कुछ खबरें ऐसी होती हैं, जो सीधे मन को छू लेती हैं। आज जब यह देखा कि हमभाषी, जनपद देवरिया के मूल निवासी, युवा राजनेता और चिंतक सत्येंद्र जी की पुस्तक ‘एकात्म यात्रा’ अमेजन पर प्री-बुकिंग के साथ ही बेस्ट सेलर सूची में शीर्ष-तीन में पहुँच गई है, तो भीतर एक गहरी सुखद अनुभूति हुई।
सत्येंद्र जी को मैं केवल लेखक या विचारक के रूप में नहीं, अपने अपनापे के व्यक्ति के रूप में देखता हूँ। देवरिया की माटी, पूर्वांचल की संवेदना और जनसरोकारों की जो सरल लेकिन दृढ़ चेतना उनमें दिखाई देती है, उसे मैंने करीब से महसूस किया है। पूर्वांचल को विकसित, खुशहाल व समृद्ध बनाने की उनकी मुहिम में हमेशा एक बेचैनी और अपने लोगों के लिए कुछ कर गुजरने की लगन दिखी है।
‘एकात्म यात्रा’ का इतना आत्मीय स्वागत इस बात का भी संकेत है कि पाठक आज भी विचार, संवेदना और सरोकार से जुड़ी पुस्तकों को पूरे मन से अपनाते हैं। यह उपलब्धि केवल एक किताब की नहीं, बल्कि उस भावभूमि की भी है जो मनुष्यता को जोड़ने की कोशिश करती है।
@isatyendra जी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। यह सफलता और आगे बढ़े, उनकी यह यात्रा और भी अधिक लोगों के मन तक पहुँचे, यही कामना है।
@sbhashatrust
Shiva Ganga Express -12559 starting at BNRS… a group of people were denied boarding the train saying that the coach was reserved to the Railway staff.. When we asked them to show the ID cards they abused us and beat us and even tried to break our mobiles.. no action taken by RPF
@RailMinIndia@RailwaySeva
12572 ट्रेन का कोई माई बाप है की नहीं ?
एक तो टिकट मुश्किल से मिलता है ,ऊपर से ट्रेन को जहां से खुलना है वहीं से लेट है....
ऐसे कैसे होगा ?
असम की महान जनता को इस ऐतिहासिक प्रचंड जनादेश के लिए कोटि-कोटि नमन और हार्दिक आभार।
यह प्रचंड विजय केवल एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के दूरदर्शी नेतृत्व, सेवा-समर्पण और सुशासन पर जनता की अटूट आस्था का सशक्त प्रमाण है।
लोकप्रिय जन नेता मुख्यमंत्री श्री @himantabiswa जी के गतिशील और जन-केंद्रित नेतृत्व ने विकास को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है।
भाजपा और एनडीए के प्रत्येक समर्पित कार्यकर्ता को इस अभूतपूर्व विजय के लिए हृदय से बधाई देता हूँ।
यह जनादेश ‘विकास, विश्वास और सांस्कृतिक विरासत’ के उस संकल्प की विजय है, जो एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर असम के निर्माण के लिए निरंतर अग्रसर है।
मैं और आशुतोष द्विवेदी जी एक साथ BE कर रहे थे। दोनों की सिविल ब्रांच थी।
मुझे आज भी वो दिन बहुत अच्छे से याद है जब थर्ड सेमेस्टर की फीस देने के लिए बैंक से लोन नहीं पास हो पाया था। सरकार की नजरों में हम जन्मजात करोड़पति थे तो छात्रवृत्ति जैसी कोई स्कीम थी नहीं।
तब ये हमारे संकटमोचन बने। इनके पिता जी (अंकल जी) शहर के बड़े पत्रकार थे। उन्होंने सिर्फ उस सेम में नहीं बल्कि पूरे BE की फीस को चेयरमैन से बात कर किसी तरह से मैनेज करवाया। तब मुझे पत्रकारिता की अहमियत समझ आई और वो पहला दिन था जब मेरे मन में भी पत्रकार बनने की लालसा जगी ताकि यथासंभव जरुरतमंद की मदद कर सकूं। आज नतीजा आपके सामने है।
अब आप सोच रहे होंगे मैं ये सब आज क्यों बता रहा हूं? उसका कारण है कि आज इनका जन्मदिन है। ये मेरे जीवन के बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। जन्मदिन की बहुत बधाई दादा। भगवान आपको खूब तरक्की दें, हमेशा ख़ुश रखें। @ashurew
#Note- मैं पूरे जीवन में अपने साथ थोड़ा भी अच्छा करने वाले और थोड़ा भी बुरा करने वाले दोनों को याद रखता हूँ। सही समय आने पर सूद समेत वापिस जरूर करता हूं।
[हम यही चाहते हैं कि मीरजापुर, वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर, बलिया, गोरखपुर, देवरिया, छपरा, चंपारण और आरा आसपास के सभी भोजपुरी भाई बहन अपनी बुद्धि, बल, पौरुष, वीरता और संगठन से संपूर्ण देश को लाभ पहुंचाएं। इसके लिए अपनी भोजपुरी भाषा की मदद से उसे जगाकर सब उठ खड़े हों। भोजपुरी समाज और भाषा, संस्कृति चिरंजीवी रहे, यही हमारा संकल्प रहे। -राहुल सांकृत्यायन]
आचार्य पं. #विद्यानिवासमिश्र बहुत समय तक महापंडित राहुलसांकृत्यायन के साथ रहे थे । एक दिन वे कुशीनगर गये । वहाँ भगवान् बुद्ध की प्रतिमा है ,जिसमें वे महानिर्वाण की मुद्रा में लेटे हुए हैं ।राहुलसांकृत्यायन ने प्रतिमा के चरणों में माथा नवाया। मिश्रजी ने भी नवाया। लेकिन मिश्रजी माथा नवाने के बाद थोड़े हंसने लगे। राहुलबाबा ने उनकी मुसकान को देखा भी और समझ भी लिया ,आखिर बाबा कम्युनिस्ट जो थे। कहने लगे कि इसीलिए हंस रहे हो कि मैंने बौद्ध चीवर छोड़ दिया है, फिर भी बुद्ध के सम्मुख झुक रहा हूं, क्यों? क्योंकि झुकने से हर दफा उठने की नई संकल्प शक्ति मिलती है।
वह साहित्य के सर्जक थे, कहते थे कि जिस साहित्य में करुणा नहीं है , जिस साहित्य में लोकजीवन की संवेदना नहीं है, माधुर्य और शाश्वत की ओर ले जाने वाला चिंतन नहीं, वह साहित्य नहीं,कचरा है।
#महापंडित #राहुलसांकृत्यायन ने मातृभाषा शीर्षक निबन्ध लिखा था और भारत में लोकभाषाओं के जनतन्त्र का सवाल उठाया था । वह भोजपुरी भाषा और भोजपुरी समाज में देश और मानवता के लिए महान शक्ति, विचार और चरित्र का महानतम स्रोत देखते थे, इसलिए इसके संरक्षण के लिए वह सदा व्याकुल रहते थे।
राहुल सांकृत्यायन जी का भोजपुरी में लिखा हुआ एक पत्र
हर्नक्लिफ ,हैपी वैली , मसूरी
21.6.52
रघुबंस भैया,
...जबले मतारी के दूध के साथ पीयल भाखा(भाषा) के मान-सम्मान ना बढी तबले गरीब जनता के उधार (उद्धार) ना होई।
भोजपुरी के कवन रुप होखे के चाहीं , ओमे कविता में कथा में कइसे लिखेके चाहीं, सबदन में इस्तिरी मैं पुरुखा के विचार कइसे होखे के चाहीं , एहि सब बातन के फेर में अबहिन पड़े के नइखे । अबहिन त निमन-निमन चीज कविता में हो , चाहे बतकही में, लिखके आवे के चाहीं ।
हमनी के भाखा में छपरा , आरा , और बनारस-आजमगढ में फरक बाटे और फरक तो दस-दस कोस में देखल जाला । एके अबहिन फिकिर करैके काम नइखे । जेकर बोली जौना इलाका के होखे , उ अपने बोली में लिखो , आगे चलके अपने रहता निकरि आई । भोजपुरिहा जवान अपनी बोली में जे किछु थोड़ा-बहुत लिखत बाडे , ओसे पता लागता जे भोजपुरी भाखा के आग उजियार बा ।
हम इहै चाहत बानी कि मिरजापुर , बनारस , जौनपुर , आजमगढ , गाजीपुर , बलिया , गोरखपुर , देवरिया , छपरा , चौपारन औ आरा के सब भोजपुरिहा भाई अपना बुद्धि , बल , पौरुख , बिरताई से समुचा देस के फैदा करावे खातिर अपनी भाखा के मदत से उठिके खड़ा होई जाव । " भोजपुरी " चिरंजीवी रहे , इहे हमार मनसा बा ।
[हम यही चाहते हैं कि मीरजापुर, वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर, बलिया, गोरखपुर, देवरिया, छपरा, चंपारण और आरा आसपास के सभी भोजपुरी भाई बहन अपनी बुद्धि, बल, पौरुष, वीरता और संगठन से संपूर्ण देश को लाभ पहुंचाएं। इसके लिए अपनी भोजपुरी भाषा की मदद से उसे जगाकर सब उठ खड़े हों। भोजपुरी समाज और भाषा, संस्कृति चिरंजीवी रहे, यही हमारा संकल्प रहे। -राहुल सांकृत्यायन]
अपने के
राहुल
( #भोजपुरी वर्ष 1 , अंक 1 जुलाई , 1952 )
#राहुलसांकृत्यायन #Rahulsankrityayn
#पूर्वांचल #भोजपुरगणराज्य
@RailMinIndia का कोई माई बाप है या राम भरोसे है ?
जिस ट्रेन को शाम में 3 बजे जाना था वो रेशेड्युल होकर सुबह 3 बजे हो गई लेकिन अभी तक ट्रेन चलने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं....
@AshwiniVaishnaw@RailwaySeva@drm_dli
@RailMinIndia क्या मजाक है ये ?
जब सुपरफास्ट ट्रेन का ये हाल है तो बाकी ट्रेनों से क्या उम्मीद कर सकते हैं ? यात्रा से चार घंटे पहले ये बताया जाता है कि ट्रेन 10 घंटे बाद जाएगी।
@RailwaySeva@AshwiniVaishnaw
@RailMinIndia क्या मजाक है ये ?
जब सुपरफास्ट ट्रेन का ये हाल है तो बाकी ट्रेनों से क्या उम्मीद कर सकते हैं ? यात्रा से चार घंटे पहले ये बताया जाता है कि ट्रेन 10 घंटे बाद जाएगी।
@RailwaySeva@AshwiniVaishnaw
@nehafolksinger@Uppolice इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो।यह वक्त देश के सैनिकों का मनोबल बढ़ाने का है, यह देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रही हैं इन्हें खिलाफ विधिक कार्यवाही की जाए।