीतिक रंग देना जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं है। भाजपा को कानून और लोकतंत्र की दुहाई देने से पहले अपने राजनीतिक आचरण का आईना देखना चाहिए।
भाजपा नेता लगातार ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे छात्रों और युवाओं के बीच भ्रम और टकराव की स्थिति पैदा हो। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर कानून हाथ में लेने या राजनीतिक उकसावे की राजनीति को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
भाजपा की परेशानी यह है कि झारखंड की जनता ने उसकी राजनीति को नकार दिया है। अब कभी छात्रों के नाम पर, कभी युवाओं के नाम पर और कभी कानून-व्यवस्था के नाम पर भाजपा अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रही है। जनता सब देख रही है और समझ रही है कि कौन छात्रों के भविष्य की चिंता कर रहा है और कौन उनके मुद्दों को अपनी राजनीति का ईंधन बना रहा है।
बाबूलाल मरांडी से सवाल है?.. कि यदि भाजपा को सचमुच छात्रों की इतनी चिंता है तो वह यह बताए कि केंद्र की भाजपा सरकार के कार्यकाल में युवाओं के रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवालों पर उसने क्या ठोस कदम उठाए? सिर्फ थाने में दो घंटे बैठ जाने से छात्र हितैषी होने का प्रमाणपत्र नहीं मिल जाता।
झामुमो छात्रों और युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करता है, लेकिन किसी भी आंदोलन को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश का विरोध करेगा। भाजपा नेताओं को सलाह है कि छात्रों को आगे करके अपनी राजनीति चमकाने के बजाय खुद मैदान में उतरें और जनता के सवालों का सामना करें।
भाजपा नेताओं को यह समझ लेना चाहिए कि छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर झामुमो से राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। जनता के बीच जाकर लड़ना है तो भाजपा नेता खुद मैदान में उतरें।
@JmmJharkhand
कुणाल प्रताप कभी खुद को छात्र बताते हैं, कभी शिक्षक!
आखिर असली पहचान क्या है? 🤔
NEET पेपर लीक के खिलाफ आंदोलनरत छात्रों के लिए जिस तरह की अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया, वह बेहद शर्मनाक है।
रंगा सियार चाहे जितने रंग बदले, असलियत छिप नहीं सकती।