सभी को ये पढ़ना चाहिए, खासकर सोशल मीडिया के उन फर्जी क्रांतिकारियों को, जो कमरे में बैठकर एक ट्वीट से हालात बदल देना चाहते हैं।
उज्जैन में फिलहाल हालात बिल्कुल शांत हैं। प्रशासन शुरू से ही मुस्तैद था। शाही मस्जिद का मामला पिछले कई दिनों से चल रहा था और लोग शांतिपूर्ण तरीके से प्रोटेस्ट कर रहे थे। मस्जिद कमेटी की सरकार और प्रशासन के साथ लगातार बातचीत भी चल रही थी।
बातचीत के दौरान यह तय हुआ कि सरकारी बुलडोजर मस्जिद पर नहीं चलने दिया जाएगा। अगर सरकार को रोड चौड़ीकरण को लेकर कोई आपत्ति है, तो मस्जिद कमेटी इस मामले को अपने स्तर पर हल करेगी। इसके बाद कमेटी मस्जिद के लगभग 3 फीट हिस्से को खुद हटाने के लिए राजी हुई।
ये फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि अचानक उज्जैन का माहौल बिगड़ने लगा था। बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे थे और स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। अगर उस वक्त हालात को संभाला नहीं जाता, तो फसाद होने की पूरी आशंका थी।
भीड़ में दूर-दूर से लोग आए थे। उनमें कुछ ऐसे लोग भी थे, जो माहौल बिगाड़ना चाहते थे। उनका मकसद क्या था, ये मैं नहीं जानती और न ही बिना सबूत उसके बारे में कुछ कहना चाहती हूं।
जो लोग कह रहे हैं कि मस्जिद कमेटी ने सरकार की बात मानकर जाहिलपन किया, उन्हें शायद उस रात का माहौल नहीं पता। अगर हालात नहीं संभलते, तो नुकसान यहां रहने वाले स्थानीय लोगों को उठाना पड़ता।
वे लोग, जो सालों से यहीं रह रहे हैं। जिन्होंने पाई-पाई जोड़कर अपना कारोबार खड़ा किया, घर बनाए और अपनी जिंदगी बसाई।
मैं ग्राउंड पर मौजूद थी। लेकिन मुझे वहां एक भी ऐसा पत्रकार या एक्टिविस्ट नजर नहीं आया, जो सोशल मीडिया पर बैठकर बड़े-बड़े दावे और क्रांति की बातें करते हैं।
भाई, आपका क्या जाता है?
आप लिखेंगे, ट्वीट करेंगे और फिर अपने काम में लग जाएंगे। झेलना तो यहां के लोगों को पड़ता।
पत्थरबाजी के बाद कई FIR हुईं। कई लोगों को उठाया गया, कई लोगों को डिटेन किया गया। बहुत कुछ हुआ, जिसे मैं अभी यहां लिख भी नहीं सकती।
मैं चाहती तो बहुत कुछ लिख सकती थी। मेरे पास विजुअल भी हैं। लेकिन मेरा काम किसी समुदाय को भड़काकर उन्हें परेशानी में डालना नहीं है।
जहां गलत होता है, वहां मैं गलत भी बोलती हूं और लिखती भी हूं। शायद इसी वजह से सहारनपुर के मस्जिद मामले में आज मुकदमे भी झेल रही हूं।
लेकिन पत्रकारिता का मतलब आग में घी डालना नहीं है।
आपके उकसाने से सैकड़ों लोग सड़कों पर निकल आए थे, जिनमें बड़ी संख्या नाबालिग बच्चों की थी। उस वक्त क्या माहौल था, उसे शब्दों में बताना मुश्किल है। दूसरी तरफ के लोग भी पूरी तैयारी के साथ मौजूद थे।
और ये बातें मैं हवा में नहीं लिख रही हूं। मेरे पास पूरे विजुअल हैं। लेकिन हर चीज सोशल मीडिया पर डाल देना पत्रकारिता नहीं है।
दो दिन से मैं अकेली लड़की, 12 से 14 घंटे का सफर करके उज्जैन के ग्राउंड पर मौजूद थी। चाहती तो बहुत कुछ ऐसा दिखा सकती थी जिससे पोस्ट और वीडियो खूब वायरल होते। लेकिन मैं वायरल होने के लिए पत्रकारिता नहीं करती।
मेरा काम लोगों को भड़काना नहीं, बल्कि जो हो रहा है उसे समझना और सामने रखना है।
जमीनी पत्रकारिता बेहद संजीदगी और जिम्मेदारी का काम है।
लिखने को अभी बहुत कुछ है...
अभी लिखती रहूंगी।
Pooja Mathur | Red Chilli Live
Hundreds of Muslims in Ujjain are sitting inside a 600-year-old mosque to stop its partial demolition.
Muslims have packed inside it to stop the bulldozers.
How many more mosque will quench their thirst?
Not a single stone on camera.
Yet police talk like stones were raining.
That announcement is not a ground report. It is cover. Propaganda to sell one line: “we tried dialogue.”
वीडियो उज्जैन की है। BJP राज में सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर अगर किसी समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
आख़िर मुसलमानों के साथ यह अत्याचार कब तक चलता रहेगा?
सवाल सिर्फ एक समुदाय का नहीं, न्याय और संविधान की रक्षा का है।
#Ujjain#MP
सहारनपुर मस्जिद विध्वंस के बाद जब मैंने वहां की ज़मीनी हक़ीक़त सामने रखी, तो मेरे ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज किए गए। इसके बावजूद मैं लगातार ग्राउंड से रिपोर्टिंग करती रही - कभी सहारनपुर, कभी दिल्ली और अब उज्जैन।
ज़मीनी पत्रकारिता बेहद संजीदा ज़िम्मेदारी है। ज़रा-सी ग़लत जानकारी या जल्दबाज़ी से कही गई बात का असर सिर्फ़ एक पोस्ट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि किसी पूरे समुदाय के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है।
पिछले 4 दिनों से मैं घर नहीं गई हूं। दिनभर फील्ड में रहती हूं और रात को ट्रेन पकड़कर किसी दूसरे शहर के लिए निकल जाती हूं। थकान बहुत है, लेकिन ज़िम्मेदारी उससे बड़ी है।
उज्जैन में अब तक जो कुछ मैंने अपनी आंखों से देखा है, वह बेहद दुखद और चिंताजनक है। यहां लिखी या बोली गई आपकी एक छोटी-सी बात भी यहां रह रहे मुसलमानों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।
इसलिए हाथ जोड़कर गुज़ारिश है - किसी भी बात को लिखने या बोलने से पहले उसकी ज़मीनी हक़ीक़त और पूरी जानकारी ज़रूर हासिल कर लें। सोशल मीडिया पर कुछ भी लिख देना बहुत आसान है, लेकिन ज़मीन पर उसके नतीजे बिल्कुल अलग हो सकते हैं।
मैं बहुत ज़्यादा थक चुकी हूं, इसलिए आज इससे ज़्यादा कुछ नहीं कहूंगी।
बस इतना कहूंगी - ख़ुदा के लिए, ऐसा मत कीजिए। जो कुछ देखा है मैने वो बेहद भयावह था।
Pooja Mathur | Red Chilli Live
#ShahiMasjid #Ujjain #Muslim
उज्जैन, मध्यप्रदेश: सड़क चौड़ीकरण के नाम पर मस्जिद के एक हिस्से को हटाने के लिए प्रशासन के दबाव को लेकर स्थानीय लोगों में बेहद नाराज़गी और चिंता है।
साफ कहना है चाहे कुछ भी हो जाए, बुलडोजर तो नहीं चलने देंगे।
पूरा मामला क्या है? ग्राउंड से स्थानीय लोगों की बातचीत और पूरी रिपोर्ट देखें Red Chilli Live पर👇
https://t.co/yVMjwbHquo
Pooja Mathur | Red Chilli Live
#Ujjain #UjjainNews #GroundReport #Masjid #RedChilliLive #PoojaMathur #ShahiMasjid
उज्जैन : मस्जिद का हिस्सा हटाने पर बवाल, पुलिस और लोगों के बीच झड़प
◆ पुलिस ने लोगों पर किया लाठीचार्ज, वहीं लोगों ने पुलिस पर की पत्थरबाजी
#Ujjain | Ujjain | शाही मस्जिद | Shahi Masjid | Madhya Pradesh Police | #MPPolice
Allegations have emerged that, during clashes over the removal of part of the Shahi Mosque in connection with the Ujjain road-widening project, police personnel brutally beat members of the Muslim community who were protesting.
"मेरे बेटे को पॉलिटिक्स में खींचा जा रहा"
◆ परवेश वर्मा थप्पड़ मामले में पीड़ित लड़के के पिता ने कहा
#ParvezVarma | Parvez Verma | Delhi Minister Parvesh Verma
उज्जैन में आर्मी पुलिस तैनात है इससे साफ जाहिर होता है कि प्रशासन की मनसा क्या है।
शाही मस्जिद के लिए हमारे मुसलमान भाई ग्राउंड पर डटे हैं।
लेकिन आप लोग उनके लिए लिख नहीं सकते ?
खुद के जमीर से सवाल पूछो और लिखना स्टार्ट करो। #SaveUjjainShahiMosque
In Hyderabad last week, this woman who works as a daily wage labourer tells me she is worried she will be thrown out of the country after receiving a notice from the SIR. She carries a bag full of documents, old photographs with parents. The legacy of Gyanesh Kumar !!
"अगर हमने तुम्हारी (मुसलमानों की) पूरी पीढ़ियों को खत्म नहीं किया तो हमारा नाम बदल देना!"
सिरौली, लोनी, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश में 13 सितंबर को एक हिंदू महापंचायत में हिंदूवादी दल के नेता ने चेतावनी दी कि वे कानूनी मुकदमों से नहीं डरते और ऐलान किया कि वह मुसलमानों की पूरी पीढ़ियों को खत्म कर देंगे!
उन्होंने अपने हिन्दूवादी दल के सदस्यों पर हुए कथित हमले का ज़िक्र किया और दावा किया कि उन्हें पाकिस्तान, पुर्तगाल और सऊदी अरब से धमकियां मिल रही हैं!