चित भी मेरा, पट भी मेरा!
किताब भी यही बेचेंगे,
पढ़ाएंगे भी यही।
सेटिंग भी यही करेंगे,
सीट भी यही बेचेंगे।
रद्द भी यही करवाएंगे,
फिर आंदोलन में भी यही बैठेंगे।
कोर्ट भी यही दौड़ेंगे,
तस्वीरें भी यही खिंचवाएंगे,
जंतर-मंतर के आंदोलन को भी यही कोसेंगे।
मतलब खेल भी इनका, नियम भी इनके, फैसला भी इनका और फायदा भी इनका।
आप बस तैयार रहिए
भीड़ बनने के लिए। @JmmJharkhand@HemantSorenJMM
सच्चाई यह है कि कोचिंग माफिया और विपक्षी दलों से जुड़े कुछ लोग जानबूझकर छात्रों को बरगलाकर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं
आज गरीब और सामान्य परिवारों के बच्चे मेहनत और अपनी योग्यता के बल पर सरकारी नौकरी में आकर सेवा दे रहे है तो कुछ लोगों को बात पच नही रही