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महादेव भक्तों के लिए विशेष पठनीय 📚: भगवान शिव की दृष्टि में धर्म @thevedscience
कैलाश क्षेत्र जिनकी राजधानी थी, क्या वो महादेव शिव जी सृष्टिकर्ता प्रलयकर्ता ईश्वर हैं, या एक extraordinary महान वैज्ञानिक योगी राजा थे? Fundamental concepts clear करें
🔥 नियोग का असली रहस्य क्या है? । सत्यार्थ प्रकाश पर इतना आक्रमण क्यों?
क्या आपने कभी इसके मूल सत्य को जानने का प्रयास किया? 🤔
▶️ पूरी चर्चा देखें–
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देखिए और स्वयं निर्णय कीजिए।
🙏नमस्ते जी,
हमारी समाज में वेदों के🌟प्रख्यात विद्वान आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक जी का आगमन मंगलवार, 15 सितम्बर 2026 को आना निश्चित हुआ है.
🌹सभी विद्वतजन से निवेदन है कि अधिक से अधिक इसका प्रचार करें और परिवार सहित, युवा लोगों को अपने साथ लाएं.
आर्य समाज वसंत कुंज
@vaidicphysics
इसमें ईश्वर का वास्तविक वैज्ञानिक स्वरूप समझाया गया है। साथ में अवतारवाद और अद्वैतवाद की भी समीक्षा की गई है। विज्ञान और धर्म/अध्यात्म के बीच गहरी खाई क्यों है आज? सच्ची आस्तिकता क्या है? इन विषयों पर भी विचार किया गया है।
@vaidicphysics@myogiadityanath@ManojNaravane@WIONews
इस वीडियो में बताया गया है कि किसी भी क्रिया के कर्ता का अनुभव किन परिस्थितियों में होता है। सामान्यतः सृष्टिकर्ता ईश्वर का अनुभव क्यों नहीं होता? @vaidicphysics@myogiadityanath
भौतिक विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए एक विशेष सन्देश
मेरे प्रिय छात्र-छात्राओ!
कक्षा ११वीं से लेकर बी.एस-सी. और एम.एस-सी. तक आप सभी जो भौतिक विज्ञान पढ़ रहे हैं, एक बात अपने मन में भली-भाँति बैठा लें कि संसार की सभी विद्याओं में साइंस सबसे महत्त्वपूर्ण है और साइंस का मूल आधार फिजिक्स है। ज़ूलॉजी, बॉटनी, केमिस्ट्री और गणित जैसी अन्य शाखाएँ भी अन्ततः भौतिकी (फिजिक्स) पर ही आकर समाप्त होती हैं।
फिजिक्स दुनिया की दिशा तय करने वाला विषय है। फिजिक्स सही दिशा में रहेगा तो पूरी दुनिया सही दिशा में रहेगी। यह गलत दिशा में गया, तो दुनिया भी गलत दिशा में जाएगी। अन्य सभी विषय चाहे आर्ट्स हों, कॉमर्स हों या साइंस इसी से प्रभावित होते हैं। इसलिए संसार को बदलने, भारत को विश्वगुरु बनाने और विश्व में सुख-शान्ति लाने का बहुत बड़ा उत्तरदायित्व आपके कंधों पर है। यह तभी सम्भव होगा, जब आप सही ढंग से पढ़ना सीखेंगे और एक महान् वैज्ञानिक बनने का प्रयास करेंगे।
अध्ययन के दौरान विद्यार्थियों के अलग-अलग तरीके देखने को मिलते हैं–
पहली श्रेणी: वे जो केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रहते हैं। शिक्षक या पुस्तक में जो लिखा है, उसे बिना सोचे-समझे सत्य मान लेते हैं और कोई प्रश्न नहीं उठाते।
दूसरी श्रेणी: वे जो बोर्ड पर लिखे शब्दों को बिना समझे केवल कॉपी में उतारते रहते हैं। उन्हें इसके पीछे के 'क्यों' और आधार से कोई मतलब नहीं होता।
तीसरी श्रेणी (सच्चे अन्वेषक): वे जो पुस्तकों और सूत्रों को भी शंका की दृष्टि से देखते हैं। वे सोचते हैं कि इसमें कोई त्रुटि तो नहीं या इसे और गहराई से समझने की आवश्यकता है? वे गणित और भौतिकी के सूत्रों को स्वयं सिद्ध करते हैं और पाठ्यक्रम से बाहर जाकर भी प्रश्न पूछते हैं।
वैज्ञानिक बनने की यात्रा यहीं (तीसरी श्रेणी के विद्यार्थी) से प्रारम्भ होती है। जिसके मन में प्रश्न हैं और जो किसी बात को केवल इसलिए स्वीकार नहीं करता, क्योंकि वह किसी किताब या शिक्षक ने कही है, वही भविष्य में वैज्ञानिक बनता है।
वैज्ञानिक बनने का अर्थ केवल अधिक अंक या मेरिट लाना नहीं है। कई छात्र अच्छे अंक तो ले आते हैं, लेकिन पाठ्यक्रम से बाहर कुछ पूछने पर निरुत्तर हो जाते हैं।
जैसे मजहबों में अंधविश्वास होता है कि किसी धर्मग्रन्थ, बाबा, मौलवी या पादरी ने कह दिया तो वह अंतिम सत्य है। वैसे ही शिक्षक या पुस्तक की बात को बिना तर्क स्वीकार करना भी एक अंधविश्वास है। केवल साइंस की बातें करना या खुद को आधुनिक व वामपंथी मान लेना ही वैज्ञानिक होना नहीं है। यदि उसमें प्रश्न पूछने की स्वतन्त्रता नहीं है, तो वह भी एक पन्थ या मजहब जैसा ही है।
शिक्षकों का पूरा सम्मान करें, लेकिन उनसे प्रश्न अवश्य पूछें। अच्छे शिक्षक प्रश्नों से कभी परेशान नहीं होते, बल्कि प्रसन्न होते हैं। यदि शिक्षक उत्तर न दे पाएँ, तो–
पुस्तक के लेखक से पूछिए। वहाँ समाधान न मिले, तो यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर से पूछिए। फिर भी उत्तर न मिले, तो बड़े वैज्ञानिकों से संपर्क कीजिए और जब सभी कह दें कि इसका उत्तर उपलब्ध नहीं है, तब हमारे पास आइए! हम उन प्रश्नों का समाधान वैदिक विज्ञान के माध्यम से देने का प्रयास करेंगे।
प्रतिभा का कुछ हिस्सा जन्मजात होता है और कुछ निरन्तर अभ्यास से विकसित होता है। एक महान् वैज्ञानिक बनने के लिए निम्न संकल्प अनिवार्य हैं–
1. पूर्ण एकाग्रता: एक समय में पचास काम करने से बचें। पढ़ते समय मोबाइल का अनावश्यक उपयोग ध्यान भटकाता है।
2. गैजेट्स का सीमित प्रयोग: मोबाइल और कंप्यूटर का उपयोग केवल अध्ययन के लिए करें। मनोरंजन, समय नष्ट करने या चरित्र पतन के लिए बिल्कुल नहीं।
3. ब्रह्मचर्य का पालन: विद्यार्थी जीवन में ब्रह्मचर्य अनिवार्य है। आज आईआईटी जैसे संस्थानों में भी नशे की गंभीर समस्या देखने को मिलती है (जैसा कि फ़रीदाबाद में एक आईआईटी छात्र ने स्वयं स्वीकार किया)। ब्रह्मचर्य से मन एकाग्र रहता है, शरीर स्वस्थ होता है और बुद्धि तीव्र होती है।
4. प्राणायाम और व्यायाम: नियमित व्यायाम और प्राणायाम से शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है, जिससे मस्तिष्क की कार्यक्षमता और सोचने की शक्ति बढ़ती है।
आज ही यह दृढ़ संकल्प लें कि आपको भौतिकी में एक सच्चा वैज्ञानिक बनना है। गणित और फिजिक्स के सभी फ़ॉर्मूलों को रिव्यू करें, उन पर विचार और शंकाएँ करें। मनन-चिन्तन से स्वयं समाधान खोजें, शिक्षकों से पूछें और अन्त में जिन प्रश्नों के उत्तर कहीं न मिलें, उन्हें लेकर हमारे पास आएँ, हम आपके प्रश्नों का उत्तर सार्वजनिक रूप से देंगे।
—आचार्य अग्निव्रत
संस्थापक प्रमुख, वैदिक एवं आधुनिक भौतिकी शोध संस्थान
(श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास द्वारा संचालित)
क्या किसी पदार्थ में अनादि गति हो सकती है? क्या सृष्टि में क्रियाएं स्वतः अव्यवस्थित रूप में होती हैं, या अत्यंत व्यवस्थित रूप से बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से होती हैं? ऐसे कौन से प्रश्न हैं जिनके उत्तर विज्ञान ढूंढने का प्रयास कर रहा है, जो उत्तर दर्शन के पास हैं? @vaidicphysics
1. क्या ईश्वर को केवल मान लेना पर्याप्त है?
2. यदि हम चाहते हैं हमारा भला हो, तो ईश्वर को जानना भी पड़ेगा, और यथायोग्य आचरण करना होगा।
3. ईश्वर को जानने के लिए जगत और वेद को जानना होगा।
4. जो बिना जगत और वेद को समझे ईश्वर को जानने/पाने की बात करता है, वह या तो झूठा या अज्ञानी है
🤷 क्या ईश्वर को केवल मान लेना ही पर्याप्त है?
यदि हम ईश्वर को मानते हैं, तो हमारे आचरण में सत्य, ईमानदारी, अहिंसा, चरित्र और धर्म क्यों दिखाई नहीं देते?
“अथातो ब्रह्मजिज्ञासा” के आधार पर इस व्याख्यान में विचार किया गया है कि ब्रह्म को जानने की वास्तविक जिज्ञासा क्या है।
क्या हमें पहले यह जानने का प्रयास नहीं करना चाहिए कि ईश्वर है भी या नहीं? और यदि है, तो कैसा है?
🎥 वीडियो देखें और इस मूल प्रश्न पर विचार करें—
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👉 क्या हम वास्तव में ईश्वर को जानते हैं या केवल ईश्वर को मानते हैं?
आरक्षण हटाओ या आरक्षण बचाओ?
आरक्षण और जातिवाद की समस्या का वास्तविक समाधान क्या हो सकता है?
इस वीडियो में इसी प्रश्न पर गम्भीर विचार किया गया है।
वीडियो देखें और अपनी राय अवश्य दें–
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क्या हम सदा सत्य ग्रहण और असत्य त्याग करने में उद्यत रहते हैं? क्या modern science बता सकता है सृष्टि की उत्पत्ति क्यों, किसने किसके लिए करी? मनुष्य आदि प्राणियों ने इस धरती पर जन्म क्यों लिया? इन प्रश्नों के उत्तर जानकार ही मनुष्यों को जीवन का लक्ष्य समझ आएगा @vaidicphysics