JSSC CGL के genuine अभ्यर्थियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। सत्य, प्रमाण और कानून आपके साथ हैं। किसी के निराधार आरोप आपकी मेहनत और नौकरी नहीं छीन सकते।
हमें पूरा विश्वास है—न्याय की जीत होगी और CGL अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। माननीय न्यायालय पर भरोसा रखें। ⚖️
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शर्म आनी चाहिए!
पूरा झारखंड आज शोक में है, एक मंत्री का असमय निधन हो गया है,
पूरा राज्य संवेदना व्यक्त कर रहा है और कुछ बेशर्म लोग इसी मौके पर अपनी गंदी राजनीति करने में लगे हैं।
इतना भी कोई नहीं गिरता जितना तुम गिर गए हो।
@GiridihDc@GIRIDIHPOLICE#Giridih#JharkhandShok
वाह कुणाल @kunalpratap86 !
अब सोशल मीडिया की अदालत भी लग गई है क्या? 😏
झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जी पर इतने गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, मानो फैसला भी आ गया और सबूत भी पेश हो गए!
बस एक छोटी-सी दिक्कत है—
आरोपों के साथ तथ्य और प्रमाण दिखाई नहीं दे रहे।
भाई,
माइक पकड़ लेना आसान है,
लेकिन गंभीर आरोपों को साबित करने के लिए सबूत भी चाहिए।
कहीं ऐसा तो नहीं कि
“मेरी बात ही प्रमाण है” वाला नया कानून लागू हो गया है? 😂
@lagatarIN@The_FollowUp@JmmJharkhand@JharkhandLIVEIn@JharkhandPolice
@HemantSorenJMM@JmmJharkhand को इस आदमी का मनसा को समझना होगा।
इस आदमी ने सरकार को बदनाम करने के लिए क्या नहीं किया?
1 सबसे पहले जब आयोग ने 21,22 सितंबर का exam date घोषित किया तो कुणाल ने कहा कि exam नहीं होगा और छात्रों से आंदोलन करवाया।
और साथ ही साथ सारे छात्रों को शपथ दिलवाया गया कि कोई भी छात्र @JmmJharkhand को 2024 के election में vote नहीं देगा।
2 जब exam हो गया तो इस आदमी ने छात्रों को बहकाया कि 650 marks लाने वाला का केवल रिजल्ट होगा, इससे कम marks लाने वाला का कहीं रिजल्ट नहीं होगा।
3 जब JSSC ने रिजल्ट publish किया तो देखा गया कि बहुत ही कम marks पर छात्रों का रिजल्ट हुआ है।
4 इतने कम marks पर रिजल्ट होना अपने आप में साबित करता है कि कुणाल ने सरकार के खिलाफ छात्रों को भड़काया ताकि पार्टी विशेष को फायदा पहुंचाया जा सके।
कुणाल प्रताप सिंह@kunalpratap86द्वारा माननीय झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान एवं पूरी न्यायपालिका को लेकर दिए गए कथित बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक मंच से यह दावा करता है कि “हाईकोर्ट बिक गया है”, तो यह केवल एक सामान्य टिप्पणी नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
ऐसे गंभीर आरोपों के साथ ठोस प्रमाण और तथ्य भी सामने रखे जाने चाहिए। सवाल यह है कि इस दावे का आधार क्या है? कौन-से तथ्य या दस्तावेज इस आरोप को प्रमाणित करते हैं?
लोकतंत्र में सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका से सवाल पूछने का अधिकार सभी को है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाते समय शब्दों के साथ जिम्मेदारी और प्रमाण भी जरूरी हैं।
इसलिए संबंधित व्यक्ति को स्पष्ट करना चाहिए कि—
आरोप का आधार क्या है? प्रमाण क्या हैं? और यह दावा किन तथ्यों के आधार पर किया गया?
न्यायपालिका की आलोचना हो सकती है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर आरोप बिना प्रमाण के नहीं लगाए जाने चाहिए।
#JharkhandHighCourt #Judiciary @kunalpratap86@dgpjh@hemantsoren@JmmJharkhand@JharkhandPolice@The_FollowUp@yourBabulal
झारखंड के ‘कोचिंग-माफिया शिक्षकों’ को शिक्षक दिवस पर कोसों दूर से विशेष शुभकामनाएँ! 😄🙏
जिन्होंने हमें सिखाया—
पढ़ाने से अधिक आसान है परीक्षा पर आरोप लगाना,
परिणाम पसंद न आए तो ‘रद्द करो’ चिल्लाना,
निर्दोष चयनितों के हितों को दरकिनार कर सबको एक ही तराजू में तौलना,
फिर नया बैच निकालकर वही कोर्स दोबारा बेचना,
और आंदोलन के नाम पर चंदे का QR घुमाना!
आपसे मिली सबसे बड़ी शिक्षा—
स्वाध्याय करो, ऊँचा लक्ष्य रखो और अपना भविष्य किसी गुरुजी की दुकान या नेतागीरी के भरोसे मत छोड़ो!
ऐसे ‘महान शिक्षकों’ को शिक्षक दिवस पर कोसों दूर से प्रणाम! 📚😄
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#सर्वपल्लीराधाकृष्णन #राष्ट्रीयशिक्षक #jharkhand #jssc #jpsc
इस माँ का एक-एक आँसू गवाही दे रहा है कि उसने कितने संघर्ष, त्याग और तपस्या से अपने बच्चे को इस मुकाम तक पहुँचाया है।
आज हम सरकार से सिर्फ इतना पूछते हैं—इनकी क्या गलती है?
वर्षों की मेहनत और माता-पिता के त्याग की कीमत आखिर कौन चुकाएगा?
@HemantSorenJMM#jssccgl
@JmmJharkhand@yourBabulal@BJP4Jharkhand@dasraghubar महाशय आंदोलनजीवी हैं... विशाल सर ने कुछ गलत नहीं कहा। भीड़ जुटाकर अराजकता फैलाना और छात्रों को दिग्भ्रमित करना जारी है। सरकार अपना काम कर रही है, लेकिन ये छात्रों को “FIR से कुछ नहीं होता” का ज्ञान दे रहे हैं... महोदय, आपको शर्म आनी चाहिए।
जैसे ही जांच की आंच अपने नेताओं तक पहुंचती है, CBI की याद आने लगती है।
CID की जांच आगे बढ़ी तो बाबूलाल जी और रघुवर जी तक भी आंच पहुंचने का डर है, इसलिए CBI चाहिए—ताकि केंद्र की मोदी सरकार की छतरी मिल सके!
देखिए, ये महाशय किस तरह छात्रों को दिग्भ्रमित कर उनके भविष्य से खिलवाड़ करने पर तुले हुए हैं।
आपके ऊपर 7 केस हैं, शायद आपको इससे कोई फर्क न पड़े। लेकिन झारखंड के गरीब छात्र आपकी तरह दलाली करना नहीं जानते।
छात्रों के भविष्य को अपनी राजनीति और स्वार्थ का माध्यम बनाना बंद कीजिए।