अछूतों के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ व अछूत समाज के बच्चों की शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण के लिए ताउम्र संघर्षरत रहे अय्यंकाली जी के स्मृति दिवस पर उन्हें शत-शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि।
आप सभी सादर आमंत्रित हैं 🙏🙏
भीम आर्मी एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के तत्वाधान में 15 मार्च 2026 को मान्यवर कांशीराम साहब जी की जयंती एवं पार्टी के छठे स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित "संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ महारैली" को ऐतिहासिक बनाने के लिए गाँव-गाँव, मोहल्ले-मोहल्ले जनसंपर्क अभियान चलाएँ।
घर-घर जाकर मीटिंग करें, संवाद करें और अधिक से अधिक लोगों को रैली में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।
आइए, मिलकर परम पूज्य बाबा साहब और मान्यवर कांशीराम साहब के मिशन को आगे बढ़ाएँ।
संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और भाईचारे के लिए एकजुट हों और 15 मार्च को अपनी ताकत दिखाएँ।
🗓 दिनांक: 15 मार्च 2026, रविवार
🕐 समय: सुबह 10:00 बजे
📍 स्थान: हैदरगढ़ रोड़ निकट, किसान भट्टा बड़ेल मैदान, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश
🌟 मुख्य अतिथि:
माननीय एडवोकेट चन्द्र शेखर आज़ाद
सांसद – लोकसभा (नगीना, उ.प्र.)
संस्थापक – भीम आर्मी भारत एकता मिशन
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आजाद समाज पार्टी (कांशीराम)
#15_मार्च_चलो_बाराबंकी #ASP_K_Mission2027
#UPMaangeChandraShekharAzad
ईरान के सर्वोच्च नेता और भारत के मित्र आयतुल्ला अली ख़ामेनेई जी के निधन की खबर एक युग के अंत का संकेत है।
भारत–ईरान संबंध सदियों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और रणनीतिक विश्वास पर आधारित रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा से लेकर क्षेत्रीय स्थिरता तक यह रिश्ता अहम रहा है। पाकिस्तान के साथ तनाव के दौर में भी ईरान ने भारत के साथ सहयोग और संतुलन का रास्ता चुना।
पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध चिंताजनक है। दुनिया कब तक तथाकथित “वैश्विक तानाशाहों” की दखलंदाज़ी झेलेगी? क्या संयुक्त राज्य अमेरिका हर असहमति का जवाब प्रतिबंध और युद्ध से देगा?
अमेरिका की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का खुला उल्लंघन है, जो किसी भी संप्रभु राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान का निर्देश देता है। किसी भी देश के राष्ट्राध्यक्ष को उनके अपने देश की सीमा के भीतर बिना किसी युद्ध की घोषणा या कानूनी प्रक्रिया के निशाना बनाना एक गंभीर अपराध है। यह कदम वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए अत्यंत घातक है।
अब प्रधानमंत्री @narendramodi जी को स्पष्ट करना चाहिए-भारत युद्ध की राजनीति के साथ खड़ा है या बुद्ध की करुणा और स्वतंत्र कूटनीति के साथ?
भारत की आवाज़ शांति, न्याय और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के पक्ष में बुलंद होनी चाहिए।
ऐसे योद्धा की शहादत को हम नमन करते हुए शांति, सद्भाव और मानवता के संदेश में बदलें।
अलविदा, भारत के वफ़ादार दोस्त।
युद्ध समाधान नहीं, विनाश है।
उत्तर प्रदेश के रामपुर ज़िले की मिलक तहसील में पुलिस विभाग के सी.ओ. राजवीर सिंह परिहार द्वारा एक स्कूल के मंच से जातिसूचक और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना सिर्फ़ असंवेदनशीलता नहीं, बल्कि खुला जातिवादी अपराध है।
एक इतने ज़िम्मेदार पद पर बैठा पुलिस अधिकारी अगर “चोर” को “चमार” जाति से जोड़कर इस पूरे समाज को सार्वजनिक रूप से अपमानित करता है, तो यह साबित करता है कि जातिवाद आज भी ज़िंदा है। स्कूल का मंच बच्चों को संविधान, समानता और भाईचारे का पाठ पढ़ाने के लिए होता है-न कि जातिवादी सोच, घृणा और जाति के अपमान के लिए।
यह बयान न केवल संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 17 का उल्लंघन है, बल्कि SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध भी है।
हम @UPGovt से मांग करते हैं-सी.ओ. परिहार को तत्काल पद से हटाया जाए, उनके खिलाफ विभागीय जांच नहीं, क़ानूनी कार्रवाई होनी चाहिये, और सरकार स्पष्ट करे कि जातिवाद पर उसकी नीति ज़ीरो टॉलरेंस है या सिर्फ़ नारा।
यह सिर्फ़ एक जाति का अपमान नहीं है - यह संविधान, सामाजिक न्याय और बहुजन सम्मान पर हमला है।
@CMOfficeUP@myogiadityanath@dgpup
आगरा की ऐतिहासिक “संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ” महारैली के बाद मात्र 10 दिनों के भीतर कन्नौज में उससे भी कहीं बड़ी, अधिक संगठित और ऐतिहासिक महारैली का सफल आयोजन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि बहुजन आंदोलन अब प्रत्येक रैली के साथ नई ऊँचाइयों को छू रहा है।
कन्नौज की महारैली को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने में दिन-रात जुटे सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों को हृदय से आभार।
साथ ही, इस महारैली को अपना अपार प्यार और समर्थन देकर इतिहास रचने वाली कन्नौज की सम्मानित जागरूक और संघर्षशील जनता को कोटि-कोटि नमन।
#ASP_K_Mission2027
गुजरात के पाटन ज़िले के चंद्रुमना गांव में दलित युवक विशाल चाबड़ा की बारात सिर्फ़ इसलिए रोकी गई क्योंकि वह घोड़े पर सवार था। तलवारें निकाली गईं, गालियाँ दी गईं, बारातियों के साथ मारपीट की गई-क्योंकि जातंकी आज भी मानते हैं कि दलितों को सम्मान, खुशी और बराबरी के साथ जीने का अधिकार नहीं है।
जातंकवादियों का तर्क न केवल अमानवीय बल्कि संविधान विरोधी था। उनका कहना था कि घोड़े पर सवार होना केवल तथाकथित ‘उच्च वर्ण’ का विशेषाधिकार है। भीड़ में से चिल्लाया जा रहा थ-
“इस गांव में एक दलित की घोड़े पर चढ़ने की हिम्मत कैसे हुई?”
हम @CMOGuj से मांग करते हैं कि सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो,अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की सख़्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए,पीड़ित परिवार को सरकारी सुरक्षा और उचित मुआवज़ा दिया जाए
माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री @dpradhanbjp जी, जातिगत श्रेष्ठता के इस नग्न प्रदर्शन ने #UGCRegulation2026 की प्रासंगिकता को और गहरा कर दिया है। यदि यह विनियम संस्थागत जातिवाद के मामलों में दोषियों को दंडित करने में कमजोर पड़ता है, तो यह समाधान नहीं बल्कि जातिगत श्रेष्ठता को मिला वैधानिक संरक्षण बन जाएगा।
जब समाज में आज भी बराबरी को खुली चुनौती दी जा रही है, तब उच्च शिक्षा में समता को आधा-अधूरा नहीं छोड़ा जा सकता।
@mygovindia@Bhupendrapbjp
#ASP_K_Support_UGC_Act
#ASP_K_Support_UGC_Act
भारत कोई मठ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गणराज्य है। और राज्य किसी धर्म-विशेष की जागीर नहीं।
इस स्पष्ट उल्लेख के बावजूद एक कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा परेड और सलामी (Guard of Honour) दी जाती है—यह सिर्फ़ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि संविधान पर खुला हमला है।
सलामी और परेड राज्य की संप्रभु शक्ति का प्रतीक होती है। यह सम्मान संविधान, राष्ट्र और शहीदों के नाम पर दिया जाता है।किसी कथावाचक, बाबा या धर्मगुरु का रुतबा बढ़ाने के लिए नहीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तथाकथित रामराज्य में अब हालात ये हैं कि—आस्था को संविधान से ऊपर,धर्म को कानून से ऊपर और कथावाचकों को संवैधानिक पदों से ऊपर बैठाया जा रहा है।
यह घटना बताती है कि उत्तर प्रदेश का प्रशासन अब संविधान के प्रति जवाबदेह नहीं, बल्कि धार्मिक सत्ता के आगे नतमस्तक है। यह एक ख़तरनाक परंपरा की ओर इशारा करता है, जहाँ राज्य धीरे-धीरे अपने संवैधानिक चरित्र को त्याग रहा है।
सवाल उठते है— पुंडरीक गोस्वामी हैं कौन?, वे कौन-सा संवैधानिक पद धारण करते हैं?, किस कानून या प्रोटोकॉल के तहत उन्हें Guard of Honour दिया गया?, क्या अब उत्तर प्रदेश में धार्मिक पहचान ही नया सरकारी प्रोटोकॉल है?
मुख्यमंत्री @myogiadityanath को याद दिलाना ज़रूरी है—
1. संविधान की प्रस्तावना भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करती है, किसी एक धर्म का सेवक नहीं।
2. अनुच्छेद 15: धर्म के आधार पर विशेषाधिकार देना असंवैधानिक है।
3. अनुच्छेद 25–28: राज्य धर्म से दूरी बनाए रखेगा, चरणवंदना नहीं करेगा।
इसका साफ़ मतलब है—संविधान सर्वोच्च है—कोई धर्म नहीं। राज्य का कोई धर्म नहीं होता।
जय भीम,जय भारत,जय संविधान,जय विज्ञान
@UPGovt@CMOfficeUP@dgpup
बाराबंकी ज़िले के ग्राम मऊथरी, थाना जैदपुर में हुई दुखद घटना दलित-बहुजन समाज और न्यायप्रिय नागरिकों के लिए गहरी पीड़ा और चिंता का विषय है।
अशोक कुमार जी, जो भीम आर्मी में तहसील न्याय पंचायत अध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे, मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उन्हें झूठे मामले में छोड़ने के लिए ज़बरन 75,000 रूपए की रिश्वत माँगी गई और पैसे न देने पर उन्हें NDPS एक्ट जैसे गंभीर मुक़दमे में फँसाने की धमकी दी गई। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अशोक कुमार जी यह रकम नहीं दे पाए। उन्होंने ज़मीन बेचने की कोशिश भी की, लेकिन तत्काल कोई खरीदार नहीं मिला।
लगातार होने वाले उत्पीड़न, अपमान और झूठे मुक़दमे की आशंका से गहरे आहत होकर अशोक कुमार जी ने 1 अक्टूबर की रात गाँव से बाहर एक पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उनकी लाश सुबह खेतों में पेड़ से लटकी हुई मिली। मरने से पहले उन्होंने एक पत्र लिखा और कई लोगों को व्हाट्सएप संदेश भेजे, जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए थाना जैदपुर के पुलिसकर्मी संतोष इंस्पेक्टर और निर्मल दरोगा सहित अन्य को जिम्मेदार ठहराया है।
इसके बावजूद, उनकी पत्नी और परिवार की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। पुलिस उल्टा दबाव बना रही है कि अगर मृतक द्वारा नामज़द आरोपी पुलिसकर्मियों के नाम हटाएं तभी FIR दर्ज की जाएगी। यह न केवल अमानवीय है बल्कि कानून और संविधान की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाना है।
हम @UPGovt से तत्काल निम्नलिखित माँग करते हैं:
1. मामले में लिप्त सभी के खिलाफ सख्त धाराओं में FIR दर्ज की जाए।
2. मृतक के परिवार को कम-से-कम ₹50 लाख मुआवज़ा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
3. मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच किसी उच्च-स्तरीय समिति या स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
4. थाना जैदपुर के दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर गिरफ़्तार किया जाए।
@CMOfficeUP@myogiadityanath
“एक मामूली लड़का… जिसने गाँव की धूल-भरी गलियों से उठकर सिर्फ़ दस सालों में उत्तर भारत के दलित गाँवों में अपना जड़ फैला दिया।"
तुम उससे सहमत हो सकते हो, असहमत हो सकते हो, लेकिन उसे पूरी तरह ख़ारिज करने की हिम्मत किसी में नहीं।”
प्रिय चंद्रशेखर, @BhimArmyChief
तुम्हारे बारे में सोचता हूँ तो हमेशा वही तस्वीर आँखों में उतर आती है, धूल-भरे किसी छोटे कस्बे की गलियों से उठकर, भीड़ में अकेले खड़े एक नौजवान की। न जेब में दौलत थी, न कंधे पर किसी बड़े नेता का हाथ, लेकिन आँखों में आग थी, और होठों पर अंबेडकर के सपनों का नाम।
तुम्हें चाहो तो आलोचना के तराजू पर तौल लो, चाहो तो अफवाहों की चादर ओढ़ाकर बदनाम कर दो, लेकिन सच यही है कि तुम इस देश की दलित-बहुजन राजनीति में नई हवा की तरह आए। और यह हवा सिर्फ चुनावी नारों तक नहीं रुकी, यह हवा गाँव-गाँव के बच्चों तक पहुँची, जिन्होंने पहली बार सुना कि “भीम आर्मी नाम का भी संगठन है।”
चंद्रशेखर, तुम पर बहुत उंगलियाँ उठीं, कभी राजनीति के नाम पर, कभी प्रेम के नाम पर, कभी तुम्हारे व्यक्तित्व पर। लेकिन क्या एक इंसान सिर्फ़ इन उंगलियों से तय हो सकता है? प्रेम की गलियों में वफ़ा और बेवफ़ाई दोनों होती हैं, और राजनीति के मैदान में जीत और हार दोनों। पर तुम्हारी सबसे बड़ी जीत यही है कि तुमने लाख ठोकरों के बाद भी रास्ता छोड़ा नहीं।
तुम्हारी कहानी मुझे वैसी लगती है जैसे कोई छोटा बीज, जिसे लोग पत्थरों के बीच फेंक दें, और सब कहें, “इससे कुछ नहीं उगेगा।” लेकिन वही बीज चट्टानों को चीरकर बाहर आता है, और एक दिन पेड़ बनकर छाँव देता है। तुम वही बीज हो चंद्रशेखर, जिसने दस बरस में नगीना से लेकर उत्तर भारत के दलित गाँवों तक अपनी जड़ें फैला दीं।
हाँ, तुमसे असहमति हो सकती है, तुम्हारे फ़ैसलों पर सवाल उठ सकते हैं, पर तुम्हें पूरी तरह नकारना असंभव है। क्योंकि जिस लड़के ने खुद अपने दम पर संगठन खड़ा किया, जेलें देखीं, गालियाँ सही, और फिर भी संसद तक पहुँच गया, वह लड़का किसी के लिए सिर्फ़ ‘नेता’ नहीं, बल्कि संघर्ष की जीती-जागती किताब है।
मेरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में तुम्हारा सफ़र और कठिन होगा, पर तुम्हारी रगों में जो विद्रोह बह रहा था, वह तुम्हें गिरने नहीं देगा। याद रखना, तुम्हारा नाम सिर्फ़ एक इंसान का नाम नहीं, बल्कि उन तमाम आँखों की उम्मीद है जो सदियों से समानता और न्याय के सपने देख रही हैं।
चंद्रशेखर, यह ख़त तुम्हें याद दिलाने के लिए है कि चाहे कितनी भी आँधियाँ आएं, तुम्हें रुकना नहीं है। तुम्हें वही रहना है, जो दलित-बहुजन बच्चों को पहली बार पढ़ाई की ताक़त दिखाए, जो गाँव की औरतों को पहली बार हिम्मत दे, और जो संसद में खड़े होकर यह कहे कि “हम यहाँ मेहमान नहीं, इस देश के बराबरी के वारिस हैं।”
तुम्हारा आलोचक बनना आसान है, पर तुम्हारा साथी बनकर चलना मुश्किल। फिर भी, मैं तुम्हें सलाम करता हूँ, क्योंकि तुमने हमें यह सिखाया कि साधारण लड़के भी असाधारण इतिहास रच सकते हैं।
फ़िर कहता हूं तुमसे हज़ार शिकायतें है, असहमति है। नेता के तौर बहुत ज़्यादा परिपक्वता की जरूरत है, लेकिन फिर भी कोई तुम्हें नकार नहीं सकता।
ख़त लिखने वाला लड़का।
चाय इश्क़ और राजनीति।
जिला अमरोहा के बछरांव थाना क्षेत्र के मुसल्लेपुर निवासी शिवम जाटव पर एक महीने पहले जातंकवादियों ने जानलेवा हमला किया। शिवम का हाथ बुरी तरह जख्मी हो गया, नसें कट गईं और अब उसका हाथ काम करना बंद कर चुका है। इलाज में परिवार के लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। यह घटना अत्यंत पीड़ादायक और दण्डनीय है।
लेकिन आज तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई।सारे आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, क्योंकि वे भाजपा से जुड़े हुए हैं।
उल्टा, पीड़ित परिवार पर ही समझौते का दबाव बनाया जा रहा है।
ये सिर्फ़ अन्याय नहीं, बल्कि दलित समाज के खिलाफ़ भाजपा प्रायोजित जातीय आतंकवाद है।
हम भाई शिवम के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रकृति से प्रार्थना करते हैं।
@UPGovt से हमारी मांगें:-
1. सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
2. SC/ST एक्ट की सख़्त धाराओं में मुक़दमा दर्ज कर फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए।
3. पीड़ित को सरकारी खर्च पर इलाज व उचित मुआवज़ा मिले।
4. पीड़ित परिवार को सुरक्षा दी जाए।
अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो इस अन्याय के खिलाफ़ जनता का बड़ा आंदोलन खड़ा होगा। अब बहुजन समाज और न्यायप्रिय जनता चुप नहीं बैठेगी।
@CMOfficeUP@myogiadityanath
खंदौली थाना के अंतर्गत गाँव गिजौली प्रकरण को लेकर के आज पुलिस कमिश्नर आगरा से भीम आर्मी/आजाद समाज पार्टी के प्रतिनिधि मंडल ने मुलाक़ात की जिसमे पुलिस कमिश्नर श्री दीपक कुमार जी के द्वारा पीड़ित परिवार की हर संभव मदद का आश्वासन दिया @AspUPagra@BhimArmyChief@VinayRatanSingh
Dr. Ambedkar Education Aid Society, कैलिफोर्निया (संयुक्त राज्य अमेरिका) द्वारा आयोजित एक प्रेरणादायी बैठक में शामिल होने का अवसर मिला।
मेरे लिए किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत और सम्मान के लिए मैं हृदय से आभार प्रकट करता हूँ।
इस संवाद के केंद्र में परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के शैक्षिक आंदोलन, सामाजिक न्याय और वैश्विक बहुजन एकता की दिशा में उठाए जाने वाले ठोस कदम रहे। अमेरिका में बसे आंबेडकरवादी साथियों की प्रतिबद्धता और जागरूकता ने यह विश्वास दिलाया कि बाबा साहेब का मिशन केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में फैल रहा है।
इस अवसर पर बाबा साहेब की एक बात बार-बार याद आई — "जहाँ भी बहुजन खड़ा है, वहीं से क्रांति की लौ जलनी चाहिए।" यही बाबा साहेब की सीख है हमारे लिए।
हमारा संघर्ष — शिक्षा, बराबरी और संविधान की हिफ़ाज़त के लिए — सीमाओं से परे है। हम सब मिलकर एक ऐसे समाज की बुनियाद रखेंगे, जहाँ हर इंसान को सम्मान और हक़ मिले।
जय भीम | लड़ेगा भारत, पढ़ेगा भारत, बढ़ेगा भारत।