तुम कुछ कहना , मैं कुछ सुनुगी...
आजकल कपड़ों से लोगों की पहचान होने लगी है,
अब मन की सरलता को समझने का समय किसके पास है?
किसके पास समय है ,दो पल बैठ कर बात करे ?
कुछ बिते लम्हों को याद करे,
कुछ कहें अपनी कुछ सुनें तुम्हारी।
चलों ना कुछ बात करते हैं..
कुछ तुम कहना कुछ मैं सुनुगी