Product of Teacher Parents.
Poet&Political,Social,Cultural Critic Writer,Activist&Nature Saverसत्ता उन्हें मिले जो देश की तस्वीर व तासीर राष्ट्र हित में बदलें🙏
@PMOIndia@narendramodi@AmitShah जाति आधारित आरक्षण नहीं चाहिए |मैं मानता हूँ कि आपकी राजनीतिक मज़बूरी है पर हमें उम्मीद भी तो आपसे ही है.. बाकी सब तो सवर्णों को मिटाने और नीचा दिखाने के लिए ही हैँ उन्हें तो बस भीम और मीम से मतलब है 🙏
@Bsp4u मायावती जी अगर करोड़पति लोग भी जिनकी तीन तीन पीढ़ियां सरकारी नौकरी कर रही हैँ अगर वें अभी भी बराबर नहीं हुए तो फिर कब होंगे? आरक्षण का आधार आर्थिक होना अब बहुत ज़रूरी है वर्ना तो देश में बहुत बड़ा संघर्ष होगा जो किसि के लिए भी हितकारी नहीं होगा
@abhaithegr8 UPAVP, गौर, व सरकारी तंत्र सभी दश हज़ार आम नागरिकों के स्वास्थ्य से खेल रहें है। क्या शुद्ध पेयजल हमारा मूलभूत अधिकार नहीं है? लेकीन दुर्भाग्य है कि सरकार इसपर मौन है। सरकार जनता बनाती और बदलती भी है, सायद ये इन्हें एहसास नहीं है। @dm_ghaziabad@UPCMOffice#NoGangaWaterNoVote
@harishrawatcmuk@RahulGandhi इस उतिये के पास जादू कि छड़ी है जो महिलाओं कि सब समस्याओं का समाधान कर देगी और वो छड़ी इसे सीधे भगवान से मिलि है... क्या पाजी आदमी है बेफिजूल जी बातें करता है... अबे साले इससे पहले क्यों नहीं किया जब तुम सत्ता में थे....
गंगा जल नहीं तो वोट नहीं
#NoGangaWaterNoVote
गाजियाबाद के सिद्धार्थ विहार की गौर सिद्धार्थम सोसायटी पीने के पानी के लिए तरस रही है । गौर सिद्धार्थम सोसायटी को गंगा जल नहीं मिल रहा है और आवास विकास की दलील है कि गौर बिल्डर के साथ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चल रहा है, इसलिए हम सोसायटी को गंगा जल नहीं देंगे। मुकदमा आवास विकास और गौर बिल्डर के बीच वित्तीय विवाद का है, और आवास विकास की हठ है कि जब तक गौर बिल्डर कथित देनदारी चुकाता नहीं, वो गौर सिद्धार्थम निवासियों को पेयजल नहीं देगा । मूल प्रश्न तो ये है कि मुकदमा कथित देनदारी का है, तो इसकी आड़ में पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता को कैसे इनकार किया जा सकता है? संविधान प्रदत्त जीवन का अधिकार कैसे छीना जा सकता है? हैरानी की बात है कि आवास विकास इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपना केस हार चुका है, और सुप्रीम कोर्ट का नाम लेकर पेयजल नहीं दे रहा है। अगर ये पोस्ट माननीय सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश तक पहुंच रही हो तो कृपया इसका संज्ञान लें कि देश की सर्वोच्च न्यायिक व्यवस्था की आड़ लेकर नागरिकों के साथ कैसा छल हो रहा है ?
गौर सिद्धार्थम निवासी शुद्ध पेयजल के संबंध में अनेकों बार सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने से लेकर प्रशासन के सभी संबद्ध अंगों तक अपनी समस्या पहुंचा चुके हैं, परंतु उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। इस संबंध में स्थानीय विधायक के साथ मुलाकातें, डीएम के साथ बैठकें हो गई हैं, परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई ।
आज गौर सिद्धार्थम के कुछ निवासी बैनर समेत अपनी मांगों पर पुन: ज्ञापन देने हुए स्थानीय विधायक संजीव शर्मा के आवास पर गए । वो वहां मिले नहीं। परंतु विधायक संजीव शर्मा ने अपने आवास पर पहुंचे गौर सिद्धार्थम के एक व्यक्ति से फोन पर कहा कि आपको पानी चाहिए तो मुकदमेबाजी कीजिए। गौर सिद्धार्थम निवासियों को स्थानीय विधायक से ऐसे संवेदनहीन उत्तर की आशा नहीं थी। निश्चित तौर पर माननीय कोर्ट्स का दरवाजा खटखटाने और शांतिपूर्ण विरोध, और धरना देने समेत हर एक विकल्प गौर सिद्धार्थम निवासियों के पास है, परंतु स्थानीय प्रतिनिधित्व किस बात का है ?
कुछ महीने पहले डीएम गाजियाबाद, आवास विकास के प्रतिनिधियों और विधायक संजीव शर्मा की उपस्थिति में डीएम कार्यालय में गौर सिद्धार्थम के कुछ निवासियों की गंगा जल के संबंध में वार्ता हुई थी। उस बातचीत में आवास विकास के प्रतिनिधि ने हठ दिखाते हुए कहा कि गौर सिद्धार्थम सोसायटी अवैध है, और अगर गौर ने पैसा नहीं दिया तो सिद्धार्थम के निवासी ही पैसा भरेंगे । विवाद आवास विकास और गौर बिल्डर का है, तो निवासी क्यों भरपाई करेंगे ? गौर सिद्धार्थम सोसायटी RERA APPROVED है, SBI द्वारा प्रोजेक्ट Funded है, सोसायटी के निवासियों ने अपने-अपने फ्लैट की रजिस्ट्री करायी है, म्यूनिसिपल टैक्स आता है, सोसायटी में सरकारी बिजली है, IGL कनेक्शन है, और तो और सोसायटी के पते पर ही वोटिंग सेंटर है, ऐसी सोसायटी अवैध कैसे कही जा सकती है ? और सोसायटी का स्टेटस कैसा भी हो Right to Life (Article 21) गौर सिद्धार्थम निवासियों से कैसे छीना जा सकता है ?
गाजियाबाद के सांसद और विधायक दोनों बीजेपी के हैं। यहां बीजेपी लगातार जीतती रही है। माना जा सकता है कि आज गौर सिद्धार्थम के जो लोग पानी नहीं तो वोट नहीं देने की बात कर रहे हैं, उनमें से अधिकतर बीजेपी के वोटर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी तक अगर ये बात पहुंच रही हो तो उन्हें संज्ञान लेना चाहिए कि उनके समर्थकों में निराशा है, और वोट की चोट उन्हें अगले कुछ महीनों में ही मिल सकती है। सनद रहे कि गौर सिद्धार्थम सोसायटी में करीब 2400 फ्लैट्स हैं और रहवासियों की संख्या तकरीबन 10 हजार है। इतने लोगों को ना तो आप मार सकते हैं और ना ही नजरअंदाज कर सकते हैं। यहां ये भी बता दूं कि #NoGangaWaterNoVote की इस मुहिम में बीजेपी विरोधियों के लिए एक आकर्षक प्रस्ताव भी है। अगर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, BSP या कोई अन्य दल पानी दिलाने के लिए गौर सिद्धार्थम के संघर्ष में साथ जुड़ता है, और पानी दिलाता है, तो वोट उसको दिया जाएगा ।
PS: जहरीले पानी से स्वास्थ्य समस्याएं घिर आई हैं और ये पानी कितना खतरनाक है, इसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की संलग्न रिपोर्ट में है।
@narendramodi@NitinNabin@myogiadityanath@RahulGandhi@yadavakhilesh@sanjivsharmabjp@AtulGargBJP@dollysharmaINC@dm_ghaziabad@ECISVEEP@indSupremeCourt@shalabhmani@MrityunjayUP@sanjaychapps1@mppchaudhary@brajeshpathakup@kpmaurya1@swatantrabjp@uphousingboard
@sanjivsharmabjp@dm_ghaziabad@CMOfficeUP@myogiadityanath महोदय हम अपनी सोसाइटी में गंगाजल कि आपूर्ति कि मांग को लेकर आपके निवास पर बैठे हैँ ताकि आपको याद दिला सकें कि 3 माह पूर्व जिलाधीश महोदय के समक्ष जो वादा हुआ था उसका क्या हुआ |
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh we should snatch all multimedia mobile phones from all security personells because on duty time they are busy in watchin reels. For connectivity give them QUERT phones...
@TheIncNews जल्द ही तेरा भी पार्टी से सूपड़ा साफ होगा जितनी बदनामी लिखवानी हैँ अपने नाम लिखवा ले उसके बाद तो तुझे खुद भी अपनी शक्ल अक्ल देखने पर घिन्न होगी |ये परिवार किसि का नहीं अपना काम निकलवाएंगे फिर तुझे भी बाकी की तरह गटर में फेंक देंगें
@amitmalviya दिपके पहले अपने माँ बाप दादा दाडी सबको जूते मारकर घर से दफा कर ऐसा करते हुए उनके विडिओ SM पर डाल पहले हम देखेंगे फिर हम राजनीति से सब बूढ़े लोगों को दफा करने में आपकी मदद करेंगे