इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता, उसका सिर्फ़ एक नाम होता है मोहब्बत।
सहारनपुर की सुनीता अरोड़ा 180 किलोमीटर का सफर तय करके जंतर-मंतर सिर्फ़ इसलिए पहुँचीं क्योंकि उन्होंने रोज़ एक नौजवान, मोहम्मद जुनैद, को बिना किसी भेदभाव के लोगों की मदद करते देखा था।
मुलाकात होते ही सुनीता जी की आँखें भर आईं। उन्होंने कहा "बेटा, तेरी माँ तुझसे मिलने सहारनपुर से आई है ऐसे ही हिंदू-मुस्लिम एकता और इंसानियत की मिसाल बनकर लोगों की सेवा करते रहना" यह दृश्य बता गया कि नफ़रत की दीवारें चाहे जितनी ऊँची हों, इंसानियत और मोहब्बत उन्हें हमेशा पार कर जाती है।
यही है भारत की असली पहचान प्यार, भाईचारा और इंसानियत।
For 4 days they are sitting here, no food, no water. The BSF has pushed 10 people to Bangladesh & the BGB is not accepting them. The girl studied in Class VI in India! There's no rule of Law it seems. How could BSF identify they are Bangladeshis?