श्री योगी आदित्यनाथ जी, वाल्मीकि जयंती पर अवकाश घोषित करने हेतु साधुवाद। 🙏
लेकिन NI Act के तहत अवकाश न होने से बैंकर्स इस सुविधा से वंचित हैं। बैंकर्स के भी परिवार हैं। अतः बैंकर्स के लिए भी NI Act, 1881 के अंतर्गत अवकाश घोषित करने की कृपा करें।
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बैंक कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर बात होनी चाहिए। उन पर तनाव ज़रूरत से ज़्यादा होता जा रहा है। देश इसका नुक़सान भुगतेगा जैसा आजकल ख़बरों में लगातार देखा जा रहा है। घटनाएं बढ़ रही हैं।
उम्मीद है कि उन अहंकारी लोगों में थोड़ी इंसनायित बची होगी अभी भी।
One chief manager of indian Bank posted in head office has taken his life by suicide .
Any idea what could be the reason for somebody posted in head office taking such a extreme step .
देश में बैंककर्मिओं की स्थिति पर जल्द बात शुरू नहीं हुई तो हालत बिगड़ सकते हैं। जिस तरह आए दिन बैंककर्मी सुसाइड कर रहे हैं,यह खतरे की घंटी है।
बैंको का कामकाज भी देश की सुचारू सिस्टम का लाइफलाइन है। वह बाधित हुआ तो बड़ी समस्या होगी।
उनकी बात सुनिए। देखिए आसपास क्या हो रहा है ।
बैंक यूनियन्स को बैंकर्स का काटना ही था तो कम से कम सैटरडे को ही ये सब कर लेते।
संडे भी काम करा लिया और स्ट्राइक भी कैंसिल कर दी।
बेचारे सैटरडे की छुट्टी माँग रहे थे, यहाँ एक संडे एक्स्ट्रा काम करवा दिया यूनियन ने।
गजबे है
Bank employees are on a 3 day strike from Sept 28-30.
I think the 5 day banking demand is fair.
Banking is a tough job with constant pressure and customer handling.
बैंक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कारण पूछने पर यही लगा कि जिस बैंक की नौकरी को अच्छी नौकरी में गिना जाता था, उसकी हालत बदतर हो गई है। टारगेट के नाम पर कर्मचारी देर शाम तक रोके जाते हैं, छुट्टी नहीं दी जाती है,
तनाव रोज़ का हिस्सा है। काम करने की जगह भी अच्छी नहीं है। ऐसा लगता है कि बैंकर को सज़ा दी जा रही है कि उन्होंने बैंक की नौकरी क्यों की। लोगों ने बताया कि अत्यधिक तनाव के कारण बीमारियाँ होने लगी हैं।
एक बैंकर ने यह भी बताया-
सुबह 8:00 बजे घर से निकलने वाला बैंकर रात को 8:00 या 9:00 बजे के बाद ही घर लौट पाता है, क्योंकि एनपीए (NPA - गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) को रोकने का भारी दबाव होता है। हर खाते की मंथली ईएमआई (EMI) होती है, और यदि वह 90 दिनों तक जमा न हो, तो खाता एनपीए हो जाता है। ऐसे में रीजनल ऑफिस से ब्रांच हेड पर दबाव आता है कि यह खाता आज किसी भी हाल में एनपीए नहीं होना चाहिए। पहले केवल महीने की आखिरी तारीख को एनपीए रोकने का दबाव होता था, लेकिन अब हर सिंगल डे (प्रतिदिन) यह प्रेशर रहता है।
रात के 9:00 बज रहे होते हैं और रीजनल ऑफिस से फोन आता है कि "किसी भी तरह इस खाते को बचाइए।" थक-हारकर जब ब्रांच हेड को लगता है कि उसे अब घर जाना चाहिए, तो वह अपनी जेब से 2,000, 4,000 या 10,000 रुपये तक की ईएमआई खुद भर देता है। बाद में ग्राहक वह पैसा लौटाता नहीं है, जिससे बैंक मैनेजर के अपने पैसे डूब जाते हैं।
बैंक में दिनभर कई तरह के मानसिक तनाव झेलने पड़ते हैं। आपको रिकवरी के लिए फील्ड में निकलना होता है। वहाँ कोई ग्राहक आपको ब्लैकमेल करता है कि "मेरे घर मत आओ, नहीं तो मैं पैसा जमा नहीं करूँगा, सिर्फ़ फोन पर बात करो।" फोन पर बात करने के दौरान ग्राहक कभी-कभी अभद्र और गाली-गलौज वाली भाषा का प्रयोग करते हैं। उस तनाव में यदि मैनेजर के मुँह से गलती से भी कोई गलत बात निकल गई, तो ग्राहक उसकी कॉल रिकॉर्डिंग करके ब्लैकमेल करने लगता है।
कृपया बैंकर की बात सुनें । कोई रास्ता निकालें।
इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने से लेकर सरकारी योजनाएं ग्राहक को टिकाने तक,
आज की डेट में बैंक कर्मचारियों पर इतना काम लादा हुआ है कि उनपर हुए सर्वे में ज्यादातर “हाई स्ट्रेस” में होने की बात बता रहे हैं।
जिन्हें काम देने में दो मिनट नहीं लगता उन्हें दो छुट्टी देने में धरती फट जा रही है
देश के बड़े बड़े स्टैंडअप कॉमेडियनों से लेकर व्हाट्सएप मैसेजेस और फेसबुक पोस्टों पर बैंक कर्मियों की कार्यशैली का खूब मजाक बना ,लोगों ने ठहाके लगाए,
लेकिन आज जब वहीं बैंक कर्मी जब काम के बोझ के तले दबकर डिप्रेशन का शिकार हो रहा और सुसाइड कर रहा तो लोगों ने मुंह में फेवी क्विक डाल रखी है।
🚨 India Has 60 Crore Jan Dhan Bank Accounts
45 Crore are Serviced By Govt/Public Banks
Private Banks Handle Only 2.26 Crore Accounts
They Don't Want Poor or Zero Balance A/Cs
Pressure is Real on Public Sector Bank Employees
Don't Think Asking 5 Day Workweek in Unfair
बैंकों का मुनाफा बढ़ रहा है लेकिन कर्मचारियों की संख्या घट रही है और काम घटाने की बात ना करते हुए बैंक वाले 2 दिन की छुट्टी माँग ले रहे तो आग लगी है सिस्टम को।
क्या सरकारी, क्या प्राइवेट बैंक.. देखिए क्या ही हो रखा है बैंकर्स का हाल
बैंक मुनाफे में चल रहे हैं लेकिन बैंक कर्मचारियों को 2दिन की छुट्टी देने में इनको मौत आने लगती है।
जबकि आप ख़ुद देखिए बैंक कर्मचारियों पर काम का कितना प्रेशर है।
अब वो हड़ताल नहीं करें तो क्या करें
Honest negotiation efforts signaling 5 days of work week proved crucial to boosting morale; implement it to maintain that spirit. #5DayBankingNow#AIBOC@PMOIndia https://t.co/WPjsIqCxyv