उपोषणाचा आज 14 वा दिवस.. पोटात अन्नाचा कणही नाही... पण सरकारकडं या विद्यार्थ्यांना भेटायला एक क्षणही नाही?
किती संतापजनक प्रकार आहे.
या विद्यार्थ्यांच्या आरोग्याला काही झालं तर शासन आणि शासनाचे प्रमुख म्हणून मुख्यमंत्री मह���दय तुमची जबाबदारी राहील. तुमच्यात थोडीही संवेदना शिल्लक असेल आणि काळजात थोडाही ओलावा असेल तर विद्यार्थ्यांच्या मागण्या तातडीने मान्य करून त्यांचं उपोषण सोडवाल. देशाच्या उद्याच्या भविष्याला असं तडपायला लावून तुम्ही काय मिळवत आहात?
@Dev_Fadnavis
@drashokuike_mla
#StudentsRights #StudentsProtest #आदिवासी_विद्यार्थी_आंदोलन
CRPF’s CoBRA commando says village strongman physically abused his family, Kanpur police in Uttar Pradesh registered cases under mild sections.
मैं देश की रक्षा करूँ या परिवार की रक्षा करूँ?
भाजपकडून महिला आरक्षणाच्या आडून जी देशभर नौटंकी सुरु आहे त्या नौटंकीचा एक ��ाग म्हणून भाजपने वरळी येथील जांभोरी मैदान याठिकाणी विरोधी पक्षांच्या विरोधात एक मोर्च्या काढला होता.
या मोर्चामुळे त्याठिकाणी ��्रचंड वाहतूक कोंडी झाली होती एक महिला अनेक तासांपासून वाहतूक कोंडीत अडकली होती यामहिलेने भाजपच्या नेत्यांना मोर्च्यात येऊन जाब विचारला आणि मंत्री गिरीश महाजन यांची तर इज्जत काढली!
देश के नागरिक चैन की नींद इसलिए सो सकते हैं, क्योंकि सरहदों पर हमारे जवान सजग रहते हैं।
लेकिन मोदी सरकार जो बिल लेकर आ रही है, वो केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के मनोबल को तोड़ने वाला है।
उदाहरण के लिए- अगर हमारे घर का निर्णय बाहर से Deputation पर आकर कोई और लेने लग जाए तो क्या हम खुश रह पाएंगे?
संसद हो, चुनाव हो या एयरपोर्ट... हमारे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जो जवान देश की सुरक्षा में प्राणों का बलिदान देने से पीछे नहीं हटते, ये बिल उनके पर काट रहा है।
इस बिल से जवानों के मन में एक मायूसी आएगी, जो देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है।
: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक- 2026 पर चर्चा पर राज्यसभा में @shaktisinhgohil जी का पूरा वक्तव्य-
“यह बिल CAPF अधिकारियों के करियर और अधिकारों के लिए चिंता का विषय है। IPS को वरिष्ठ पद देने से CAPF कर्मियों की प्रगति प्रभावित होगी। समान अवसर और सुरक्षा बलों के मनोबल का ध्यान रखा जाना चाहिए।
सरकार से आग्रह है कि बिना स्टेकहोल्डर परामर्श के बिल आगे न बढ़ाया जाए।”
— The Central Armed Police Forces (General Administration) Bill, 2026 पर AAP MP @SandeepPathak04 जी ने सवाल उठाए।
“हमारी सेनाओं के वीर जवान त्योहारों पर घरों से दूर रहते हैं। CAPF के जवान देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए शहीद हो जाते हैं लेकिन सरकार उन्हें शहीद का दर्जा तक नहीं देती है।
सुप्रीम कोर्ट ने CAPF जवानों के पक्ष में फैसला सुनाया था और अब नरेंद्र मोदी सरकार देश के वीर जवानों के साथ घोर अन्याय क���ने जा रही है।”
The Central Armed Police Forces (General Administration) Bill, 2026 पर AAP सांसद @SanjayAzadSln जी का संबोधन 👇
देश की 15 हज़ार किलोमीटर लम्बी सीमा की सुरक्षा करने वाले, आतंकवाद और नक्सलवाद के ख़िलाफ़ लड़ने वाले CAPF के अधिकारियों और जवानों को न तो शहीद का दर्जा, न पेंशन की सुविधा, यहाँ तक की सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद CAPF के अधिकारियों का हक़ मार रही है मोदी सरकार।
देश के 11 लाख CAPF के अधिकारी और जवान इस घोर अन्याय को देख रहे हैं।
मैं बहुत समय तक मंथन करता रहा कि आखिर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक- 2026 का उद्देश्य क्या है?
आज भी सशस्त्र बलों में IG की कई पोस्ट खाली हैं, लेकिन अधिकारी आने को तैयार नहीं हैं।
आज भी हाईकोर्ट में दो पिटीशन लगी हैं, जहां IPS अधिकारी कह रहे हैं कि हमें डेप्युटेशन पर नहीं जाना है। कुछ अधिकारी आते भी हैं तो उसके पीछे कुछ अपने निजी कारण होते हैं।
जब सरकार खुद ही नियुक्ति करती है तो इस अम्ब्रेला बिल की जरूरत क्या है? अगर सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दरकिनार करने के लिए यह बिल ला रहे हैं तो कोई सफलता नहीं मिलने वाली है।
मुझे आश्चर्य है कि आखिर यह बिल बनाने से पहले क्या सरकार के अधिकारियों ने अदालतों के फैसलों को नहीं पढ़ा?
मेरी मांग है कि जल्दबाजी में लाए गए इस बिल पर दोबारा से विचार-विमर्श किया जाए।
: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक- 2026 पर चर्चा पर राज्यसभा में @VTankha जी का पूरा वक्तव्य-
आज सदन में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक- 2026 पर चर्चा हो रही है, लेकिन यह विधेयक किसी भी तरह से सुधारात्म��� कदम नहीं है।
बल्कि यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को प्रभावहीन बनाने के लिए है। साथ ही CISF, CRPF, BSF, ITBP, SSB के काडर व अधिकारियों के साथ हो रहे प्रणालीगत अन्याय को बनाए रखने का सुनियोजित विधायी प्रयास है, जिसे समाप्त करने की कोशिश सुप्रीम कोर्ट ने की थी।
इन बलों में ज्यादातर अधिकारी वे हैं, जो डिप्टी कमांडेंट पद पर भर्ती हुए, अब उन्हीं पदों से रिटायर हो रहे हैं। सवाल है- कोई भी डिप्टी कमांडेंट, DG क्यों नहीं बन सकता?
सेना में भी अग्निवीर जैसी व्यवस्था लाई गई। अगर देश में स्थिति ऐसी रहेगी तो सेनाओं और सशस्त्र बलों में जवान किस इंटेंशन के साथ भर्ती होना चाहेंगे।
BJP सरकार आज उस वर्ग से अन्याय कर रही है, जो देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान तक देने की हिम्मत रखते हैं। इसलिए मेरी मांग है कि इस बिल को वापस लिया जाए।
: राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक- 2026 पर चर्चा पर @digvijaya_28 जी का पूरा वक्तव्य-