आपको प्रेम करने के बाद
मैंने ये जाना की ईश्वर हर जगह व्याप्त है उन्हें पाने के लिए किसी मंदिर जाकर प्रार्थना करने या कोइ मूर्ति किसी चित्र आलेख्य की आवश्यकता नहीं होती आपकी एक अल्प प्रतीति पाने से लेकर आपको कई पहर तक प्रेम दृष्टी से निहारते रहना उतना ही पवित्र है उतना ही भक्तिमय उतना ही सुन्दरतम है
जितना कि
एक माला फेरता हुवा कोइ साधू खो जाता है अपने ईष्ट में🖤🌻🖤
मेरी जिंदगी है तू ✍️
कितना अजीब था न हमारी कहानी का अंत जानते हुए भी हम कहानी का हर पन्ना पढ़ते चले गए अभी अभी तो ये कहानी शुरू हुई थी हम एक दूसरे के दोष देखे बिना बस प्रेम में थे (शायद हमेशा रहेंगे) जल्दबाजी में हमने कहानी का आखिरी पन्ना पहले ही पढ़ लिया लिखा था कि कहानी के अंत में दोनों किरदार अपनी अपनी दुनियां में वापस चले जायेंगे कभी न खत्म होने वाली यादें लिए एक दूजे की तमाम तस्वीरें मन में लिए इसके बावजूद हमने तय किया कि कहानी को पूरा पढ़ेंगे हर पन्ने को पढ़कर उसे जिएंगे मुलाकात नहीं होगी नहीं सोचेंगे हां दूरियों के किस्सों में साथ रोएंगे और कहानी के अंत में दोनों ही भूलने का दिखावा करेंगे जैसे कभी मिले ही न हो हम जैसे अजनबी थे हमेशा से खैर ये मेरे ख्याल फ़िज़ूल है ❤️😒
नए साल से थोड़ा अपने आप को बदलिए थोड़ा अपने लिए,थोड़ा अपने आसपास वालों के लिए,थोड़ा उनके लिए जिन्हें आपसे उम्मीदें हैं,और थोड़ा उनके लिए जिन पर आप निर्भर हैं बहुत ज़्यादा नहीं,बस थोड़ा-सा क्योंकि बदलाव बोझ नहीं, एहसास होना चाहिए बाक़ी बीते साल का दिल से शुक्रिया उसने जो दिया...!
साल का ये आख़िरी मोड़ सिर्फ़ कैलेंडर नहीं बदलता, दिलों का हिसाब भी माँगता है। कुछ वादों की मियाद पूरी होगी, कुछ उम्मीदें चुपचाप दम तोड़ेगी,कुछ रिश्ते अगले साल की फाइल में बंद होंगे। नया साल– नए रेज़ोल्यूशन ,इसलिए अभी, एक कॉल करलो, मुलाक़ात कर लो, अधूरी बात पूरी कर लो क्यों कि रिश्ते तारीख़ों से नहीं, अनदेखी से टूटते हैं। जो अपने हैं, जो प्रिय हैं, उन्हें कस के थामे रखो।
जैसे राम के लिए सिया हैं...शिव के लिए गौरी हैं, और कृष्ण के लिए राधा है "वैसे ही मेरे लिए तुम हो!
— प्रेम में बस यही फीलिंग आनी चाहिए...कोई कंपीटिशन नहीं...कोई ईगो नहीं. बस उसके बारे में सोच कर सब आसान लगने लगे....सब सुंदर हो जाए. कोई बेचैनी नहीं हो...कोई डर नहीं हो
Urgent requirement :
किसी जरूरतमंद को काम चाहिए चाहिए संपर्क करें
-कम से कम 12वी पढ़ा हो
-वीडियो एडिटिंग का काम सीखा देंगे
-रहना खाना भी देंगे
-सैलरी भी देंगे
जगह - नोएडा
साल का आख़िरी महीना, दिसंबर, हमेशा मेरे दिल को छू लेता है। बाहर जो ये शीतल, ठंडी हवाएँ चल रही हैं, और जो ये गहरा कोहरा हर चीज़ को ढक रहा है, ये सब मिलकर एक अलग ही माहौल बनाते हैं—एक ऐसा माहौल जिसमें मुझे सबसे ज़्यादा तुम्हारी याद आती है, और तुम्हारी ज़रूरी महसूस होती है।
मगर इन सर्द रातों में, मुझे सबसे ज़्यादा सुकून कहाँ मिलता है, जानती हो? तुम्हारे सीने के आलिंगन में। जब मैं तुम्हारी बाँहों में सिमटकर, तुम्हारे दिल की धीमी और स्थिर धड़कन सुनता हूँ, तो मुझे लगता है जैसे मैंने दुनिया की हर अशांति से पनाह ले ली है।
- @chastemonk
यूँ तो मैं किसी को देखता नहीं,पर तुम्हें देखता हूँ तो नज़रें हटती ही नहीं तुम्हारे चेहरे की मासूम सी रौशनी,तुम्हारी आँखों की अनकही बातें,सब कुछ जैसे मुझे रोक लेता हैमानो तुममें ही मेरी दुनिया सिमटी हो,और तुम्हें देखते-देखते ही मेरा हर अशांत पल सुकून में बदल जाता है...!
तुम्हारे मेरी ज़िंदगी में आने से पहले सब कुछ कितना साधारण था, जैसे बस दिन गुजर रहे थे। लेकिन तुम्हारे आने के बाद, हर लम्हा एक त्यौहार जैसा लगने लगा है। तुम सिर्फ मेरा प्यार नहीं हो, तुम मेरी वो आदत हो जिसके बिना मेरा दिन शुरू नहीं होता और न ही ख़त्म होता है। सच कहूँ तो, तुम्हारी वो प्यारी सी मुस्कान मेरी दिन भर की सारी थकान मिटा देती है और तुम्हारी आवाज़ मेरे लिए दुनिया का सबसे सुकून भरा संगीत है।
मुझे सबसे ज्यादा गर्व इस बात पर होता है कि तुम मुझे उस तरह समझते हो, जैसा शायद मैं खुद को भी नहीं समझ पाता। हमारे बीच की वो खामोशियाँ भी कितनी बातें कर जाती हैं, है न? जब तुम पास होते हो, तो लगता है कि दुनिया की सारी मुश्किलें आसान हो गई हैं और मुझे किसी और चीज़ की ज़रूरत नहीं है।
- @chastemonk
कितनी अजीब बात है न…हम चाहे जितना संभाल लें, जितना बचा लें, जितना थामे रहें, एक वक्त आता है जब लोग अपनी-अपनी दिशाओं में बिखर ही जाते हैं। जैसे कोई रिश्तों का मौसम हो, जो अपने समय पर आकर बदल ही जाता है, चाहें हम उसे हथेलियों की गर्मी से रोकने की कितनी भी कोशिश क्यों न करें।
समय ने मुझे एक बात बहुत धीरे-धीरे, और कभी-कभी दर्द देते हुए सिखाई, लोगों का चले जाना हमेशा हमारी कमी नहीं होता। कई बार वह बस जीवन का प्राकृतिक क्रम होता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे पेड़ की कुछ पत्तियाँ सिर्फ एक मौसम के लिए होती हैं, पूरे जीवन के लिए नहीं। लेकिन इंसान होने की सबसे बड़ी मुश्किल यही है कि हम हर पत्ती को अपनी शाख़ समझ लेते हैं और उसके झड़ने पर खुद को दोष देने लगते हैं।
मैं भी कभी यही सोचता था कि हर रिश्ता बचाए रखने की जिम्मेदारी मेरी ही है। दूसरों के बदलने, दूर होने, ठहरने या थक जाने को भी मैं अपनी गलती की तरह ढोता था। लेकिन धीरे-धीरे समझ आया कि रिश्तों का भार अकेले किसी एक के कंधों पर नहीं टिकता। दो लोग मिलकर ही एक रास्ता तय करते हैं। अगर किसी एक के कदम रुक जाएँ, मुड़ जाएँ या थक जाएँ तो दूसरे को दोष नहीं दिया जा सकता, बस स्वीकार करना पड़ता है कि जिंदगी की धाराएँ अलग हो रही हैं।
और सच कहूँ तो हर विदाई विनाश नहीं होती। शुरुआत में लगता है जैसे सब खत्म हो गया। जैसे दुनिया थोड़ी छोटी, थोड़ी खाली हो गई। लेकिन कुछ देर बाद में समझ आता है कि जो लोग चले गए वे शायद उतने ही समय के लिए हमारे हिस्से में थे, जितनी सीख हमें उनसे लेनी थी। किसी ने हमें सहनशील बनाया, किसी ने मजबूत, किसी ने नाजुक हिस्सों को पहचानने की ताक़त दी। हर व्यक्ति, जो कभी पास था और अब नहीं है वह हमें थोड़ा और पूरा कर गया है।
तो फिर इतना मानसिक तनाव क्यों लेना? शायद इसलिए नहीं लेना चाहिए क्योंकि पकड़ कर रखने की कोशिश में हम अपना वर्तमान खो देते हैं। क्योंकि जो लोग सच में हमारे रहने लायक होते हैं, उन्हें हम संभालते नहीं वो खुद रुक जाते हैं। वो खुद ठहर जाते हैं। रिश्तों की असल परीक्षा शब्दों, वादों, बातों में नहीं बल्कि उस चुप्पी में होती है जिसमें दूसरे का दिल खुद-ब-खुद वापस चला आता है।
मैं अब यही सीख कर जीता हूँ कि लोग आएँ तो सम्मान से, जाएँ तो शांति से। न किसी के आने पर आसमान चढ़कर उम्मीदें बाँधूँ, न किसी के जाने पर अपने भीतर के घर को जला दूँ। आखिर हम सब अपने-अपने रास्तों के यात्री हैं। कुछ लोग बस थोड़ी दूर तक साथ चलने आते हैं, और कुछ लोग जीवन की लंबी सड़क पर हमारी तरह थकते-उभरते आगे बढ़ते रहते हैं।
कभी-कभी दूरी ही वह सम्मान होती है जो किसी रिश्ते को दिया जा सकता है और स्वीकार ही वह समझदारी जो खुद को दी जा सकती है।
इसलिए मैंने धीरे-धीरे ये स्वीकार कर लिया है कि कोई भी हमेशा के लिए नहीं आता और यही सच मुझे मजबूत भी करता है और शांत भी। जब जाना ही है तो अपने मन को क्यों तकलीफ़ दें? क्यों हर पीड़ा को अपने भीतर की गलती माने? क्यों हर बिछड़ने को अपने अस्तित्व पर चोट समझें?
अब मैं बस इतना समझता हूँ कि लोग जाते हैं, पर हम बच जाते हैं। हमारी सीख, हमारी समझ, हमारी संवेदनाएँ यही हमारे साथी हैं, और यही हमें आगे बढ़ने का साहस देते हैं।
शायद इसी को जीवन कहते हैं, जहाँ साथ और विदाई दोनों को एक ही सहजता से स्वीकार करना सीखना पड़ता है।🖤
राघवेन्द्र चतुर्वेदी ✍️
@Raghvendra_101
वक्त बीतता चला जा रहा है, मंज़िल हमसे दूर होती चली जा रही है, देखते-देखते यह साल भी खत्म हो गया, पूरे साल सोचते ही रह गए कि क्या करूं, क्या न करूं – अजीब विडंबना है।
अब दिल के अंदर एक अजीब-सी खामोशी घर कर गई है; सपने तो बहुत थे, पर हिम्मत हर मोड़ पर लड़खड़ा गई। हर रात सोचा, “कल से सब बदल दूंगा,” मगर हर सुबह वही उलझन, वही डर, वही अधूरा-सा मैं जाग उठता रहा। लगता है जैसे ज़िंदगी मेरी उँगलियों के बीच से रेत की तरह फिसलती रही और मैं बस मुट्ठी भींचता ही रह गया।
आज इस साल के आख़िरी मोड़ पर खड़े होकर दिल काँप जाता है कि कहीं यूँ ही पूरी ज़िंदगी सोचते-सोचते न बीत जाए। मन चीखकर कहता है – या तो अब उठ, या फिर हमेशा के लिए ख़ुद को खो दे; क्योंकि अगला साल नहीं, अगला क़दम तय करेगा कि मैं ज़िंदा हूँ या बस साँसें ले रहा हूँ।
जय श्री राम! जय श्री राम! राजा राम!
जय जय सीताराम!!🚩
मा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कल पावन अयोध्या धाम में प्रभु श्री रामलला के दिव्य मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे और मंदिर के शिखर पर केसरिया ध्वज के विधिवत आरोहण के इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनेंगे। यह संपूर्ण राष्ट्र के लिए अत्यंत भाव-विह्वल करने वाला और आध्यात्मिक उत्कर्ष का अवसर है।
रामलला के मंदिर शिखर पर केसरिया ध्वज का आरोहण, यह क्षण हमारी आस्था, संस्कार, परंपरा और राष्ट्रधर्म की अनंत ज्योति का प्रतीक बनकर सदियों तक स्मरण किया जाएगा। प्रभु श्री राम केवल आराध्य नहीं, बल्कि भारतवर्ष की आत्मा, चेतना और आदर्शों के शाश्वत आलोक हैं।
@narendramodi
#Maharashtra #RamMandir #Ayodhya
कुछ चोटें दिखाई नही देती सिर्फ अंदर ही अंदर बहुत गहरा घाव दे जाती है,सिर्फ इतना सुनते ही मैं समझ गया था कि वह आज भी वहीं है जहां आज से कुछ वर्ष पूर्व थी एक इंच भी नहीं खिसकी उस बिंदु से खैर!..यह भी कोई बुरी बात नहीं है कि व्यक्ति एक बार फैसला करें और वह फैसला सालो बाद भी ना बदले!