On digging deeper, the collector, Rahul Dwivedi realised that some of them had not appeared for these exams.
Instead, proxies had been propped up.
This scam, however, goes beyond these 236 candidates. | @sukanyashantha reports.
https://t.co/GwyixZOTyn
देश के ज़्यादातर बड़े पॉलिटिकल यूट्यूबर दो ख़ेमे में हैं। भाजपाई और ग़ैर भाजपाई।
कम्यूनल और कम्यूनल। दोनों कम्यूनल हैं।
तर्क और तथ्य से दोनों को कोई मतलब नहीं है।
भाजपाई ��़ेमा धर्म के नाम पर दिन रात ज़हर बो रहा, दंगा कराने में जुटा है तो सेक्युलर ख़ेमा भी पीछे नहीं है। मिसाल के तौर पर कोई ग़ैर भाजपाई यूट्यूबर ये बोलने को तैयार नहीं है कि फटाफट तीन तलाक़ वाला सिस्टम ग़लत था। कोई नहीं कह रहा है चार शादी की मुसलमानों वाली व्यवस्था ग़लत है।
भाजपाई यूट्यूब ख़ेमे को हिंदुत्व पाल रहा है तो ग़ैर-भाजपाई यूट्यूब ख़ेमे को मुसलमान।
समस्या ये है कि यूट्यूब में आपने एक ब���र हिंदू या मुसलमान मजमा जुटा लिया तो आपको उनकी पसंद का ही नाच दिखाना पड़ेगा।
ये नहीं कि हिंदू मजमा जुटाकर कहने लगे कि जाति प्रथा और मनुस्मृति ग़लत है। हिंदू धर्म में छुआ-छूत है। समस्या है। पब्लिक भाग जाएगी।
उसी तरह अगर आपने ग़ैर भाजपावाद के नाम पर मुसलमान मजमा जुटा लिया तो आप अचानक ये नहीं कह सकते के चार शाद���याँ ग़लत है।
ऐसा करते ही आपकी पब्लिक चली जाएगी। वो ये सुनने के लिए आई ही नहीं है।
आपका मजमा तय करता है कि आपका कंटेंट कैसा होगा। मजमा ही मालिक है।