आज हिमाचल प्रदेश और पंजाब के दौरे से लौटने के बाद Cabinet Committee on Security की बैठक में नेपाल के घटनाक्रम को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। नेपाल में हुई हिंसा हृदयविदारक है। यह जानकर बहुत पीड़ा हुई कि इसमें अनेक युवाओं की जान गई है। नेपाल की स्थिरता, शांति और समृद्धि हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मैं ने���ाल के अपने सभी भाई-बहनों से विनम्र अपील करता हूं कि वे शांति-व्यवस्था बनाए रखें।
वर्षों से हैदराबाद में रह रहे झारखंड के प्रवासी मजदूर भाइयों की ओर से कल झारखंड एकता समाज का आठवां स्थापना दिव��� एर्रागड्डा स्थित विक्टोरिया गार्डेन फ्लाईओवर, भरत नगर में मनाया जाएगा।
समारोह में अतिथि के रूप में मुझे आमंत्रित किया गया है।
दीदी बगिया योजना, बागवानी सखी योजना,एसएचजी प्रोफाइल, आरएफ, सीआईएफ, मुद्रा लोन, लखपति दीदी योजन��, फूलो -झानो आशीर्वाद अभियान, कौशल विकास आदि की समीक्षा की गई।
आज समाहरणालय स्थित सभागार में झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी (जेएसएलपीएस) के अंतर्गत चल रहे विभिन्न कार्यक्रम एवं परियोजनाओं की विस्तृत ���मीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक के दौरान पलाश मार्ट, दीदी बाड़ी योजना,
आज पुलिस अधीक्षक ,गोड्डा के साथ राजमहल परियोजना अंतर्गत हुर्रासी परियोजना के डुमरिया एवं कद्दू टोला पुनर्वास स्थल में सामुदायिक भवन , स्कूल ,स्वास्थ्य केंद्र ,कुआं एवं निर्माणाधीन निवास स्थल का निरीक्षण किया गया।
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महान स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। वे ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती देने वाले देश के अग्रणी योद्धा थे। उनके साहस और पराक्रम की कहानी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।
सांप का काटना एक चिकित्सकीय आपात स्थिति है, न कि डरने या अंधविश्वास में पड़ने का समय। अगर सांप काट ले, तो घबराएं नहीं, शांत रहें, सांप से दूर हटें और तुरंत नजदीकी अस्पताल जाएं।
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झारखंड ���े पाकुड़ में में बीमार बेटा को इलाज के लिए खाट पर लेकर पिता ने पहुंचाया हॉस्पिटल,गांव तक जाने के लिए आज तक संपर्क पथ नहीं बना है.ज��स कारण आज भी लोगों को खटिया पर लाद कर मरीजों को इलाज के लिए ले जाना पड़ता है अमड़ापाड़ा प्रखंड के डूमरचीर पंचायत में बड़ा बास्को पहाड़ निवासी बामना पहाड़िया बीमार पड़ गया। बच्चे के बीमार होने पर पिता कमला पहाड़िया के समक्ष बेटे को अस्पताल तक पहुंचाने की बड़ी समस्या सामने आ गयी। ये जानते थे कि गांव से दो किमी दूर मुख्य सड़क तक जाने के लिए संपर्क पथ नहीं रहने से उन्हें वाहन नहीं मिलेगा। जिसके ���ाद उसने अपने अन्य परिजनों व संबंधियों का सहयोग लिया और बेटे को खाट पर टांग इलाज के लिए निकल पड़े।
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“पचास रुपये की दौलत”
ओपीडी में मरीजों की भीड़ लगी थी, तभी एक छः महीने की बच्ची को गोद में लिए एक घबराई हुई माँ और उसकी नानी मेरे पास आईं। बच्ची के माथे पर बड़ा सा scalp hematoma /ब्लड क्लॉट था — चोट ताज़ा थी और डर साफ़ झलक रहा था उनके चेहरे पर।
मैंने जल्दी से बच्ची को देखा, और तसल्ली दी कि गंभीर बात नहीं है, लेकिन थोड़ा निगरानी रखनी होगी।
बातों ही बातों में पता चला कि वो पहले एक प्राइवेट अस्पताल गई थीं, लेकिन वहां का खर्च उनके बस से बाहर था।
डॉक्टर की फीस, स्कैन, दवाइयाँ — सब मिला कर 20 हज़ार का अनुमान बताया गया।
डरी हुई माँ ने कहा,
“डॉक्टर साहब, हमारे पास इलाज के लिए पैसे नहीं हैं, किसी ने आपके बारे में बताया कि आप मदद करते है
लेकिन बच्ची को कुछ हो ना जाए इसलिए दौड़ते हुए आपके पास आ गए।”
उन्होंने डरते-डरते पूछा:
कितना पैसा लगेगा??
मैं मुस्कराया और कहा,
“ माता जी ये बच्ची है इसके पैसे मैं नहीं लूंगा ।”
उनकी आंखों में पानी भर आया। वो मेरी तरफ़ द��खती रहीं… जैसे कोई अनसुना सुखद उत्तर मिल गया हो।
इलाज के बाद, जब वो जा रही थीं, तो नानी ने चुपके से मेरी जेब में एक सिकुड़ा हुआ ₹50 का नोट डाल दिया।
मैंने रोकने की कोशिश की,
“माँ, ये क्या कर रही हैं आप?”
उन्होंने हाथ जोड़ते हुए कहा:
“बेटा, मुफ़्त इलाज तो दे दिया, पर ये हमारी औक़ात का ‘धन्यवाद’ है। रख लीजिए डॉक्टर बाबू,भगवान के नाम पर।”
वो ₹50 मेरे लिए कोई साधारण नोट नहीं था…
वो था —
ममता का मूल्य,
ग़रीबी में भी आत्म-सम्मान की झलक,
एक माँ की राहत,
और एक नानी का आशीर्वाद।
फिर मैंने अपने वाइफ को आवाज़ दी की कितनी प्यारी बच्ची है फिर मेरे वाइफ ने एक 500 ki नोट बच्ची को आशीर्वाद के रूप में दिया ।
@DrSugandhaVerm3
@IrfanAnsariMLA स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते आपकी जिम्मेवारी है आप इनका ईलाज किसी अच्छे से अस्पताल में करा दे। ताकि ये दुनिया में अपनी जिंदगी और अच्छे से जी सके।