!! साथी की मौत पर आवाज उठाई, तो मिला तबादले का फरमान !!
लखीमपुर खीरी में टीजी-2 रामगोपाल राणा की मौत के बाद प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों पर मध्यांचल डिस्कॉम की कड़ी कार्रवाई, दर्जनों का जबरन स्थानांतरण
लखीमपुर खीरी। गढ़ी पावर हाउस पर तैनात टीजी-2 रामगोपाल राणा की हार्ट अटैक से हुई मौत ने पूरे बिजली विभाग को झकझोर दिया। सहकर्मियों का आरोप है कि अधीक्षण अभियंता ब्रह्मपाल की कथित प्रताड़ना इ�� दुखद घटना की बड़ी वजह बनी। इसी आरोप को लेकर बिजली कर्मियों ने सदर कोतवाली का घेराव किया और नई बस्ती पावर हाउस पर धरने पर बैठकर कार्रवाई व बर्खास्तगी की मांग उठाई।
मृतक के बहनोई महादेव के अनुसार, “शुक्रवार देर रात बंद कमरे में हुई बैठक में रामगोपाल राणा को कड़ी फटकार लगाई गई। वे देर रात घर पहुंचे, पूरी रात सो नहीं सके। सुबह तड़के उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।”
घटना के बाद क��्मचारियों में भारी आक्रोश दिखा। उन्होंने अधीक्षण अभियंता की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि इस विरोध से नाराज़ प्रबंधन ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय सख्त प्रशासनिक कदम उठाए।
जबरन स्थानांतरण का आरोप
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा जारी कार्यालय आदेशों में प्रदर्शन में शामिल बताए जा रहे टीजी-2 कर्मियों और कार्यालय सहा��कों का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर दिया गया। आदेश में उन्हें वर्तमान तैनाती से कार्यमुक्त कर नई इकाइयों में जॉइन करने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह कार्रवाई “आवाज़ उठाने की सज़ा” के रूप में की गई है।
आदेश के मुताबिक कई कर्मचारियों को लखीमपुर से सैकड़ों किलोमीटर दूर अन्य जनपदों/क्षेत्रों में भेजा गया है। साथ ही ईआरपी पर कार्यमुक्त करने के निर्देश भी तत्काल प्रभाव से लागू किए गए।
कर्मचारियों में रोष
बिजली कर्मियों का कहना है कि वे अपने साथी की मौत के लिए न्याय की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रबंधन ने उनकी मांग सुनने के बजाय उन्हें ही दंडित कर दिया। कर्मचारियों के बीच यह संदेश गया है कि यदि वे किसी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगे तो उन्हें भी ऐसी ही कार्रवाई झेलनी पड़ सकती है।
प्रशासन की चुप्पी
इस पूरे मामले में विभागीय उच्चाधिकारियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, कर्मचारियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषी पर कार्रवाई हो और स्थानांतरण आदेश वापस लिए जाएं।
कार्यालय आदेशों ने बढ़ाया विवाद
यूपीपीसीएल मीडिया के हाथ लगे मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के दो अलग-अलग कार्यालय आदेश (दिनांक 27.01.2026) इस पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ देते हैं।
इन आदेशों में स्पष्ट रूप से उन टीजी-2 कर्मचारियों व कार्यालय सहायकों के नाम दर्ज हैं, जो लखीमपुर खीरी में तैनात थे और कथित तौर पर प्रदर्शन में शा��िल रहे। आदेश में लिखा है कि “प्रशासनिक आवश्यकता के दृष्टिगत” उन्हें उनकी वर्तमान तैनाती इकाई से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करते हुए अन्य इकाइयों में स्थानांतरित किया जाता है।
आदेश में दर्ज प्रमुख बिंदु:
# कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से वर्तमान तैनाती से कार्यमुक्त किया गया।
# ईआरपी पर कार्यमुक्त करने के स्पष्ट निर्देश।
# कई कर्मचारियों को लखीमपुर खीरी से हटाकर बरेली, रायबरेली, अयोध���या, सीतापुर जैसे दूरस्थ जनपदों में भेजा गया।
# आदेश में यह भी अंकित है कि यदि कोई कर्मचारी निर्धारित समय पर नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण नहीं करता, तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
# Relieving/Joining की सूचना नियत तिथि तक मुख्यालय को भेजने के निर्देश।
इन दस्तावेजों से कर्मचारियों का यह आरोप मजबूत होता दिख रहा है कि यह स्थानांतरण सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि विरोध प्रदर्शन का परिणाम है।
रामगोपाल राणा की मौत ने जहां विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं विरोध करने वाले कर्मचारियों के तबादले ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब निगाहें इस बात पर है��� कि क्या प्रबंधन संवेदनशीलता दिखाते हुए कर्मचारियों की मांगों पर विचार करेगा, या यह विवाद और गहराएगा।
#UPPCLMedia #MadhyanchalDiscom #LakhimpurKheri #JusticeForEmployees #TG2Staff #OfficeAssistant #TransferOrder #EmployeeProtest #PowerDepartment #WorkplaceHarassment
#AdministrativeAction #VoiceOfEmployees #RamGopalRana
#ERPRelieving #ElectricityWorkers
@CSCegov_ मेरी CSC ID 242457230013 का पासवर्ड भूल गया हूं और जब पासवर्ड फॉरगेट करता हूं तो email id मांगा जाता है तो ईद उस समय की मालूम नहीं है कृपया मदद करे
निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख संघर्ष समिति ने नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर वार्ता हेतु समय देने की मांग की : संघर्ष समिति का पक्ष सुने बिना आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर निर्णय लिया गया तो नियामक आयोग मुख्यालय पर मौन विरोध प्रदर्शन होगा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख विद्युत नियामक आयोग ��े अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को आज एक पत्र भेजकर मांग की है कि वह पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिये गए आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों पर पावर कॉरपोरेशन का जवाब सुनने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को अपना पक्ष रखने के लिए समय दें।
संघर्ष समिति ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि विद्युत नियामक आयोग से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को समय न दिया तो विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर सैकड़ों बिजली कर्मी विद्युत नियामक आयोग के मुख्यालय पर मौन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी नियामक आयोग के अध्यक्ष की होगी।
पत्र में कहा गया है कि समाचार पत्रों के माध्यम से यह विदित हुआ है कि विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष न�� माननीय ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम केआरएफपी डॉक्यूमेंट पर नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों के संबंध में अलग से चर्चा की है। चर्चा यह भी है कि इस बैठक में यह तय हो गया है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा आपत्तियों पर दिए जाने वाले जवाब पर विद्युत नियामक आयोग ने अपनी सहमति दे दी है जिसक��� बाद निजीकरण का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यदि यह सही है तो यह बहुत ही गंभीर बात है कि सरकार, प्रबंधन और विद्युत नियामक आयोग के बीच निजीकरण को लेकर मिलीभगत हो गई है। एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों क�� कौड़ियों के दाम पूर्व निर्धारित निजी घरानों के हाथ बेचने की साजिश है यह ।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में सबसे बड़े स्टेकहोल्डर बिजली के उपभोक्ता और बिजली के कर्मचारी हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से लगभग 60000 संविदा कर्मियों और साढ़े सोलह हजार नियमित कर्मचारियों की नौकरी समाप्त होने जा रही है। हजारों की संख्या में बिजली कर���मियों की पदावनती होने जा रही है। निजीकरण के दुष्प्रभाव से बिजली कर्मचारियों में भारी चिंता और गुस्सा व्याप्त है।
बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 315वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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निजीकरण के पहले वर्टिकल सिस्टम के नाम पर हजारों पदों को समाप्त कर बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने की साजिश : केवल लेसा में लगभग 8000 पद समाप्त करने के निर्णय से बि���ली कर्मियों में भारी गुस्सा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण के नाम पर वर्टिकल सिस्टम लागू कर रहा है और इसके बहाने बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले लेसा में ही 8000 से अधिक पद समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह मनमाने ढंग से हजारों पदों को समाप्त करने के मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करें अन्यथा पावर कार्पोरेशन प्रबंधन उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त कर देने पर आमादा है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि लेसा में 2055 नियमित पद और लगभग 6000 संविदा कर्मियों के पद मनमाने ढंग से समाप्त पर पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन प्रदेश की राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने का काम कर र���ा है जिसका उपभोक्ता सेवा पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने बताया की वर्तमान में लेसा में अधीक्षण अभियंता स्तर के 12 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर आठ किया जा रहा है, अधिशासी अभियंता स्तर के 50 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर 35 किया जा रहा है, सहायक अभियंता स्तर के 109 पद स्वीकृत उन्हें घटाकर 86 किया जा रहा है, अवर अभियंता स्तर के 287 पर स्वीकृत है उन्हें घटाकर 142 किया जा रहा है और टीजी 2 क��� 1852 पर स्वीकृति उन्हें घटाकर 503 किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त लेखा संवर्ग में अकाउंटेंट के 104 पद हैं उन्हें घटाकर 53 किया जा रहा है, एग्जीक्यूटिव अस्सिटेंट के 686 पद हैं उन्हें घटाकर 280 किया जा रहा है और कैंप असिस्टेंट के 74 पद हैं उन्हें लगभग समाप्त कर 12 किया जा रहा है ।
संघर्ष समिति ने बताया कि पद समाप्त करने और छटनी के मामले में सबसे बड़ी मार संविदा कर्मियों पर पड़ रही है। संविदा कर्मियों के छह हजार से अधिक पद समाप्त किए जा रहे हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि जिस प्रकार मध्यांचल में,लेसा और केस्को में और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में हजारों मत समाप्त किये जा रहे हैं उससे बिजली कर्मियों की यह आशंका और बलवती हो गई है की संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण किया जा जाने वाला है। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम तो शुरुआत मात्र है। इससे बिजली कर्मियों का गुस्सा और बढ़ गया ह���।
निजीकरण हेतु किये जा रहे उत्पीड़न और पदों को समाप्त करने की कार्यवाही के विरोध में आज प्रदेश के समस्त जनपदों पर बिजली कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
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🚨मैनपुरी : PWD लिपिक संग मारपीट का मामला🚨
🆔 मामले का वीडियो हुआ था वायरल
⚖️ शहर कोतवाली में पंजीकृत हुआ था केस
🛑 PWD कर्मचारियों का चल रहा धरना प्रदर्शन
👥 आरोपी ठेकेदार संतोष यादव पर गंभीर आरोप
⚠️ पीड़ित वरिष्ठ लिपिक ने जान का खतरा बताया
📍 शहर कोतवाली क्षेत्र के कचहरी की घटना
#Mainpuri #PWDStaff #AssaultCase #Protest #PoliceAction @mainpuripolice
आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद जी ने संसद परिसर में ANI से बातचीत में OPS मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया।
बहुत ��हुत शुक्रिया माननीय सांसद @BhimArmyChief जी
@ANILKUM58758451@UPGovt@aksharmaBharat@myogiadityanath इतनी भीषण गर्मी में हमारे सभी अधिकारी और कर्मचारी साथियों ने मिलकर दिन रात मेहनत करके उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रदान की फिर भी दक्षिणांचल प्रबंधन द्वारा सैलरी को रोका जाना न्याय संगत नहीं है।
बिना संसाधन उपलब्ध कराए फेशियल अटेंडेंस का दबाव बनाना न्यायसंगत नहीं है दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मुख्यालय द्वारा 1892 कर्मचारियों का वेतन रोकना न्यायोचित नहीं है। मानवीय आधार पर कर्मचारियों का वेतन अविलंब निर्गत कि��ा जाए।
@UPGovt @aksharmaBharat @myogiadityanath
*उप्र के बिजली कर्मियों के समर्थन में दिल्ली में 09 जून को नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी की मीटिंग में लिया जाएगा निर्णय: संघर्ष समिति की ऑनलाइन मीटिंग में 22 जून की महा पंचायत की तैयारी: निजीकरण पर प्रबन्धन से पूछे पांच और सवाल*
विद्युत कर्मचारी संयु��्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के प्रांतीय पदाधिकारियों की आज ऑनलाइन मीटिंग हुई । इस मीटिंग में निजीकरण के विरोध में विगत छह माह से चल रहे आंदोलन की समीक्षा की गई और आगामी 22 जून को लखनऊ में होने वाली किसानों, उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों की महापंचायत की तैयारी और महापंचायत में रखे जाने वाले प्रस्तावों पर चर्चा हुई।
ऑनलाइन बैठक में सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर से संकल्प व्यक्त लिया कि छह माह तो कुछ भी नहीं है, निजीकरण के विरोध में आंदोलन तब तक चलता रह���गा जब तक निजीकरण का फैसला पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता।
प्रत्येक सप्ताह के शनिवार और रविवार को निजीकरण पर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पूछे जाने वाले पांच प्रश्नों के क्रम में संघर्ष समिति ने कल पांच प्रश्न पूछे थे आज पांच और प्रश्न पूछे।
पहला प्रश्न - क्या निजी कॉरपोरेट घरानों की सहूलियत की दृष्टि से निजीकरण के पहले ही बड़े पैमाने पर लगभग 45% संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है, हटा दिया ���या है ? भीषण गर्मी में अनुभवी संविदा कर्मियों को हटाए जाने से क्या बिजली आपूर्ति प्रभावित नहीं हो रही है ? क्या ��्रबन्धन बिजली व्यवस्था बिगाड़ कर निजीकरण थोपना चाहता है?
दूसरा प्रश्न - निजीकरण पर पॉवर कारपोरेशन द्वारा जारी frequently asked questions प्रपत्र में लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण नहीं हो रहा है अपितु पी पी पी मॉडल पर सुधार हेतु निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है जिसमें निजी क्षेत्र की 51% और सरकारी ।क्षेत्र की 49% भागीदारी होगी जो लगभग ब���ाबर ही है। प्रश्न यह है कि जिसकी 51% भागीदारी होती है क्या उसका मालिकाना हक नहीं होता ? निजी क्षेत्र की 51% भागीदारी ग्रेटर नोएडा में है । क्या ग्रेटर नोएडा की कंपनी नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड निजी कंपनी नहीं है ?
तीसरा प्रश्न है - पॉवर कारपोरेशन कह रहा है कि निजीकरण इसलिए किया जा रहा है क्योंकि घाटा बढ़ता जा रहा है और घाटे की भरपाई के लिए सरकार को सब्सिडी एवं लास फंड देना पड़ रहा है जो बढ़ता ही जा रहा है और जिस बोझ को अब आगे सरकार वहन नहीं कर सकती । सब्सिडी को घाटा बताना और घाटे में जोड़ना एक बहुत गंभी�� बात है। भारतीय जनता पार्टी ने 2017 में जारी किए गए अपने संकल्प पत्र में लिखा था कि गरीबी की रेखा के नीचे रहने वालों को मात्र 03 रुपए प्रति यूनिट की दर पर बिजली दी जाएगी। इसकी सब्सिडी देना सरकार की बाध्यता है। सवाल है कि पॉवर कारपोरेशन स्पष्ट करे कि क्या निजीकरण के बाद सरकार सब्सिडी की धनराशि नहीं देगी ? यदि निजीकरण के बाद सरकार सब्सिडी की धनराशि देगी तो सरकारी क्षेत्र को यह धनराशि देना बोझ कैसे ह��� ?
चौथा प्रश्न है - 51% हिस्सेदारी बेचकर निजीकरण करने से क्या सुधार की गारंटी है ? उड़ीसा में 1999 में चार विद्युत वितरण कंपनियां बनाकर निजी क्षेत्र को 51% हिस्सेदारी दी गई थी। एक निजी कंपनी अमेरिका की ए ई एस कम्पनी ने चक्रवात में ध्वस्त हुए बिजली के नेटवर्क को बनाने से इनकार कर दिया और यह कंपनी एक साल बाद ही भाग गई। 16 साल के बाद फरवरी 2015 में उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग ने सुधार में पूर्णतया विफल रहन�� के कारण अन्य तीनों विद्युत वितरण कंपनियों का लाइसेंस निरस्त कर दिया था। क्या गारंटी है कि जो उड़ीसा में हुआ वह निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में नहीं होगा ?
पांचवां सवाल है - माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने ट्वीट किया है कि 2017 में 41% ए टी एंड सी हानियों से घटकर 2024 में ए टी एंड सी हानियां 16.5% रह गई हैं। यह उत्तर प्रदेश में बिजली सेक्टर में मा योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में बहुत बड़ा सुधार है। सवाल है कि ऊर्जा मंत्री इतने बड़े सुधार का दावा कर रहे हैं जो आंकड़ों की दृष्टि से सही भी है तो किस अन्य (?) सुधार के लिए उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों का एक साथ निजीकरण किया जा रहा है ?
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माननीय सांसद श्री चंद्रश��खर जी से इस मुद्दे पर हमारी बात हुई थी और हमने कहा था कि आप इसको अपने स्तर से जरूर उठाएं सांसद जी द्वारा मुद्दे को उठाया गया उसके लिए उनका आभार और धन्यवाद। @BhimArmyChief
@bstvlive सभी जगह यही भ्रष्टाचार मचा हुआ है । सरकार कोई संज्ञान नही ले रही । पेल के पैसा आ रहा सरकार से , पेल के भ्रष्टाचार हो रहा । इस बात में पूर्ण सच्चाई है कि बीजेपी सरकार में पैसा खूब आ रहा लेकिन धरातल पर कोई काम नही हो रहा और भ्रष्टाचार चरम पर है । सभी बाबू भ्रष्ट है ।
उपभोक्ता परिषद इस परियोजना पर पहले ही कर चुका था खुलासा की अदानी का टेंडर अक्टूबर 2024 में खुला उन्होंने बी0एच0ई0एल को टरबाइन मशीन का आर्डर जून 2024 में ही दे दिया था उनके पास ऐसी दूरबीन जिससे वह देख लेते हैं या टेंडर उन्हें ही मिलेगा पूरे प्रकरण की सीबीआई स�� जांच करना जरूरी।
ये हो गए शुरू...
कल जब ये बैनर छप रहा होगा, पूंछ में हमारे 15 नागरिकों की हत्या हो चुकी थी जिसमे कई बच्चे शामिल थे। दर्जनों अस्पतालों में गंभीर रूप से घायल है।
लेकिन..
आउटसोर्स कर्मियों द्वारा कार्य के अनुरूप अनुबंध करने, वेतन रुपया 18000 देने,मार्च 2023 में हटाए गए कर्मचारियों को कार्य पर वापस लेने,छंटनी पर रोक लगाने आद��� मांगों के समर्थन में 23-4-25 को MD कार्यालय वाराणसी पर सत्याग्रह किया गया।
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