@madanrrathore माननीय मदन जी राठौर साहब राजमेस सोसायटी जयपुर में 8 सालों से लगें UTB कार्मिकों की आपकी सरकार में बिल्कुल भी सुनवाई नहीं हो रही हम सभी UTB कर्मचारी भारतीय जनता पार्टी के वोटर हैं इस सरकार में भी सुनवाई नहीं हो रही तो हम कहां जाएं ना ही आप सुनवाई करते हो ना ही आपके मंत्री जी
आज कोटा में NEET री-एग्जाम के बीच मानवता की एक खूबसूरत मिसाल
आज NEET री-एग्जाम के दौरान भीमगंज थाना क्षेत्र के आसपास बने परीक्षा केंद्रों पर बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को छोड़ने आए थे। परीक्षा, रिपोर्टिंग और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया के कारण कई अभिभावकों को 4-5 घंटे तक बाहर इंतजार करना पड़ रहा था।
ऐसे समय में गिरिराज खंडेलवाल जी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शिखा खंडेलवाल ने अपने घर के दरवाजे अभिभावकों के लिए खोल दिए। बैठने की व्यवस्था की, बारिश से बचने के लिए आश्रय दिया और अपने घर के वॉशरूम तक सभी के लिए उपलब्ध करवा दिए। महिलाओं, बुजुर्गों और दूर-दराज़ से आए अभिभावकों के लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं था।
लेकिन इस कहानी के असली नायक केवल गिरिराज जी और शिखा जी ही नहीं हैं। धीरे-धीरे पूरा मोहल्ला इस सेवा कार्य में शामिल हो गया। किसी ने चाय की व्यवस्था की, किसी ने कचौरी मंगवाई, किसी ने लस्सी का इंतजाम किया। जो भी बन पड़ा, लोगों ने मिलकर किया ताकि बाहर इंतजार कर रहे अभिभावकों को थोड़ी राहत मिल सके।
आज जब हम अक्सर समाज में संवेदनशीलता की कमी की बातें करते हैं, तब कोटा के इस छोटे से मोहल्ले ने दिखा दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है। बिना किसी प्रचार, बिना किसी स्वार्थ और बिना किसी अपेक्षा के अनजान लोगों के लिए अपने घर, अपना समय और अपने संसाधन खोल देना वास्तव में मानवता का सबसे सुंदर रूप है।
इतना ही नहीं, परीक्षा के नियमों के कारण कुछ विद्यार्थियों को अपने आभूषण बाहर उतारने पड़े। एक छात्रा ने अपने कुंडल भी इनके पास सुरक्षित रखे और निश्चिंत होकर परीक्षा देने चली गई। यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि विश्वास का भी प्रतीक है।
मैं संयोगवश वहाँ एक विद्यार्थी को छोड़ने गया था। गिरिराज जी मेरे कॉलेज के सीनियर भी हैं। वहाँ का माहौल देखकर लगा कि कोटा की पहचान केवल कोचिंग संस्थानों, परीक्षाओं और परिणामों से नहीं है। कोटा की असली पहचान ऐसे लोग हैं, जो जरूरत पड़ने पर अजनबियों को भी अपना बना लेते हैं।
🙏 ऐसे ही लोगों की वजह से समाज में भरोसा और इंसानियत कायम है।
(कोटा के निलेश गुप्ता जी की फेसबुक पोस्ट)
वायरल होने की भूख। बच्चे की सुरक्षा से बड़ा कोई कंटेंट नहीं हो सकता। लाइक्स और व्यूज़ फिर मिल जाएंगे, लेकिन हादसा हो गया तो पछताने का मौका भी नहीं मिलेगा।
पांच महिलाओं की मौत हो गई, परिवार उजड़ गए, लेकिन मंत्री जी को संवेदना नहीं, व्यंग्य सूझ रहा है।
अगर यही जवाबदेही है, तो फिर लापरवाही और निर्दयता में फर्क ही क्या रह गया?
जनता इलाज मांग रही है, सत्ता मज़ाक सुना रही है।
संविदा प्रथा और ठेका प्रथा जैसे मीठे जहर की शुरुआत और विस्तार:
राजस्थान के सरकारी विभागों में संविदा और ठेका प्रथा शुरू करने का मुख्य श्रेय 2008 में @ashokgehlot51 अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को जाता है。
वसुंधरा Vasundhaराजे सरकार @VasundharaBJP (भाजपा):वसुंधरा राजे के कार्यकाल (2003-2008 और 2013-2018) में सरकारी विभागों में कर्मचारियों की सीधी भर्ती (Regular Recruitment) पर काफी हद तक रोक लगा दी गई थी। काम चलाने के लिए प्लेसमेंट एजेंसियों और निजी ठेकेदारों के माध्यम से भर्तियां करने की नीति को व्यापक रूप से बढ़ावा दिया गया।
अब इन कर्मचारियों को न्याय कौन देगा....? @BhajanlalBjp परसो ही एक संविदा कर्मचारी दीपक भाई ने सुसाइड किया इस तंत्र से आहत होकर।।
चिकित्सा विभाग को संविदा निविदा प्रथा पर रखना कहा तक उचित है जवाब देवे..? @CJP_for_India@hanumanbeniwal@SUMANJAAT1234@RajCMO@KumariDiya@WHO@nhm_rajasthan@ShikshaNewsRaj1
जनता अब भाजपा के झांसे में आना बंद कर रही है। पूरा प्रदेश बिजली पानी की कमी से जूझ रहा है और मंत्रियों को जश्न मनाने की लगी हुई है लेकिन टोंक में जब ऊर्जा मंत्री श्री हीरालाल नागर से बिजली कटौती, पेयजल संकट पर मीडिया ने सवाल पूछे तो मंत्री जी से जवाब देते नहीं बना और खिसियाकर हाथ जोड़ दिए। कब तक भाजपा जिम्मेदारी से भागेगी ? ढाई साल बाद तो जनता के सामने पेश होना ही पड़ेगा।
🙏 हार्दिक आभार एवं धन्यवाद 🙏
राजस्थान के सबसे बड़े समाचार चैनल @News18Rajasthan के वरिष्ठ एवं लोकप्रिय एंकर श्री @hemantkumarnews जी का राजस्थान नर्सिंग ऑफिसर यूनियन की ओर से हार्दिक आभार एवं धन्यवाद।
आपके द्वारा संविदा, निविदा एवं आउटसोर्स नर्सिंग कर्मियों की वर्षों पुरानी जायज मांगों को अपनी डिबेट एवं समाचार माध्यम से प्रमुखता के साथ उठाकर सरकार एवं प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का सराहनीय कार्य किया गया है।
प्रदेश के हजारों नर्सिंग कर्मियों की पीड़ा, संघर्ष एवं नियमितीकरण की मांग को जिस निष्पक्षता, संवेदनशीलता एवं मजबूती के साथ आपने अपने मंच पर स्थान दिया है, उसके लिए समस्त नर्सिंग समुदाय आपका ऋणी रहेगा।
हमें पूर्ण विश्वास है कि आपकी सकारात्मक पत्रकारिता एवं जनहित के मुद्दों को उठाने की प्रतिबद्धता भविष्य में भी प्रदेश के लाखों स्वास्थ्यकर्मियों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
एक बार पुनः राजस्थान नर्सिंग ऑफिसर यूनियन की ओर से आपका हृदय की गहराइयों से हार्दिक आभार एवं धन्यवाद।
प्रदीप चौधरी
प्रदेशाध्यक्ष
राजस्थान नर्सिंग ऑफिसर यूनियन
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@ashokgehlot51 संविदा का बीज आपने ही बोया था राजस्थान में। अब केवल राजनीति कर रहे हो। तुम्हारी भी सरकार थी आपने भी बहुत तानाशाही की। दीपक के असली गुनहगार आप ही हो पूर्व मुख्यमंत्री जी।
जोधपुर में सांसद के केंद्रीय मंत्री होने तथा जिले से ही राज्य के कानून मंत्री होने के बावजूद भाजपा सरकार जनता के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। चरमराई बिजली-पानी व्यवस्था से आमजन त्रस्त और विकट विपदा में है, लेकिन सरकार उनकी आवाज दबाने के लिए शहर में धारा 163 (पुरानी 144) लगाकर अभिव्यक्ति की आजादी छीन रही है।
अखबारों में सुचारू पेयजल के झूठे दावे हो रहे हैं, जिससे जनता में भारी आक्रोश है। इस आक्रोश को दबाने के लिए अंदरखाने पुलिस का पहरा लगाया जा रहा है। राजीव गांधी लिफ्ट परियोजना फेज-3 में ₹1400 करोड़ में से ₹1200 करोड़ के भुगतान के बाद भी काम ठप पड़ा है। मार्च 2025 में पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार, रूट बदलने और फॉरेस्ट क्लीयरेंस के नाम पर उलझाकर मार्च 2027 तक के लिए संशय में डाल दिया गया है।
सरकार बिजली और पानी तक नहीं दे पा रही है- जनता पूछ रही है कि सरकारी खजाना खाली है या भ्रष्टाचार में लिप्त भाजपा के लोग अपने घर भरने में व्यस्त हैं? भाजपा सरकार यह दमनकारी नीतियां तुरंत बंद करे और जनता को राहत दे।
न्याय योद्धा...
लोकतंत्र में एक मजबूत और प्रभावी विपक्ष का होना उतना ही आवश्यक है जितनी एक सशक्त सरकार। वर्तमान परिस्थितियों में हनुमान बेनीवाल कांग्रेस की तुलना में अधिक मुखर और सक्रिय विपक्ष की भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं, जबकि राजस्थान विधानसभा में उनकी पार्टी का एक भी विधायक नहीं है।
जनहित और न्याय के मुद्दों पर लगातार संघर्ष करने वाले इस योद्धा के निजी राजनीतिक जीवन के साथ क्या जनता न्याय करेगी?
इसका फैसला अंततः लोकतांत्रिक जनमत ही करेगा।
पन्ना के सरकारी अस्पताल में मरीज़ तड़पता रहा और व्यवस्था तमाशा देखती रही।
3 घंटे तक इलाज नहीं मिला और एक ज़िंदगी खत्म हो गई।
मुख्यमंत्री जी,
अगर अस्पतालों में समय पर इलाज नहीं मिल सकता,
तो फिर आपकी स्वास्थ्य क्रांति सिर्फ़ पोस्टरों तक ही सीमित है क्या?
ग़रीब की जान इतनी सस्ती क्यों है?
एक झटके में गई 6,500 नौकरियां, राजस्थान में नर्सिंगकर्मियों का प्रदर्शन, एक ने दी जान | @sharatjpr
राजस्थान में एक झटके में करीब 6,500 संविदा नर्सिंगकर्मियों को नौकरी से हटाए जाने के बाद हड़कंप मच गया है. इस फैसले के बाद जयपुर के महिला चिकित्सालय में कार्यरत 30 वर्षीय नर्सिंगकर्मी दीपक ने जहर खाकर अपनी जान दे दी.
पूरी ख़बर: https://t.co/kDSXf10Z2w
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जयपुर के महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट में संविदा पर कार्यरत नर्सिंगकर्मी श्री दीपक खारवाल ने नौकरी समाप्त होने से उत्पन्न मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या कर ली। संविदा पर नियुक्त नर्सिंग कर्मचारियों को हटाने के राज्य सरकार के फैसले से पहले ही व्यापक रोष व्याप्त था और अब इस दुःखद घटना के कारण पूरे राज्य के संविदा पर कार्यरत नर्सिंगकर्मियों में आक्रोश और असंतोष व्याप्त है। इस घटना ने प्रदेश सरकार का असंवेदनशील रवैया पुनः उजागर किया है।
सरकार शोकाकुल परिजनों की मांगों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुने। साथ ही, संविदा पर कार्यरत नर्सिंगकर्मियों की मांगों और समस्याओं पर पुनर्विचार करना चाहिए।
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