कीर्ति नगर में छत पर पार्टी, सरेआम ताबड़तोड़ हवाई फायरिंग — राजधानी में कानून का खौफ खत्म?
रिहायशी इलाके में कई राउंड गोलियां, वीडियो में साफ दिख रहे चेहरे — दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल
नई दिल्ली (भारतीय प्रसारण निगम)। पश्चिमी दिल्ली के कीर्ति नगर में एक मकान की छत पर पार्टी के दौरान कई लोगों ने सरेआम ताबड़तोड़ हवाई फायरिंग की। जानकारी के मुताबिक, घटना कीर्ति नगर के ई-21 स्थित मकान की तीसरी मंजिल की छत पर हुई।
पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई है। सामने आए वीडियो में गोलियां चलाते लोग साफ देखे जा सकते हैं। एक के बाद एक कई राउंड फायर किए गए, मानो हाथ में हथियार नहीं, पटाखे हों।
जिस बेफिक्री से घनी आबादी वाले इलाके में गोलियां दागी गईं, वह बताती है कि राजधानी में असामाजिक तत्वों के मन में कानून का कोई खौफ नहीं बचा है। यह घटना दिल्ली की बिगड़ती कानून-व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर पेश करती है।
हवा में चली गोली, नीचे किसी की जान पर खतरा
हवा में चलाई गई गोली गायब नहीं होती, वह कहीं न कहीं नीचे गिरती है। घनी बसावट वाले इलाके में ऐसी गोली छत पर खेलते बच्चे, गली से गुजरते राहगीर या बालकनी में खड़े किसी व्यक्ति की जान ले सकती है।
दिल्ली इसका दर्द झेल चुकी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2016 में मंगोलपुरी में शादी की बारात के दौरान चली गोली दूसरी मंजिल की बालकनी में खड़ी 20 वर्षीय युवती के सिर में लगी और उसकी मौत हो गई।
इसी खतरे को देखते हुए संसद ने 2019 में शस्त्र अधिनियम में संशोधन कर हर्ष फायरिंग को अलग से दंडनीय अपराध बनाया। इसके बावजूद राजधानी में ऐसे नज़ारे थमने का नाम नहीं ले रहे।
कहाँ थी पुलिस?
सबसे बड़ा सवाल दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी पर है। रिहायशी कॉलोनी में कई राउंड गोलियां चलीं, तो क्या बीट स्टाफ और पीसीआर को इसकी भनक तक नहीं लगी? अगर लगी, तो मौके पर क्या कार्रवाई हुई?
राजधानी में पार्टी के बीच हथियार निकालकर गोलियां बरसाना अगर इतना आसान है, तो यह स्थानीय पुलिस के खुफिया तंत्र की भी विफलता है। वीडियो में गोली चलाने वाले साफ दिख रहे हैं, इसलिए उनकी पहचान पुलिस के लिए मुश्किल नहीं होनी चाहिए।
पुलिस चाहे तो वीडियो के आधार पर स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज कर सकती है। सवाल यह है कि क्या अब तक एफआईआर दर्ज हुई और क्या किसी आरोपी को पकड़ा गया? अगर नहीं, तो इस देरी का जवाबदेह कौन है?
कानून क्या कहता है
इस तरह की फायरिंग पर एक नहीं, कई कानूनी प्रावधान सीधे लागू होते हैं।
शस्त्र अधिनियम, 1959 की धारा 25(9): हर्ष फायरिंग या उतावलेपन व लापरवाही से हथियार चलाकर मानव जीवन या दूसरों की सुरक्षा खतरे में डालना अपराध है। सजा दो साल तक की कैद, एक लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों है। सार्वजनिक जमावड़ों, धार्मिक स्थलों, शादी-समारोहों और अन्य आयोजनों में गोली चलाना कानूनन हर्ष फायरिंग है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 125: उतावलेपन या लापरवाही से मानव जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में डालना दंडनीय और संज्ञेय अपराध है। मूल सजा तीन महीने तक की कैद या 2,500 रुपये तक जुर्माना है। चोट लगने पर छह महीने और गंभीर चोट पर तीन साल तक की कैद हो सकती है।
अवैध हथियार: अगर हथियार बिना वैध लाइसेंस के थे, तो यह शस्त्र अधिनियम की धारा 3 का उल्लंघन है, जिस पर धारा 25 के तहत कठोर सजा का प्रावधान है। तब यह भी जांच का विषय होगा कि हथियार आए कहाँ से।
लाइसेंसी हथियार: अगर हथियार लाइसेंसी थे, तो धारा 17(3) के तहत लाइसेंसिंग प्राधिकारी लोक सुरक्षा के आधार पर या लाइसेंस की शर्तें टूटने पर लाइसेंस निलंबित या रद्द कर सकता है।
एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य: संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173 के तहत एफआईआर दर्ज करना पुलिस का वैधानिक कर्तव्य है। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार, (2014) 2 SCC 1 में यह स्पष्ट कर चुकी है।
वीडियो बतौर सबूत: घटना का वीडियो भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63 के तहत आवश्यक प्रमाणपत्र के साथ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में अदालत में पेश किया जा सकता है।
जवाबदेही किसकी?
राजधानी की कानून-व्यवस्था की सीधी जवाबदेही केंद्र सरकार की है। संविधान के अनुच्छेद 239AA के तहत दिल्ली में पुलिस और लोक व्यवस्था केंद्र के अधीन हैं, और दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करती है।
दिल्ली में शस्त्र लाइसेंस जारी करने का काम भी दिल्ली पुलिस की लाइसेंसिंग यूनिट करती है। यानी लाइसेंस देने से लेकर हथियारों के दुरुपयोग पर कार्रवाई तक, दोनों जिम्मेदारियां एक ही विभाग के पास हैं।
स्थानीय स्तर पर इलाके में ऐसी गतिविधियों पर नजर रखना थाना पुलिस और उसके बीट स्टाफ की जिम्मेदारी है। फिर भी गोलियां चलीं, तो जवाब भी यहीं से शुरू होना चाहिए।
जवाब मांगते सवाल
इस्तेमाल किए गए हथियार लाइसेंसी थे या अवैध? अवैध थे तो कहाँ से आए, और लाइसेंसी थे तो लाइसेंस निलंबित या रद्द करने की कार्रवाई कब होगी? अगर बीट स्तर पर लापरवाही हुई, तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होगी?
मामला सिर्फ एक छत पर चली गोलियों का नहीं, राजधानी में कानून के इकबाल का है। वीडियो में साफ दिखते चेहरों के बावजूद ठोस कार्रवाई न हुई, तो संदेश यही जाएगा कि दिल्ली में गोलियां चलाना बेखौफ किया जा सकता है।
इस मामले में दिल्ली पुलिस का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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