एप्पल पॉलिश कर ज़हर की तरह बेचे जा रहे हैं, कद्दू-लौकी को इंजेक्शन म��रकर फुलाया जा रहा है।
दूध में पाउडर और नाली का पानी घोलकर “शुद्ध” बताया जा रहा है।
सरसों के तेल में जहरीले केमिकल की मिलावट खुलेआम हो रही है।
FSSAI पैसे लेकर थोक के भाव से अप्रूवल दे रहे है।
और इनकी जांच करने वाली एजेंसियों के अधिकारी व्हिस्की पीकर भोजपुरी बीट्स पर थिरक रहे हैं।
जैसे देश की जनता नहीं, उनका मज़ाक चल रहा हो!
ये सिस्टम सड़ा हुआ है, जहाँ हर पैकेट में कैंसर, हर बोतल में जहर और हर कुर्सी पर बेईमानी भरी है।
अब वक्त आ गया है — या तो ये नकली खेल बंद करो, या फिर जनता तुम्हारी नींद उड़ा देगी।
Dear @RBI Governor
Since cheque clearing is now same day It is high time that the cooling off period on adding netbanking beneficiary be reduced from 24 hours to 1-2 hours.
it is a major bottleneck in the digital India move where time is of essence in every transaction.!
@nsitharaman
@nsitharamanoffcz
Folks pls RT this so it reaches the ears of the appropriate people
Never trust SEBI or IRDAI to protect your wealth
Never trust FSSAI labels to protect your health
In India, regulators serve corporates, not citizens
They will pretend to care, while you pay the price! That's the truth
If PSBs continue like this, the tag won’t be ‘public sector banks’ but ‘public scheme bazaars.
Further PSBs will be branded as non-performers and eventually sold off.
@aiboc_in@DFS_India
10 years of broken promises, 10 years of waiting, 10 years of silence from those who claim to be our voice. #FiveDayBanking is not charity, it’s our right. Central unions, do your job!
@aiboc_in@ChVenkatachalam@rupamsmail
देश में कैंसर रोगी बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं, इसका एक कारण मिलावटी सामान, पैक्ड प्रोसेस्ड फूड्स में मिलाए जाने वाले गैर जरूरी केमिकल्स और और जो जरूरी है उनकी मात्रा अधिक होना ,
ऐसी चीजें को रोकने के लिए FSSAI जैसी संस्था का मजबूत होना बहुत जरूरी है , सरकारों के पास लाडली बहना , सयाने भईया , नाराज भौजी और ढिमका जीजा जैसी योजनाओं में करोड़ों खर्च करने के लिए हैं ,
लेकिन FSSAI जैसी संस्था को मजबूत करने का कोई प्लान और रोडमैप नहीं है।
When bankers are denied #5DaysBanking, we demand #6DayWorkWeek for ALL!
Bankers alone can’t save the economy or make India a $5 trillion dream overnight.
It needs collective effort — every central government office, tax department, RBI, DFS, and ministry working equally for the nation’s growth.
@DFS_India@nsitharaman
आजकल बैंक का नाम सुनते ही लोग अक्सर स्टाफ पर गुस्सा निकालते हैं , उन्हें कामचोर समझते हैं , जबकि हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। एक समय था जब बैंक की नौकरी अपेक्षाकृत आसान थी , लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।
डिजिटल इंडिया के इस दौर में बैंक देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। रोजाना करोड़ों का लेन-देन , खातों का प्रबंधन , लोन प्रोसेसिंग , सरकारी योजनाओं का वितरण , केवाईसी अपडेट, डिजिट��� फ्रॉड से निपटना और लगातार बदलते नियमों का पालन ये सब एक साथ बैंक कर्मियों पर भारी दबाव डाल रहे हैं।
स्टाफ की संख्या लगातार घट रही है , लेकिन वर्कलोड लगातार बढ़ रहा है। कई बार छुट्टियों और संडे को भी कर्मचारियों को ड्यूटी पर बुलाया जाता है। टारगेट का दबाव , तकनीकी समस्याएं , और ग्राहक सेवा की जिम्मेदारी यह सब मिलकर बैंक कर्मचारियों को मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से थका देता है।
फिर भी, इन्हीं कर्मचारियों की मेहनत से ग्रामीण क्षेत्रों तक वित्तीय सेवाएं पहुंच रही हैं , सरकारी योजनाओं का लाभ सही हाथों तक पहुंच रहा है , और देश का वित्तीय तंत्र 24x7 चलता है।
अगर बैंकिंग सेक्टर में समय रहते सुधार नहीं किए गए जैसे स्टाफ बढ़ाना, कार्य समय का संतुलन , डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और मज़बूत करना तो इसका असर सीधे ग्राहकों की सेवा गुणवत्ता पर पड़ेगा और सिस्टम पर भरोसा भी कमजोर हो सकता है।
मुनाफा: ₹44,218 करोड़ 📈
मेहनत: हफ़्ते में 6 दिन 🏦
इनाम: हमेशा की तरह… ज़ीरो 😅
जब बैंक कर्मी दिन-रात मेहनत कर सरकार को इतना मुनाफा दे रहे हैं, तो #5DaysBanking देने में क्या कंजूसी?
बैंकर्स भी इंसान हैं, मशीन नहीं—हमारा भी
परिवार है।
@ChVenkatachalam@Bankers_We@DFS_India
A ₹9,000 job in India comes with an attendance app
A ₹9,000 crore project doesn’t publish audited reports
Scrutiny is for the powerless
Freedom is for the connected
Still think accountability is universal?
@nsitharamanoffc इन 55 करोड़ नए ग्राहकों की सेवा के लिए कितने नए बैंक कर्मियों की नियुक्ति की गई! क्या बैंक कर्मचारियों पे काम का बोझ नहीं बढ़ गया!
अच्छी सर्विस मिलती रहे, इसके लिए क्या और कर्मचारियों की भर्ती नहीं होनी चाहिए!... बोलो होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए!!!
अब सिम्पल math लगाइए, कि 55 करोड़ kyc करने के लिए कितने स्टाफ की जरूरत है, बहुत सी शाखाएं सिर्फ 3-4 staff से ही चल रही हैं, उन्हें ग्राहकों की दैनिक जरूरतों को भी पूरा करना है और 550000000 kyc भी करने हैं, लेकिन ये सब सोचना इनका काम नही है...