इसे कहते है क्रूरता की पराकाष्ठा। सरकार में हिम्मत नहीं कि सहायक अध्यापकों जिन्हें 70000 से 80000 वेतन मिलता है उन्हें जून में बुलाकर समर कैंप आयोजित करवा सकें।
इसीलिए उन्होंने प्राइमरी में नियुक्त शिक्षामित्र जिन्हें 10000 की भीख और उच्च प्राथमिक विद्यालय में नियुक्त अनुदेशकों जिन्हें सिर्फ 9000 मानदेय मिलता है।
उन्हें सरकार जून में मात्र 6000 की भीख देकर समर कैंप आयोजित करवाना चाह रही है।
यदि पारिश्रमिक देना ही था तो पूरा मानदेय ही सरकार दे देती। @myogiadityanath@basicshiksha_up@thisissanjubjp
श्री @myogiadityanath जी स्पष्ट शब्दों में आ करके बताएं कि 25000 अनुदेशक उ.प्र. के नागरिक नहीं है जब इलाहाबाद हाईकोर्ट के डबल बेंच ने आदेश दिया कि अनुदेशक को 17000 रुपए 9% ब्याज सहित भुगतान किया जाए तो सरकार आखिर क्यों कई सुप्रीम कोर्ट आज 69000 शिक्षक भर्ती में सरकार कोर्ट की बात
आज जिस तरह से अनुदेशक, शिक्षामित्रों के साथ एक संयुक्त कैमिस्ट्री संगठनों की बन रही है उससे लग रहा है अब सार्थक परिणाम निकलेंगे। आप समझिए 9 माह से यही बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी कमेटी और प्रस्ताव का फर्जी खेल खेलते रहे जबकि बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को अनुदेशकों के बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी।
अब आप सोचिए शिक्षा निदेशक हर बार सरकार के मांग पत्र भेजने की बात करती रही जबकि मांगपत्र तो विभाग के प्रमुख सचिव तक को नहीं भेजा गया क्योंकि उनको मालूम है इन शिक्षामित्र अनुदेशकों के बीसियों संगठन है किसी को कुछ बता दो किसी को कुछ बता दो आपस में बहस करते रहेंगे हमें कोई कागज तैयार करने की जरूरत नहीं है।
ठीक वैसे ही जैसे अभी ऑनलाइन हाजिरी पर शिक्षक संगठनों के साथ खेल खेला धरना रोकने के लिए।
इस लिहाज से अनुदेशक और शिक्षामित्रों को खुद भी सोचना पड़ेगा कि आखिर नियमित होने के लिए संघर्ष करना बेहद जरूरी है और कुछ संगठनों को साथ लेना पड़ेगा जो सीधे अधिकारियों से बातचीत करने का मादा रखते हो।
बातचीत का दायरा कृपा पर आधारित न हो किसी से फोन कराके मिलने से न्याय नहीं मिलता है।
पड़ोसी के घर में भगत सिंह पैदा करके स्वतंत्रता नहीं मिलती है अपमान होता है। अपने घर में भगत सिंह पैदा करना पड़ेगा तभी न्याय मिलेगाअन्यथा इसी तरह समय निकलता रहेगा। आज आपको जागरूक होकर शिक्षामित्र अनुदेशक का साथ दें अनुदेशक शिक्षामित्रों का साथ दें ज्यादा संगठन अगर एक होंगे तो मामला जल्द से जल्द सुलझ जाएगा।
अनुदेशक महोदय आपकी योग्यता आपके शब्दों में झलक रही है।।
आप 17000 की मांग कर रही हैं किंतु आप 9000 पाने के लायक भी नहीं है।।
आपको योगी सरकार का शुक्रगुजार होना चाहिए की जो आपको₹9000 ही दे रही है।।
उत्तर प्रदेश की बेटियां रो रही है
प्रदेश के अनुदेशक रो रहे हैं
उत्तर प्रदेश के #शिक्षक_अनुदेशिकाएं अपने मांगों को लेकर के राजधानी में धरना दे रही हैं सरकार उनके साथ वादा खिलाफी कर रही है #नियमितिकरण के वादे को सरकार ध्यान नहीं दे रही है सरकार को अनुदेशक को नियमित कर देना चाहिए
लखनऊ में बेसिक शिक्षा निदेशालय पर शिक्षक अनुदेशकों का प्रदर्शन जारी है. भाजपा सरकार ने इनको भी नियमित करने और वेतन बढ़ाने के नाम पर ठगा है.
भाजपा की केंद्र और प्रदेश दोनों सरकारों ने हर वर्ग को केवल निराश किया है. जनता के विकास के मुद्दे से जुड़ा इनका हर वादा केवल छलावा साबित हुआ है और कुछ नहीं.