किसी ने कहा
प्रेम कविताएं
डिस्क्लेमर मांगती हैं
पर, न बताऊं तो!
है न!...@Tweetmukesh की कविताओं में प्रेम और समय को पहचानना है तो @hindyugm से प्रकाशित संग्रह '...है न!' को पढ़ें. @sahitya_tak के #bookcafe के #ekdinekkitab में @jai_shiven की राय. https://t.co/xqJUCTz63F
कबूतर
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आओ लड़ें
धर्म के मुद्दे गरम हैं
अस्मिता के सवाल हैं
और भी बवाल हैं
उत्तेजित करने वाले सभी तर्क
मुस्तैद हैं
और सबसे बड़ी बात
शान्ति के कबूतर
राजनीति के दड़बों में
क़ैद हैं
- बुशरा तबस्सुम
@BushraT39284814
काबा किस मुँह से जाओगे ग़ालिब ?
शर्म तुमको मगर नहीं आती।
पहले आती थी हाल- ए -दिल पे हँसी,
अब किसी बात पे मगर नहीं आती।
कोई उम्मीद बर नहीं आती।
कोई सूरत नज़र नहीं आती।
- ग़ालिब
सभ्य लोग
कभी हत्या नहीं करते।
वे
धीरे-धीरे
किसी मनुष्य को
इतना अकेला कर देते हैं
कि वह भीतर से मर जाए।
और फिर
उसकी चुप्पी पर
संवेदना व्यक्त करते हैं।
- रूना बनर्जी
स्टेपलर पिन जैसी हो क्या तुम?
बांधे रखती हो अपने प्रेम में
पर फिर भी कहाँ होता चैन तुम्हे
वक्त बेवक्त, गर ध्यान न रखा
नहीं मिली तुम्हे अहमियत
तो चुपके से चुभो भी देती हो
तुम्हारे साथ में
है स्नेह की मिठास तो
कभी कभी पड़ती है जरूरत
पेन किलर, टिटभेक और एंटीबायोटिक टेबलेट की ।
भूल सकूँ मैं तुझको यारा, मेरे बस की बात नहीं
ढूँढूँ अब मैं दूजा द्वारा, मेरे बस की बात नहीं
अब तू मेरा शौक़ नहीं है, अब तू मेरी आदत है
अब इस आदत से छुटकारा, मेरे बस की बात नहीं
- नरेश शांडिल्य
सपनों को ढूंढते हुए
सपनों तक नहीं जाया जाता।
कोई राह नहीं होती सपने वाली
सपने खुद गढ़ते हैं अपना अबूझ संसार
कुछ कच्ची पक्की आधी अधूरी कल्पनाओं
और यथार्थ की मिट्टी से।
रोज बनते हैं घर और रोज ढह जाते हैं
फिर भी
कहाँ थकते हैं !
...सपने
- प्रीति कर्ण
जीवन में सबसे सुंदर लोग
वे नहीं होते जिन्होंने दुःख नहीं देखा,
बल्कि वे होते हैं
जिन्होंने दुःख के बाद भी
कोमल बने रहना चुना...
- सुमन शर्मा
@Shubhra_subh
स्टेयरिंग सी गोल घुमाती हो जिंदगी,
कुछ पल आगे की ओर घूमते हुए
हर बार फिर लौटना होता है।
जबकि तुम सरपट भाग रही हो जिंदगी।
जिंदगी कहीं
मैं पीछे तो नहीं रह जाऊंगा ।
गांव में पनपी प्रेम कहानी
स्कूल डेस्क पर बने प्रेम चिन्ह तक
सिमट कर मिट गई
या होगी अबतक, अमर हो गई
बस अमरूद व अमिया के उपहार को
कम्पास का चाकू बनाकर
मीठा नहीं है के, तंज भरे गुस्से के साथ
रूठती रही, मनाते रहे
कब बिता समय
कब उसका गौना हुआ
अब ख्यालों में आकर
प्रेम कविता लिखवा रही
चाय पीते हुए निहारा था
वो पूछ बैठी -
कम मीठी है क्या?
नजरें थमी रही, पर कह बैठा
...न, अब ज्यादा मीठी हो गई
कुछ कॉकटेल असर जो करते हैं।
~मुकेश कुमार सिन्हा
@Tweetmukesh#अंतर्राष्ट्रीय_चाय_दिवस