आदरणीय नेताजी, एक बात समझ नहीं आ रही। 🙏
आपके शुरुआती वीडियो में आप खुद कह रहे थे कि सरकार से 5 घंटे वार्ता चली, और उसकी तमाम बातें भी आप ही बता रहे थे। अब नए वीडियो में आप कह रहे हैं कि 5 घंटे गाड़ी में बिठाकर रखा गया। वही 5 घंटे, पर कहानी दो।
सरकार ने कहा था कि जिन परीक्षाओं में नियुक्तियाँ हो चुकी हैं, उन्हें जांच के बाद ही रद्द करना ठीक होगा। आपने कहा, "रद्द मतलब रद्द।" सरकार ने मांग मानी, तो अब हाईकोर्ट में स्टे के बाद आप पूछ रहे हैं कि बिना जांच और प्रोटोकॉल के रद्द क्यों किया?
एक सवाल और। जिस रिफॉर्म के मुद्दे पर आंदोलन शुरू हुआ था, वह अब आपकी बातों में कहाँ है? आंदोलन की शुरुआत जिस मांग से हुई, आज वह पीछे छूट गई और बहस बस इस पर रह गई कि "रद्द क्यों किया।"
मतलब सरकार जांच करती तो भी विरोध, न करती तो भी विरोध। लगता है सरकार कुछ भी करती, आपकी नाराज़गी पहले से तय थी। शायद इसलिए कि झारखंड में जेएमएम की सरकार है और आपकी निष्ठा कहीं और जुड़ी दिखती है। 😊
आप तो अपने आकाओं के प्रति वफादारी निभा रहे हैं
आज जब अदालत में पलड़ा हल्का पड़ रहा है, तो बयान बदलकर साख बचाने की कोशिश दिख रही है।
🚨जब JSSCCGL रद्द असंवैधानिक था तो आज कोर्ट पर प्रेशर क्यों बनाया जा रहा है 🚨
JSSC CGL रद्द होने पर जश्न मनाने वालों से आज एक सीधा सवाल है—
अगर खुद कुणाल के बयान में रद्दीकरण की संवैधानिकता पर सवाल उठ रहे हैं, तो फिर उस फैसले पर नाच-गाना किस बात का था?
जिन निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों ने मेहनत से नौकरी हासिल की, उनके भविष्य पर संकट आने को अपनी जीत समझना आखिर कैसी मानसिकता है?
संघर्ष अपने हक के लिए होना चाहिए, किसी दूसरे का हक छिनने के जश्न के लिए नहीं!
अब सवाल पूछे जाएंगे, क्योंकि हजारों युवाओं के भविष्य का हिसाब जरूरी है।
@pravinm53747916
#jssc #jpsc #jssccgl
#jharkhand
🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ 🚨
कुणाल QR ने खुद ही मान लिया—
“JSSC CGL रद्द करना असंवैधानिक था।” 😳
तो भाई, जब रद्दीकरण ही असंवैधानिक था,
तब रद्द होने के बाद लोटा-लोटा आँसू बहाकर मातम क्यों मना रहे थे? 😂
और अब जब कोर्ट भी उसी बात पर सवाल उठा रहा है,
कुणाल साहब और उनके चमचे-बेलचे
@kunalpratap86 सबसे बड़ा गधा तो तुम लोग ही हो, जो 2 साल से एग्जाम रद्द करवाने के लिए उसका तलवा चाट रहे हो, भिखमंगा की तरह।😂😂 वो बोलेगा थूक चाट तो चाट लोगे, रद्दी सब हो के सब।
@kunalpratap86 जो डर जाता है वही हर जगह ढिंढोरा पीटता है भाई साहब। बाघ के साथ फोटो खींचा लेने से कोई बाघ नहीं बन जाता ।😂😂 तुम्हारा फोटो गीदड़ के साथ जायदा सूट करेगा।
यह भाजपा शासित महाराष्ट्र का हाल है।
झारखंड में हेमंत सरकार की CID तो युवाओं के भविष्य के साथ खेलने वाले आरोपियों को भाजपा शासित राज्यों तक से पकड़ कर ला रही है। चाहे वो किसी राज्य में छुपा हो।
विगत वर्षों में 112 से अधिक पेपर लीक हुए, जिसमें केंद्र और भाजपा शासित ही राज्य सबसे ज्यादा शामिल हैं। वहां बीजेपी द्वारा क्या किया जाता है? कितने आरोपियों को पकड़ा जाता है? पकड़ना तो दूर, वहां आरोपियों को तो क्लीन चीट पर क्लीन चीट दिया जाता है।
झारखंड CID की इसी कड़ी कार्रवाई से @BJP4Jharkhand परेशान है। कि वर्षों तक उनके द्वारा फैलाए गए दिमकों को अगर साफ किया जाएगा तो फिर भाजपा किसके लिए साजिश करेगा?
देखिए किस तरह के संघर्ष मेहनत और अपने माता पिता के बलिदान से छात्र JSSC CGL का परीक्षा पास किए हैं
क्या ये 40 लाख दे के आया है ??
अपने अंतरात्मा से पूछिये अगर आपको लगता है कि इनके साथ नाइंसाफी हो रही है तो इनका साथ दीजिए
छात्रों को ढाल बनाकर राजनीति कर रही भाजपा, कोचिंग माफिया के साथ मिलकर युवाओं को उकसाने का काम बंद करे :
भाजपा अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख अब छात्रों और युवाओं को ढाल बनाकर राजनीतिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है। छात्रों के मुद्दे की आड़ में राजनीति करने वालों को झारखंड की जनता पहचान चुकी है।
भाजपा और उससे जुड़े राजनीतिक हित रखने वाले लोग तथा कुछ कोचिंग माफिया छात्रों को उकसाने का काम कर रहे हैं। छात्रों की समस्याओं के समाधान के बजाय उन्हें आंदोलन और टकराव की राजनीति में धकेलना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। भाजपा नेताओं को बताना चाहिए कि वे छात्रों के हित में समाधान चाहते हैं या उन्हें अपनी राजनीतिक लड़ाई का मोहरा बनाना चाहते हैं।
बाबूलाल मरांडी पहले इस बात का जवाब दें कि छात्रों के बीच जाकर उन्हें भड़काने और राजनीतिक नारों में उलझाने से उनके भविष्य का क्या भला होगा? यदि वास्तव में छात्रों की चिंता है तो उनके मुद्दों पर सरकार से बातचीत करें, तथ्य सामने रखें और समाधान का रास्ता सुझाएं। छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करना न तो छात्रहित है और न ही लोकतांत्रिक राजनीति।
बिना किसी ठोस प्रमाण के झामुमो कार्यकर्ताओं को बदनाम करना बाबूलाल मरांडी की हताश राजनीति का परिचायक है। यदि कहीं किसी के साथ मारपीट हुई है या कानून का उल्लंघन हुआ है तो पुलिस-प्रशासन निष्पक्ष जांच करे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन जांच से पहले ही राजनीतिक फैसला सुनाना उचित नहीं है।
भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन कर रही है या आगामी राजनीतिक लाभ के लिए युवाओं के बीच असंतोष को हवा दे रही है। झारखंड के छात्र किसी राजनीतिक दल के मोहरे नहीं हैं। उन्हें अपने भविष्य, रोजगार और शिक्षा की चिंता है; भाजपा को उनके भविष्य से खिलवाड़ करने के बजाय अपनी राजनीति सुधारनी चाहिए।
कोचिंग संस्थानों और शिक्षा के नाम पर कारोबार करने वाले किसी भी समूह को छात्रों की भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यदि किसी को छात्रों की वास्तविक चिंता है तो वह उनके बीच भ्रम और आक्रोश फैलाने के बजाय उन्हें सही तथ्य और उचित मार्गदर्शन दे।
झामुमो छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करता है और किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार के खिलाफ नहीं है। लेकिन आंदोलन के नाम पर हिंसा, उकसावे या राजनीतिक टकराव को बढ़ावा देने का समर्थन नहीं किया जा सकता। कानून अपना काम करेगा और यदि किसी ने कानून हाथ में लिया है तो उसकी जांच होनी चाहिए।
बाबूलाल मरांडी जी को छात्रों की चिंता कम और अपनी राजनीतिक जमीन की चिंता ज्यादा है। छात्र आंदोलन को राजनीतिक प्रयोगशाला बनाने की कोशिश बंद कीजिए। झारखंड के युवा समझदार हैं और वे तय करेंगे कि उन्हें अपने भविष्य के लिए संघर्ष करना है या भाजपा की राजनीतिक पटकथा का हिस्सा बनना है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार युवाओं के हित में लगातार काम कर रही है। भाजपा को यदि कोई ठोस सुझाव देना है तो सरकार के सामने रखे। लेकिन छात्रों को भड़काकर, माहौल खराब करके और फिर उसकी राजनीतिक रोटी सेंकने की कोशिश झारखंड में सफल नहीं होगी।
भाजपा और उसके सहयोगी तत्व यह समझ लें कि झारखंड के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। युवाओं को उकसाने की राजनीति का जवाब तथ्य, संवाद और कानून के रास्ते से दिया जाएगा सड़क पर अराजकता पैदा करके नहीं।
@JmmJharkhand
भाजपा नेताओं को छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करने की आदत छोड़ देनी चाहिए :
भाजपा नेताओं को छात्रों के मुद्दों की आड़ में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश बंद करनी चाहिए। जो लोग सत्ता में रहते हुए युवाओं और छात्रों के सवालों का समाधान नहीं कर पाए, वे आज छात्रों के पीछे खड़े होकर राजनीतिक ड्रामा कर रहे हैं। जबकि हकीकत अब पूरा देश जान चुका है कि माननीय मुख्यमंत्री ने छात्रों की सभी मांगों को मान लिया है, छात्र अपने घर लौट चुके हैं और 25 अगस्त को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में कई और महत्वपूर्ण निर्णय सरकार छात्र हित में लेने जा रही है।
भाजपा नेताओं की राजनीति अब इतनी कमजोर हो चुकी है कि उन्हें अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए छात्रों को आगे करना पड़ रहा है। छात्र-युवा पढ़ाई, रोजगार और अपने भविष्य को लेकर संघर्ष करें, यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनके आंदोलनों को राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना भाजपा की पुरानी कार्यशैली रही है।
भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी बताएं कि यदि उन्हें वास्तव में छात्रों की चिंता है तो वे छात्रों के बीच जाकर उनके मुद्दों पर सकारात्मक संवाद क्यों नहीं करते? हर प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक दमन बताकर माहौल गरमाना और फिर थाने पहुंचकर राजनीतिक प्रदर्शन करना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करना है।
कानून अपना काम करेगा और किसी भी मामले में पुलिस को कानून के दायरे में ही कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन किसी व्यक्ति पर कार्रवाई को लेकर बिना पूरी जानकारी के पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाना और उसे राजनीतिक रंग देना जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं है। भाजपा को कानून और लोकतंत्र की दुहाई देने से पहले अपने राजनीतिक आचरण का आईना देखना चाहिए।
भाजपा नेता लगातार ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे छात्रों और युवाओं के बीच भ्रम और टकराव की स्थिति पैदा हो। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर कानून हाथ में लेने या राजनीतिक उकसावे की राजनीति को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
भाजपा की परेशानी यह है कि झारखंड की जनता ने उसकी राजनीति को नकार दिया है। अब कभी छात्रों के नाम पर, कभी युवाओं के नाम पर और कभी कानून-व्यवस्था के नाम पर भाजपा अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रही है। जनता सब देख रही है और समझ रही है कि कौन छात्रों के भविष्य की चिंता कर रहा है और कौन उनके मुद्दों को अपनी राजनीति का ईंधन बना रहा है।
बाबूलाल मरांडी से सवाल है?.. कि यदि भाजपा को सचमुच छात्रों की इतनी चिंता है तो वह यह बताए कि केंद्र की भाजपा सरकार के कार्यकाल में युवाओं के रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवालों पर उसने क्या ठोस कदम उठाए? सिर्फ थाने में दो घंटे बैठ जाने से छात्र हितैषी होने का प्रमाणपत्र नहीं मिल जाता।
झामुमो छात्रों और युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करता है, लेकिन किसी भी आंदोलन को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश का विरोध करेगा। भाजपा नेताओं को सलाह है कि छात्रों को आगे करके अपनी राजनीति चमकाने के बजाय खुद मैदान में उतरें और जनता के सवालों का सामना करें।
भाजपा नेताओं को यह समझ लेना चाहिए कि छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर झामुमो से राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। जनता के बीच जाकर लड़ना है तो भाजपा नेता खुद मैदान में उतरें।
@JmmJharkhand